बीते गुरुवार पश्चिम बंगाल के सत्यरूप सिद्धांत ने माउंट सिडली पर विजय प्राप्त कर सभी देशवासियों को गौरवान्वित किया है. इस बड़ी कामयाबी को हासिल कर वो सात पर्वतों और सात ज्वालामुखी फ़तह करने वाले सबसे युवा भारतीय पर्वतारोही बन गए हैं, जिसके चलते उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया जाएगा.

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एक रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धांत ने सुबह करीब 6 बजकर 28 मिनट पर 4285 मीटर ऊंचाई पर स्थित माउंट सिडली पर झंडा फ़हराया, इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत गा कर और केट काट कर अपनी सफ़लता का जश्न मनाया.

सिद्धांत की इस बड़ी उपलब्धि पर बात करते हुए उसकी मां गायत्री ने मीडिया से कहा, कि पूरे देश के लिये ये गर्व का क्षण है. मिशन पर निकलने से पहले मैंने उसे ये जोख़िम न लेने की सलाह भी दी थी. इसके साथ ही उन्होंने आगे ये भी कहा कि ख़राब मौसम को देखते हुए वो पिछले दिनों से सिद्धांत को लेकर परेशान थी और जब तक वो कैंप से वापस नहीं लौट आता चिंता बनी रहेगी.

ये युवा पर्वतारोही मूल रूप से दक्षिण कोलकाता के हरिदेवपुर के रहने वाला है और पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है. बहुत कम लोगों को ये पता है कि सिद्धांत को बचपन से अस्थमा की बीमारी है, जिस कारण ज़रा सी दूर चलने पर ही वो हांफ़ जाता था, लेकिन उसने अपनी इस कमज़ोरी को ताकत के रूप में इस्तेमाल किया और आज देशभर में उसके नाम की गूंज है.

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सिद्धांत इससे पहले अफ़्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, यूरोप की माउंट एल्बरस, अर्जेंटीना में स्थित दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी अकाकागुआ, माउंट एवरेस्ट, ऑस्ट्रेलिया की कोजिअस्को और अंटाकर्टिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट विन्सनमैसिफ पर भी तिरंगा फ़हरा विजय प्राप्त कर चुके हैं.

वहीं सिद्धांत के पिता डॉक्टर सुभोमॉय का कहना है कि हम उसकी सफ़लता से बेहद ख़ुश और बेसब्री से उसके भारत लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं.

सत्यरूप सिद्धांत, तुस्सी तो कमाल निकले यार!

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