पुणे के एक व्यवसायी और माने ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज़ के हेड रामदास माने ने खुले में शौच के ख़िलाफ़ एक मुहिम छेड़ रखी है. इनकी कंपनी सिर्फ़ 2 घंटे में थर्माकोल चिपका कर पोर्टेबल शौचालय बनाने का काम करती है.

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रामदास माने ने कहा, 'हमारी कंपनी की पॉलिसी है कि जब भी कोई लड़की शादी करने जा रही हो और वो टॉयलेट बनाने में असमर्थ हो तो ऐसे में लड़की हमें अपनी शादी का कार्ड भेज सकती है और हम उसके परिवार को शादी के गिफ़्ट के तौर पर टॉयलेट देंगे. एक बार मेरे गांव में सरकार की योजना 'ग्राम स्वच्छता अभियान' के रहत 200 टॉयलेट बनने वाले थे, लेकिन बने सिर्फ़ 198 टॉयलेट ही थे. ऐसे में कुछ दिन में जांच टीम के अधिकारी आने वाले थे, इस हालत में हमारी कंपनी ने मात्र 2 घंटे में थर्माकोल टॉयलेट बनाकर दे दिए. बस फ़िर यहीं से हमारी थर्माकोल सैंडविच टॉयलेट बनाने की शुरुआत हुई.'

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रामदास माने को अपनी पढ़ाई के दौरान सड़क किनारे भी रात गुज़ारनी पढ़ी थी. पढ़ाई ख़त्म करने के बाद उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में काम किया. साल 1994 में नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने थर्माकोल मशीन बनाने का काम शुरू किया. साल 2007 में उन्होंने सबसे बड़ी थर्माकोल मशीन बनाकर लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया. इसी साल उनको अपने गांव के लोगों के लिए थर्माकोल के टॉयलेट बनाने का मौका भी मिला. आज देश का तकरीबन 80 प्रतिशत थर्माकोल इनकी कंपनी ही बनाती है. साल 2016 में सैनिटेशन लीडरशिप अवॉर्ड के साथ-साथ माने को उनके सराहनीय काम के लिए कई और सम्मान भी मिल चुके हैं.

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