हीरे की वर्षा सुनने में किसी कवि की कल्पना लग सकती है लेकिन हमारे सोलर सिस्टम के भीतरी हिस्से में ये केवल कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है और अब वैज्ञानिकों का भी मानना है कि उन्होंने इस अनूठे प्रयोग को साबित कर दिखाया है

एक नई रिसर्च के मुताबिक, सोलर सिस्टम के ग्रह नैप्च्यून और यूरेनस में डायमंड्स की बारिश होती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों ग्रहों के अंदरूनी भाग में प्रेशर बेहद ज़्यादा होता है, जिसकी वजह से हाइड्रोजन और कार्बन के बॉन्ड टूट जाते हैं और यही हीरों की बरसात का प्रमुख कारण होता है. Neptune और Uranus धरती से क्रमश: 17 और 15 गुणा ज़्यादा भारी हैं.

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विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हज़ार सालों से ये डायमंड्स धीरे-धीरे इन ग्रहों की बर्फ़ीली सतह पर जमा हुए जा रहे थे. वैज्ञानिकों के अनुसार, इन डायमंड्स का अगर वज़न किया जाए, तो ये मिलियन कैरेट्स तक भी पहुंच सकते हैं. गौरतलब है कि मशहूर ग्रेट स्टार ऑफ़ अफ़्रीका रत्न का वज़न केवल 530.4 कैरेट है.

इन दोनों ग्रहों की संरचना पृ्थ्वी से काफी अलग है. इन ग्रहों पर हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसों का दबदबा है. इनका Core बर्फ़ की मोटी चादर से ढका हुआ है और ये बर्फ़ पानी और अमोनिया जैसे हाइड्रोकार्बन्स से बनी है. वैज्ञानिकों का मानना था कि इन ग्रहों के भीतरी भाग में यानि ज़मीन से लगभग 6200 मील अंदर, प्रेशर बेहद ज़्यादा होता है, जिसकी वजह से डायमंड्स की बारिश होती है और हाल ही में एक प्रयोग ने इन ग्रहों पर डायमंड की बारिश होने की पुष्टि भी की है.

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इससे पहले भी कुछ रिसर्चर्स ने इस प्रयोग को करने की कोशिश की थी लेकिन चूंकि ये टीम Neptune और Uranus ग्रहों के अंदरूनी भाग में होने वाले अत्यधिक प्रेशर को बनाने में नाकाम रही थी, ऐसे में एक नया तरीका आज़माया गया.

एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम ने इस प्रयोग के लिए Polystyrene को चुना. ये एक प्रकार का प्लास्टिक है और ये कार्बन और हाइड्रोजन से बनता है. इसके बाद एक लेज़र की मदद से Polystyrene को उतना प्रेशर दिया गया जितना आमतौर पर इन ग्रहों के अंदरूनी हिस्सों में पाया जाता है. 9000 F तापमान और 150 Giga Pascal के प्रेशर में रखने के बाद कार्बन और हाइड्रोजन के बीच बॉन्ड टूट गया और कार्बन के एटम नैनो डायमंड में तब्दील हो गए.

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हालांकि लैब में ये डायमंड्स दिखने में महज़ कुछ नैनोमीटर ही थे, लेकिन इस रिसर्च से जुड़ी टीम का कहना था कि नैप्च्यून और यूरेनस में इन हीरों का साइज़ बेहद बड़ा हो सकता है. हीरे के बनने की प्रक्रिया भी महज़ चंद सेकंड्स के लिए ही थी, लेकिन इस प्रयोग से इन ग्रहों पर होने वाली हीरों की बारिश के बारे में पुष्टि हुई है.

इस रिसर्च में शामिल जर्मन वैज्ञानिक डॉमिनिक क्रॉस ने बताया कि 'इससे पहले कई रिसर्चर्स केवल अनुमान लगा सकते थे कि इन हीरों को बनाया जा सकता है लेकिन जब हमने इस प्रयोग को साबित किया और नतीजे देखे, तो मुझे एहसास हुआ कि ये मेरे वैज्ञानिक करियर के सबसे शानदार लम्हों में से एक था'.

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क्रॉस का कहना था कि अगर ग्रह के Core के पास तापमान बेहद अधिक हो तो इसकी भी संभावना है कि यहां लिक्विड कार्बन के समंदर हो, और डायमंड के Icebergs इन समंदर में तैरते रहे हों. हालांकि ज़्यादातर थ्योरीज़ का मानना कि कम से कम नैप्चयून और यूरेनस के अंदरूनी भाग में ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि यहां ये डायमंड्स ठोस अवस्था में होते हैं लेकिन कुछ Exoplanets के मामले में ऐसा हो सकता है.

हमारा ब्रह्माण्ड हमें अक्सर कई नए अनुभवों से रूबरू कराता है. जिस दुनिया में हीरे और रत्नों के लिए लोग कट मर जाते हैं, उससे कहीं ज़्यादा बेशकीमती हीरे एक दूसरी दुनिया में कौड़ियों के भाव बिखरे पड़े हैं.

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