'तुम पास आए यूं मुस्कुराए... तुमने न जाने क्या सपने दिखाए'

शाहरूख खान का कोई भी फ़ैन होगा तो इस गाने की अगली लाइन को फ़ौरन गुनगुना देगा. 1998 की सुपरहिट फ़िल्म 'कुछ कुछ होता है' को देखकर भारत की 90 के दशक की पीढ़ी जवां हुई है. इस फ़िल्म के आने के 19 साल बाद शाहरूख ने इस फ़िल्म के शीर्षक गीत को लेकर एक मज़ेदार राज़ खोला है. उनके टेड टॉक इंडिया शो पर जब जावेद अख़्तर पहुंचे तो लोगों को फ़िल्म से जुड़ा ये खास किस्सा जानने को मिला.

शाहरुख़ ने मशहूर गीतकार जावेद अख़्तर को अपने शो Ted Talks पर बुलाया था. शाहरुख़ ने कहा ' 25 साल पहले जब मैं मुंबई अपने सपनों को पूरा करने आया था, मैं तब से जावेद साहब को जानता था.' शाहरुख़ ने इसके बाद अपनी फ़िल्म 'कुछ कुछ होता है' के शीर्षक गाने के बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया.

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शाहरुख़ ने कहा, 'जावेद साहब हमसे बेहद नाराज़ थे. उन्हें फ़िल्म का टाइटल बिल्कुल पसंद नहीं था. उन्होंने गुस्से में हमसे कहा था - तुम लोग यही रख लो. अब तो मेरा दिल जागे न सोता है, क्या करूं हाय, कुछ कुछ होता है. क्या तुम्हें यही चाहिए? लो रख लो. और यूं ही जावेद साहब ने गुस्से में ही इस गाने के बोल को हमारे सामने रख दिए और देखिए ये गाना कितना लोकप्रिय हो गया. यानि जावेद साहब गुस्से में भी अपने शब्दों का इज़हार कर दे तो वो लफ़्ज भी लफ़्ज न रहकर मोती हो जाते हैं.'

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दरअसल, जावेद ने 'कुछ कुछ होता है; प्रोजेक्ट को छोड़ दिया था और इसके बाद गीतकार समीर ने इस गाने के बोल को पूरा किया था. गौरतलब है कि 'कुछ कुछ होता है' साल 1998 की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म साबित हुई थी. हालांकि, फ़िल्म के निर्देशक करन जौहर मानते हैं कि वो अब इस तरह की फ़िल्में बिल्कुल नहीं बना सकते हैं. करन के ही शब्दों में 'मैंने ये फ़िल्म क्यों लिखी, कैसे लिखी, आखिर कैसे मेरे दिमाग़ में इस तरह के ख्याल आए थे?' इस फ़िल्म का साउंडट्रैक जतिन-ललित ने कंपोज़ किया था वहीं इस फ़िल्म के शीर्षक गाने के लिए अलका यागनिक को बेस्ट प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवार्ड मिला था.

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