बहुत से देश हैं, जहां पर कुत्तों के मांस को बड़े चाव से खाया जाता है. इन्हीं देशों में शामिल है साउथ कोरिया. हालांकि वहां कुत्तों के मांस खाने वालों में कमी आ रही है. लेकिन अभी भी वहां की स्थिति कुत्तों के लिहाज से चिंताजनक है. जहां बहुत से देश कुत्तों को एक पालतू जानवर के रूप में रखते हैं, वहीं साउथ कोरिया में मांस के रूप में उपभोग के लिए कुत्तों को फार्म में रखा जाता है.

'क्या तुम ठीक हो, तुम ठीक हो न,' Humane Society International (HSI) के कैंपेन मैनेजर Lola Webber एक कुत्ते के बच्चे को सहलाते हुए फुसफुसाते हैं. कुत्ते के बच्चे को अपनी गोद में उठाकर जैसे ही उसे प्यार से झूलाते हैं, नजदीक के पिंजरे में बंद कुत्ते भौंकने लगते हैं.

दरअसल, इस कुत्ते के बच्चे को साउथ कोरिया में डॉग मीट फार्म से रेस्क्यू किया गया है. उसे जिस फार्म से छुड़ाया गया, वहां वह एक जंग लगे पिंजरे में रहता था. लेकिन अब वह एक सुंदर से प्लास्टिक के क्रेट में रहता है. डॉग के इस बच्चे का नाम Demi रखा गया है. उसने एक लंबी यात्रा तय की है और अब उसका आशियाना पिट्सबर्ग, पेन्सिलवेनिया होगा, जहां लोग उसे अडोप्ट कर सकेंगे.

Humane Society International के एक और कैंपेन मैनेजर Andrew Plumbly के मुताबिक, जब तक वो गोद लेने के लिए तैयार भी नहीं हुआ था, तभी हमने देखा कि लोग कुत्ते को गोद लेने के लिए अमेरिका में शेल्टर पर लाइन लगा रहे थे. सभी उसे गोद लेना चाहते थे. इसका कारण था कि लोग इन कुत्तों की दर्दनाक और दुखभरी कहानियां सुनकर काफी प्रभावित हो गये थे.

गौरतलब है कि साउथ कोरिया की राजधानी Seoul से 90 किलोमीटर दूर स्थित फार्म से पहली दफ़ा जिन दस कुत्तों को बचाया गया, Demi उनमें से एक था. इसके अलावा, वहां पर कुल 200 कुत्तों को मानव उपभोग के लिए रखा गया था, लेकिन अब वे Humane Society International के कैंपेन की मदद से पालतू जानवर के रूप में अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत करेंगे.

2015 से अभी तक यह छठा फार्म है, जिसे इस समूह की मदद से बंद करवाया गया है. हालांकि, यह टीम पिछले 6 महीनों से कुत्तों के मेडिकल ट्रीटमेंट्स और टिकाकरण पर नज़रें बनाई हुई थी.

कैंपेन के सदस्य के मुताबिक, क्योंकि एयरलाइन फ्लाइट्स एक दिन में सीमित संख्या में ही कुत्तों को कैरी कर सकती है, इसलिए इन दो सौ कुत्तों को फार्म से रेस्क्यू करने में कम से कम एक सप्ताह लगेगा.

फार्म के मालिक पिछले 30 सालों से इस धंधे में हैं और इस घटना में अपनी पहचान से उसने इनकार किया है. इस धंधे को छोड़ने के लिए उसने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया है.

आपको बता दें कि साउथ कोरिया में अब कुत्तों के मांस खाने में कमी आ रही है. अब वहां कुत्ते के मांस को मुख्य रूप से बूढ़े लोग ही खाते हैं. अब वहां भी कुत्तों को पालतू के रूप में अपनाने का चलन बढ़ रहा है.

HSI का अनुमान है कि देश में करीब 17 हज़ार डॉग मीट फार्म है. साथ ही इस संस्था को उम्मीद है कि साउथ कोरियन सरकार जल्द ही कुत्ते के मांस का प्रचलन अगले विंटर सत्र तक बैन कर देगी. साथ ही इसके बदले वहां सीफू़ड बेचा जाएगा.

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