कड़ी मेहनत और सच्ची लगन से किया गया हर काम एक न एक दिन सफ़लता ज़रूर दिलाता है. बीजेपी नेता राहुल जाधव की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है. राहुल दस साल पहले जिस शहर की गलियों में ऑटो चलाया करते थे, आज उसी शहर के मेयर बन गए हैं. शनिवार को हुए स्थानीय चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी को भारी मतों से हराकर राहुल पिंपरी-चिंचवाड़ के मेयर चुने गए.

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पिंपरी-चिंचवाड़ के चिखली गांव में एक किसान के घर जन्मे जाधव का बचपन बेहद मुश्किलों और संघर्ष भरा रहा. मात्र 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद राहुल जाधव ने साल 1996 से लेकर 2003 तक परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए ऑटो चलाया. राहुल भले ही आज इस मुकाम पर पहुंच गए हों, लेकिन उनका ये सफ़र इतना आसान नहीं रहा.

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जाधव साल 2003 में ऑटो रिक्शा चलाना छोड़कर खेती करने लगे. लेकिन खेती में लाभ न होता देखकर वो एक निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने लगे. इसी दौरान राज ठाकरे के भाषणों से प्रभावित होकर जाधव महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) में शामिल हो गए. सात साल कार्यकर्ता के तौर पर कड़ी मेहनत करने के बाद साल 2012 में MNS के टिकट पर चुनाव लड़कर PCMS के सदस्य बने. जबकि साल 2017 में निकाय चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था. इस दौरान हुए चुनाव में उन्होंने जाधववाड़ी इलाके से विरोधी उम्मीदवार को 3 हजार से अधिक वोटों से हराया.

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मेयर बनने के बाद राहुल जाधव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि 'मेरी पहली कोशिश यही होगी कि शहर के आम आदमी तक हर सुविधा पहुंचे. क्योंकि मैं साधारण लोगों के दर्द को समझता हूं. संपूर्ण विकास ही मेरी पहली प्राथमिकता होगी. मैं शहर की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए काम करूंगा.
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इस बार जब मेयर पद के लिए मतदान हुआ तो जाधव को 80 वोट मिले, जो एनसीपी उम्मीदवार विनोद नाधे से 33 ज़्यादा थे. इस दौरान भाजपा के तीन और एनसीपी के तीन पार्षदों ने वोट नहीं डाले. जबकि पांच निर्दलीय पार्षदों ने भी जाधव के पक्ष में ही वोट डाले.

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एक समय में दिनभर ऑटो रिक्शा चलाकर मात्र 200 रुपए की कमाई करने वाले राहुल आज लोगों की दशा और दिशा बदलने का काम कर रहे हैं. राहुल जब शनिवार को PCMC मुख्यालय पहुंचे तो कुछ ही घंटों बाद उन्हें औद्योगिक शहर पिंपरी-चिंचवाड़ का मेयर घोषित किया गया. इस दौरान उनकी आंखों में ख़ुशी के आंसू थे.

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