मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा बीसीसीआई की प्रशासक कमेटी से निजी कारणों से इस्‍तीफा दे चुके हैं. उन्‍होंने इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें पदमुक्‍त करने की गुज़ारिश की है. गुहा ने कहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सीओए प्रमुख विनोद राय को सौंप दिया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर 14 जुलाई को सुनवाई होगी.

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इतिहासकार होने के साथ ही गुहा एक शानदार क्रिकेट इतिहासकार भी रहे हैं. रामचंद्र गुहा को प्रथम श्रेणी क्रिकेट की जानकारियों के साथ अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट और उसके इतिहास के गहरे जानकार के रूप में माना जाता रहा है. इन मसलों पर उनके कॉलम्स राष्ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय पत्रिकाओं में छपते रहे हैं. जाते-जाते उन्होंने सीओए अध्यक्ष और पूर्व सीएजी विनोद राय के सामने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं जो भारत में क्रिकेट के बढ़ते सुपरस्टार कल्चर और गंदी राजनीति की परतें खोलते हैं.

धोनी और कोहली सुपरस्टार कल्चर का हिस्सा हैं

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गुहा ने टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के ए-ग्रेड अनुबंध पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि धोनी टेस्ट से संन्यास ले चुके हैं. ऐसे में उन्हें ए-ग्रेड कॉन्ट्रेक्ट मिलना जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली, मुरली कार्तिक जैसे कई खिलाड़ियों को ए ग्रेड कॉन्ट्रे्क्ट मिलता है, मगर धोनी भारत के लिए सिर्फ सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलते हैं. वे टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, ऐसे में उन्हें ए ग्रेड कॉन्ट्रेक्ट क्यों मिल रहा है?

गुहा ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा खिलाड़ियों के पास कोच-कमेंटेटर बनाने का वीटो पावर है, जो कि सही नहीं है. इससे पहले आईपीएल में हर्षा भोगले को विराट कोहली की आलोचना करने की वजह से निकाल दिया गया था. माना जा रहा था कि इस फ़ैसले के पीछे कोहली का ही हाथ था. धोनी और कोहली से जुड़े ये दोनों मामले सुपरस्टार कल्चर की बानगी है.

घरेलू क्रिकेट की जगह आईपीएल को तरजीह देने लगे हैं खिलाड़ी

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गुहा के मुताबिक रणजी क्रिकेट, दिलीप ट्रॉफ़ी, सैयद अली मुश्ताक जैसे टूर्नामेंट की तुलना में खिलाड़ी और प्रशासक आईपीएल को ज़्यादा तरजीह देते हैं, क्योंकि उसमें ज़्यादा पैसा है. COA अपने गठन के बाद से ही घरेलू क्रिकेट को नज़रअंदाज़ कर रहा है. आज भी रणजी मैच के एक दिन के लिए खिला़ड़ियों को मात्र 30 हज़ार रुपये मिलते हैं, वहीं आईपीएल में खिलाड़ी लाखों-करोड़ों में खेल रहे हैं. रणजी में बेहतर परफॉर्म करने के बजाय आईपीएल से नेशनल टीम में जगह बनाना आसान हो गया है.

कोच कुंबले के साथ अनप्रोफ़ेशनल रवैया

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रामचंद्र गुहा ने कहा कुंबले की अगुवाई में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया है और इसके तहत उनका अनुबंध बढ़ाना चाहिए था, मगर बीसीसीआई ने कोच के पद के लिए फिर से इश्तेहार निकाला है. साफ़ है कि कुंबले के कॉन्ट्रेक्ट को गैर-पेशेवर तरीके से हैंडल किया गया है.

हितों के टकराव रोकने में विफ़ल रहा बीसीसीआई

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गुहा ने कहा कि बीसीसीआई अपने कोच को 10 महीने का कॉन्ट्रेक्ट देती है, ताकि वो बाकी 2 महीने आईपीएल में टीमों के साथ बतौर कोच या मेंटर जुड़ सकें. साफ़ है कि सीओए शुरुआत से ही हितों के टकराव को सुधार पाने में नाकाम रहा है. राष्ट्रीय टीम, जूनियर टीम, सीनियर टीम या राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के कोच द्वारा एक समय पर दो टीमों से जुड़ना ठीक नहीं है. यह लोढ़ा समिति की सिफारिशों के खिलाफ़ है. उन्होंने ये भी कहा कि एक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष, जो कि मीडिया हाउस के साथ भी जुड़ें हैं, ये भी हितो के टकराव की श्रेणी में आता है.

सुनील गावस्कर और राहुल द्रविड़ पर भी साधा निशाना

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उन्होंने सुनील गावस्कर का उदाहरण देते हुए कहा कि वो एक कंपनी के हेड हैं, जो क्रिकेटरों का प्रतिनिधित्व करती है. इसी बीच गावस्कर कमेंट्री भी करते हैं, जो हितों के टकराव का मामला है. इसके अलावा धोनी भी एक कंपनी में मालिकाना हक रखते हैं, जो कई खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने राहुल द्रविड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि जब द्रविड़ इस वक्त भारतीय ए और अंडर-19 टीम के कोच हैं, तो वे आईपीएल में ‘दिल्ली डेयर डेविल्स’ की टीम के साथ बतौर मेंटर कैसे जुड़ सकते हैं? गुहा का मानना है कि ऐसा कर के राष्ट्रीय टीम से जुड़े कोच आईपीएल की कीमत पर राष्ट्रीय टीम की उपेक्षा कर रहे हैं.