14 जून से रूस में FIFA वर्ल्ड कप 2018 शुरू होने जा रहा है. अब इसमें एक हफ़्ते से भी कम का समय बचा हुआ है. इस बार दुनिया की 32 टॉप टीमें इसमें हिस्सा लेने के लिए रूस पहुंच चुकी हैं. भारत में भी फ़ुटबॉल के दीवानों की कमी नहीं है. ऐसे में सभी की निग़ाहें अपनी फ़ेवरेट टीम और स्टार खिलाड़ी मेसी, रोनाल्डो, नेमार, गारेथ बेल और लुइस सॉरेज़ पर होंगी.

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फ़ुटबॉल का हमेशा से ही विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है. ऐसे में इस बार का वर्ल्ड कप विवादों से कैसे बच सकता था. पहले मेक्सिकन खिलाड़ियों का प्रॉस्टीट्यूट्स के साथ पार्टी करने पर विवाद शुरू हुआ था. अब एक और विवाद ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है. दरअसल, ख़बर आयी है कि फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के पहले 11 शहरों में 20 लाख स्ट्रीट डॉग्स और बिल्लियों को मारने के लिए रूस की सरकार ने 19.5 लाख डॉलर (करीब 13 करोड़ रुपए) का कॉन्ट्रैक्ट दिया है. ये वो 11 शहर हैं जहां फ़ुटबॉल मैच होने हैं. इन जानवरों को मारने वाले स्क्वाड का नाम 'कैनी KGB' रखा गया है. जबकि इससे पहले भी रूस के ही सोची में हुए विंटर ओलंपिक के दौरान हज़ारों स्ट्रीट डॉग्स को मारा गया था.

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दरअसल, इन सभी शहरों में कुत्ते और बिल्लियों की संख्या सबसे ज़्यादा है. जबकि जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि सरकार केवल एक इवेंट के लिए इतने बेजुबान जानवरों की बलि ले रही है. इससे पहले भी यहां कई बार हजारों पक्षियों को भी जिंदा जला दिया गया.

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इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद रूस के उप-प्रधानमंत्री विटाली मुटको को दख़ल देना पड़ा. उन्होंने इस संबंध में जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों के साथ मीटिंग भी की. उन्होंने आश्वस्त किया कि पशुओं को मारने के बजाय उन्हें शेल्टर्स में बंद किया जाएगा. ताकि वर्ल्ड कप ख़त्म होने के बाद उनको रिहा कर दिया जाये. लेकिन संगठनों का आरोप है कि उप-प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद भी पशुओं की लगातार हत्या हो रही है.

जबकि रूस पर पैसा देकर FIFA वर्ल्ड कप 2018 की मेजबानी हासिल करने के आरोप भी लग रहे हैं. दिसंबर 2010 में वर्ल्ड कप 2018 के लिए रूस के नाम की घोषणा की गई. उस समय ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल जैसे दावेदारों के बीच रूस को मेजबानी मिलने से लोग हैरान थे.

FIFA वर्ल्ड कप जैसे किसी बड़े इवेंट के लिए बेजुबान जानवरों को मार देना क्या सही है?

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