कुछ साल पहले तक लड़कों की चाहत में लड़कियों की गर्भ में हत्या आम बात थी, पर कोर्ट के कड़े फ़ैसलों और सरकार के सख़्त कदम के बाद ऐसे मामलों में कमी आई है. हालांकि आंकड़ों की माने, तो अब भी लड़कों की तुलना में लड़कियां कम हैं. इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया भी अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुका है, जिसके लिए उसने गुरुवार को Google, Yahoo और MICROSOFT जैसे सर्च इंजन को प्रसव-पूर्व से संबंधित चीज़ों को हटाने और मॉनिटर करने के लिए इन-हाउस एक्सपर्ट बॉडी लगाने के लिए दिशा-निर्देश दिया है.

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इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा और आर बानुमति की बेंच ने कहा कि 'इन-हाउस एक्सपर्ट बॉडी, नोडल एजेंसी के साथ केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगी.'

19 सितम्बर 2016 के निर्देशों को दोहराते हुए कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि 'कंपनियों के इन-हाउस एक्सपर्ट बॉडी स्थापित करने के बाद ऐसी कोई भी सामग्री पाई जाती है, तो उसे Pre-Conception And Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act, 1994 कि धारा 22 का उल्लंघन माना जायेगा और कार्यवाही की जाएगी.

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Pre-Conception And Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act, 1994 ऐसे किसी भी विज्ञापन और वीडियो को प्रतिबन्ध करता है, जो प्रसव-पूर्व जांच को किसी भी तरीके से बढ़ावा देता है.

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि कंपनियां अच्छी तरह से जानती हैं कि पैसा कैसे कमाया जाता है, पर ये पैसा भारतीय नियमों का उल्लंघन करके नहीं कमाया जा सकता. कंपनियों को कानून का सम्मान किसी भी शर्त में करना ही पड़ेगा. अपने फ़ैसले में कोर्ट ने केंद्र को भी जल्द से जल्द ऐसी एजेंसी को स्थापित करने को कहा, जहां ऐसे मामलों की शिकायत की जा सके.

इस फ़ैसले पर Google का कहना है कि 'हम देश के संविधान का सम्मान करते हैं. हम शुरू से ही ऐसे किसी भी विज्ञापन को पहले से ही हटाते रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन करता है.'