अगर खानपान को लेकर लापरवाही बरती जाए, तो बढ़ती उम्र के साथ ही स्वास्थ्य के खतरे भी बढ़ने लगते हैं. हम अक्सर मीठे यानि शुगर के खतरे को लेकर भी बेपरवाह रहते हैं. पर एक नई स्टडी के अनुसार, महज़ 9 दिनों में अपनी डाइट से शुगर की मात्रा घटा कर कई खतरनाक बीमारियों की संभावनाओं को कम किया जा सकता है.

Obesity नाम के जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त 43 बच्चों की डाइट में जब शुगर की जगह स्टार्च डाला गया तो परिणाम चौंकाने वाले थे. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया के लेखक रॉबर्ट लस्टिग ने अपने इस प्रयोग के लिए 9 से 18 साल के 43 मोटापे से ग्रस्त बच्चों को चुना. ये सभी बच्चे हाई ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रोल के बढ़े हुए स्तर से पीड़ित थे और इनके लीवर में भी काफ़ी फै़ट जमा हुआ था.

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9 दिनों के बाद, इन बच्चों के ब्लड प्रेशर में औसतन पांच प्वाइंट्स की गिरावट आई, वहीं कॉलेस्ट्रॉल में 33 प्वाइंट्स की कमी देखी गई, ब्लड शुगर और इंसुलिन की मात्रा में भी कमी देखी गई. इन बच्चों की डाइट से केवल रिफ़ाइंड शुगर को निकाला गया था. खास बात ये थी कि इससे ये बच्चे काफ़ी कम भूख भी महसूस कर रहे थे. यानि डाइट में शुगर की अत्यधिक मात्रा होने से ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगती है, जिससे वज़न बढ़ने लगता है.

डॉ. रॉबर्ट के अनुसार, 'मैंने कभी इस तरह के नतीजे पहले नहीं देखे थे. महज़ 9 दिनों के लिए डाइट से शुगर को हटा कर डायबिटीज़ के खतरे को कम किया जा सकता है'. स्टडी के अनुसार, शुगर सिर्फ़ इसीलिए ही नहीं खतरनाक है क्योंकि उसमें कैलोरीज़ ज़्यादा होती हैं, मगर ये इसीलिए भी खतरनाक है क्योंकि ये आपके शरीर के मेटाबॉलिज़्म पर भी असर डालती है. इस स्टडी से इन बच्चों का कॉलेस्ट्रॉल स्तर बेहतर हुआ और इंसुलिन स्तर में भी गिरावट आई.

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डॉ. लस्टिग के अनुसार, 'इससे आपकी सेहत का हर हिस्सा बेहतर हो जाता है. ये रिसर्च साबित करती है कि अभिभावकों को अपने बच्चों को शुगर देने से पहले उसकी मात्रा ज़रूर चेक करनी चाहिए और उन्हें ये पता होना चाहिए कि वे अपने बच्चों को खाने के लिए जो कुछ भी दे रहे हैं, उनमें पोषक तत्वों और जंक की मात्रा कितनी है.

डॉ. लस्टिग के अनुसार, 'रिसर्चर्स इस बात पर ध्यान दे रहे थे कि जिन बच्चों ने इस स्टडी में भाग लिया, उनका वज़न इस स्टडी के दौरान बराबर बना रहे. वहीं अगर इन बच्चों के वज़न में किसी तरह की कमी आ रही थी तो उन्हें ज़्यादा खाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि शुगर कैलोरीज़ सबसे खराब होती हैं क्योंकि इनसे लीवर में फ़ैट बन जाता है. इससे डायबिटीज़, दिल और लीवर की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.

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टीम के अनुसार, थोड़ा सा भी वज़न घटने का मतलब था कि ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल में बेहतरी देखी जा सकती है. लेकिन जिन बच्चों ने थोड़ा सा भी वज़न नहीं घटाया उनकी भी सेहत बेहतर पाई गई है. हालांकि डॉ. लस्टिग का ये भी कहना था कि 'इससे ये साबित नहीं होता कि शुगर ही मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी बीमारियों का एकमात्र कारण है, लेकिन ये पक्की बात है कि शुगर कहीं न कहीं इसकी ज़िम्मेदार ज़रूर है'. हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना था कि 43 एक बेहद छोटा नंबर है और इस रिसर्च को पूरी तरह से सही ठहराया नहीं जा सकता.

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