कहते हैं कि शातिर से शातिर अपराधी भी कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ जाता है.

लेकिन ये कहावत फ़िल्मों में डायलॉग के तौर पर ही अच्छी लगती है. इतिहास गवाह है कि दुनिया में कई ऐसे मामले हुए हैं जिनमें चालाक अपराधी बड़ी ही सफ़ाई से क्राइम को अंजाम देने में सफ़ल रहे और पुलिस सालों बाद भी ऐसे अपराधियों का पता नहीं लगा पाई.

शायद यही कारण है कि जब भी पुलिस के सामने कोई बेहद जटिल केस आता है तो बॉडी लैंग्वैज एक्सपर्ट्स की डिमांड बढ़ जाती है. बॉडी लैंग्वैज एक्सपर्ट्स यानि ऐसे विशेषज्ञ, जो संदिग्ध लोगों के हावभाव को पढ़ कर अनकही बातें ढूंढ पाने में सक्षम होते हैं. अक्सर लोग जब भी झूठ बोल रहे होते हैं तो उनके शब्द कुछ और होते हैं और हाव-भाव और बॉ़डी लैंग्वेज कुछ और बयान कर रही होती है. बॉडी लैंग्वेज विशेषज्ञों को इन्हीं डिटेल्स का पता लगाने में महारत हासिल होती है. पाकिस्तान में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां एक शख़्स सिर्फ़ अपने सिर हिलाने की वजह से पुलिस के चंगुल में फ़ंस गया.

पाकिस्तान में एक दंपति ने अपनी बेटी की केवल इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि वो मॉर्डन विचारों की महिला थी और उसने पाकिस्तान के तथाकथित कल्चर को अपनाने से मना कर दिया था. लेकिन कहानी सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है. 9 सालों तक चला ये केस दरअसल किसी भी थ्रिलर फ़िल्म से कम नहीं था.

2003 में 17 साल की शफ़ीला अपने घर से गायब हो गई थी. इस सिलसिले में शफ़ीला के माता पिता इफ़्तिकार अहमद और फ़रजाना अहमद ने अपनी बेटी के गायब होने के एक सप्ताह बाद एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

इस फ़ुटेज में शफ़ीला के माता पिता का इंटरव्यू मौजूद है. शफ़ीला के पिता इफ़्तिखार अहमद से पूछा गया कि क्या आपकी बेटी के गायब होने में आपका हाथ है? तो अहमद का जवाब था 'नहीं, मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकता' बॉडी लैंग्वेंज विशेषज्ञ क्लिफ़ लैंसले ने इफ़्तिखार और फ़रजाना अहमद की फ़ुटेज को जांचने परखने की कोशिश की है.

हालांकि, साइकोलॉजी एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर लैंसले का मानना है कि सच्चाई दरअसल अहमद के बयान में नहीं, बल्कि उसके हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेंज में छिपी हुई थी.

लैंसले के मुताबिक, जब उसने जवाब दिया तो उसका सिर ऊपर और नीचे की दिशा यानि सहमति में था और उसी लम्हा उसने जवाब भी दिया था. उसकी आंखे हल्की बंद थी, आवाज़ थोड़ी धीमी हो चुकी थी और वो सहमति में सिर हिला रहा था. उन्होंने ये भी कहा कि 'मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था' जैसे वाक्य को अपने बयान में जोड़कर ये सुनिश्चित कर लेना चाहता था कि लोगों को उसकी कही बात पर यकीन हो जाए.

लेकिन शफ़ीला के गायब होने के 9 सालों बाद सच सामने आ चुका है. शफ़ीला के पिता ने प्लास्टिक बैग से शफ़ीला का मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी थी और 2012 में उन्हें आजीवन कैद की सज़ा सुनाई गई थी. शफ़ीला की बॉडी उसके घर से 70 मील दूर केंट नदी के पास मिली थी.

शफ़ीला के केस के दौरान उसके मां-बाप और रिश्तेदारों से भी पूछताछ हुई थी लेकिन उस समय तो उन्हें बिना किसी सबूत के छोड़ दिया गया. हालांकि शफ़ीला की छोटी बहन के बयान के बाद उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा मिली. अलेशा, शफ़ीला की छोटी बहन थी और उसे अपने घरवालों के यहां चोरी करते हुए उसे पुलिस ने पकड़ लिया था. अलेशा ने पूछताछ में बताया था कि उसे भी धमकी मिली थी इसलिए वो कभी अपने घरवालों की सच्चाई को लोगों के सामने नहीं बता पाई थी.

जज ने 52 साल के अहमद और 49 साल की फ़रजाना को कम से कम 25 साल की कैद की सज़ा सुनाई थी और 2003 में गायब हुई शफ़ीला का केस 9 सालों बाद 2012 में हल हो पाया था.

आखिर कैसे सिर्फ़ सर हिलाने से पता चल सकते हैं आपके मंसूबे?

दुनिया के लगभग सभी कल्चर में सिर को ऊपर-नीचे हिलाना सहमति का सूचक माना जाता है, वहीं सिर को साइड से हिलाना, मतलब किसी भी चीज़ को लेकर सहमति नहीं है. लेकिन जिस स्पीड और फ्रीक्वेंसी से सिर का ये इशारा किया जाता है, उसके कई अर्थ निकल कर आते हैं.

मसलन 'सिर को ऊपर नीचे की दिशा में धीरे-धीरे हिलाना अक्सर इस बात का सूचक माना जाता है कि सामने वाला इंसान आपकी बात को ध्यान से सुन रहा है. वहीं तेज़ी से अपना सिर ऊपर नीचे हिलाने का मतलब होता है कि सामने वाले ने आपको काफ़ी सुन लिया है और अब वो बोलना चाहता है.

हालांकि साइकोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई शख़्स सच कहता है लेकिन अपने सिर को 'न' की अवस्था में हिलाता है, तो उस पर संदेह बढ़ जाता है.

ऐसे ही अगर कोई व्यक्ति झूठ बोलता है लेकिन सिर को ऊपर नीचे 'हां' की अवस्था में हिलाता है तो भी ये विरोधाभास है और ऐसे में सामने वाले शख़्स पर शक बढ़ जाता है.

एक्सपर्ट क्लिफ़ लैंसले के मुताबिक, इस एक कारण की वजह से इफ़्तिकार अहमद फ़ंस गया. अहमद से जब उसकी बेटी के मर्डर के बारे में पूछा गया तो उसने जिस समय अपना मुंह खोला उसी समय उसने अपने सर को भी ऊपर नीचे की तरफ़ किया था, इसमें विरोधाभास साफ़ झलक रहा था.

अहमद के शब्दों में तो इंकार था लेकिन उसकी बॉडी लैंग्वैंज में Guilt साफ़ झलक रहा था. बॉडी लैंग्वैंज प्रोफ़ेशनल्स के हिसाब से यही विरोधाभास संकेत दे रहा था कि अहमद झूठ बोल रहा है.

वहीं अहमद इस फ़ैसले से बेहद निराश था. उसने कहा था कि जब पुलिस हम पर बिना किसी आधार के ऐसे आरोप मढ़ रही है, तो इस मामले में हम तो कुछ कर ही नहीं सकते हैं. हमें तो ये सब झेलना पड़ेगा जब तक सच सामने नहीं आ जाता 'इन लोगों को हमें महीनों पहले छोड़ देना चाहिए था. हमें गिरफ़्तार करने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि हम लोगों ने पहले दिन से ही अपना बयान कायम रखा है कि हमारा अपनी बेटी के गायब होने में कोई हाथ नहीं है.

अहमद दंपति दरअसल अपनी बेटियों की लाइफ़स्टाइल को लेकर बेहद सख़्त थे. शफ़ीला के माता-पिता उसके वेस्टर्न पहनावे और मॉर्डन विचारों से परेशान थे और शफ़ीला एक अरेंज मैरिज का प्रस्ताव भी ठुकरा चुकी थी.

साइकोलॉजी और बॉडी लैंग्वेंज आपकी पर्सनैलिटी को किस हद तक प्रभावित कर सकती है, ये इस घटना द्वारा समझा जा सकता है.

Source: Dailymail