8 नवंबर 2016 की रात याद है? जब पीएम मोदी जी ने अचानक से ये ऐलान कर दिया था कि आज रात से 500 और 1000 के नोट नहीं चलेंगे. नोट इसलिए बंद किए जा रहे हैं क्योंकि काला धन, करप्शन काफ़ी बढ़ गया है. हमने भी देश भक्ति और देश हित को देखते हुए घंटों तक लाइन में लगकर 4000 रुपये निकाले थे. ख़ैर अब उसी नोटबंदी की सालाना रिपोर्ट आई है. आरबीआई की 2017-18 की Annual रिपोर्ट बताती है कि 500 और 1000 के नोट जो बंद कर दिए गए थे, उसका पूरा डाटा अब आ चुका है. हालांकि इस रिपोर्ट को पेश करने में आरबीआई ने 20 महीने लगा दिए. रिपोर्ट के मुताबिक, 99.3% पैसा बैंकों में वापस आ चुका है, जिसकी असल कीमत 15.3 लाख करोड़ रुपये है. 8 नवंबर 2016 से पहले 500 और 1000 के नोटों की कुल कीमत 15.41 लाख करोड़ रुपये थी, जिसका मतलब है कि 10,720 करोड़ रुपये वापस नहीं आए हैं.

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नए नोट छापने में 16,298 करोड़ रुपये ख़र्च

नोटबंदी के बाद आरबीआई ने साल 2016-17 में, 500 और 2000 के नए नोट छापने में 7965 करोड़ ख़र्च किए, वहीं उससे साल में इसकी कास्ट 3421 करोड़ रुपये आई थी. साल 2017-18 में 4912 करोड़ रुपये प्रिटिंग के लिए ख़र्च किए जा चुके हैं. यानि कुल देखा जाए, तो नए नोट छापने में 16,298 करोड़ रुपये ख़र्च कर चुकी है.

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क्या नोटबंदी हुई फे़ल!

नोटबंदी इस वजह से की गई थी ताकि काला धन वापस लाया जा सके, भ्रष्टाचार ख़त्म किया जा सके, लेकिन अब साफ़ है कि नोटबंदी फे़ल साबित हुई हैं. जबकि आरबीआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक नोट बंद होने से नकली करेंसी का फ्लो बढ़ गया है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में 500 और 2000 के नकली नोट की संख्या में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है. लगभग 154% तक नकली नोट बढ़े हैं. फ़ाइनेशियल ईयर 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में 100 रुपये की नकली करेंसी में 35 फ़ीसदी और 50 रुपये की नकली करेंसी में 154.3 फ़ीसदी का ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है.

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