अक्सर ऐसा माना जाता है कि जो बातें कई बार होंठो से बयां नहीं हो पाती, उन्हें आंखें बयां कर देती हैं. बॉडी लैंग्वेज और हाव-भाव एक लंबे अरसे से लोगों की मनोदशा बताने में कामयाब रहा है. लोगों के हाव-भावों को पहचान कर कई बार लोग महत्वपूर्ण जानकारियां निकलवाने में कामयाब रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मनुष्य कितने प्रकार के हाव-भाव ज़ाहिर कर सकता है?

दुनिया के साइकोलॉजिस्ट्स ने कई सालों से चेहरे के हाव-भाव पर रिसर्च की है. आमतौर पर लोग खुशी, दुख, डर, हैरानी, गुस्सा, कंफ़्यूज़न, घृणा जैसे हाव-भाव को पहचानने की क्षमता रखते हैं. इस मामले में साइकोलॉजी प्रोफ़ेसर और एफ़बीआई कंसल्टेंट, पॉल एकमेन का कहना था कि 'मनुष्य केवल 6 तरह के हाव-भाव तक सीमित है, जिसमें गुस्सा, डर, हैरानी, खुशी, घृणा और दुख शामिल हैं'.

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग्लासगो ने इस थ्योरी को चैलेंज करते हुए कहा है कि 'मनुष्य केवल चार तरह के हावभाव देने में ही समर्थ है'. उनका कहना था कि 'घृणा और गुस्से के भाव और डर और हैरानी के भावों को एक ही मानना चाहिए, क्योंकि इन सभी मामलों में कमोबेश एक ही तरह के एलिमेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है'.यूनिवर्सिटी के अनुसार मनुष्य केवल खुशी, दुख, गुस्सा/घृणा और डर/हैरानी जैसे भाव ज़ाहिर करने में सक्षम है. चेहरे के एक्सप्रेशंस की Time-lapse वीडियोज़ में इसे साफ़ देखा जा सकता था और बेसिक्स बनने के बाद चेहरे की मांसपेशियां, आपके एक्सप्रेशंस में अंतर बताने में अहम भूमिका निभाती है.

दरअसल एक प्रयोग के बाद यूनिवर्सिटी ने इस बात की पुष्टि की. यूनिवर्सिटी के मुताबिक, घृणा और गुस्सा दरअसल एक ही तरीके से शुरू होने वाले इमोशन हैं . इन दोनों हाव-भाव की शुरुआत नाक पर शिकन के साथ ही होती है.

ऐसा ही कुछ डर और हैरानी के साथ भी था. दोनों ही प्रतिक्रियाओं के समय सबसे पहले लोगों की आंखें चौड़ी होना शुरू होती है. हालांकि ये प्रक्रिया बेहद कम समय तक इंसान के चेहरे पर मौजूद होती है.

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ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स इससे असहमत दिखे. वे जानना चाहते थे कि कई अलग-अलग तरह के इमोशंस चेहरे पर कैसे परिभाषित होते हैं. मसलन एक हैरानी वाली खुशी में भी कोई व्यक्ति क्या उन्हीं मांसपेशियों का इस्तेमाल करता है जो वो एक सामान्य खुशी में करता है?

जब उन्होंने 230 वॉलंटियर्स से 5000 अलग-अलग एक्सप्रेशंस को चुनने को कहा तो रिसर्च में सामने आया कि मनुष्य 21 एक्स्प्रेशंस देने के काबिल है, जिसमें बेसिक हाव-भाव के साथ ही कई एलिमेंट्स का गठजोड़ है.

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गौरतलब है कि इन भावों के कुछ एलिमेंट्स केवल मिली-सेकेंड्स तक ही मौजूद होते हैं. ज़ाहिर है अगर आप किसी शख़्स के भाव को पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो इन खास पहलुओं और एलिमेंट्स पर ध्यान देकर, बेहतर स्तर पर लोगों के इमोशंस के बारे में जाना जा सकता है. इस तरीके में पारंगत होने के बाद मानसिक रोगियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है, वहीं आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी कई स्तर पर इस गतिविधि से फ़ायदा ले सकते हैं.

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