शाहिद अफ़रीदी दुनिया के उन चुनिंदा बल्लेबाज़ों में से एक हैं, जिन्होंने उस वक़्त विस्फ़ोटक बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन किया, जब वन-डे में भी बल्लेबाज़ों का तरीका टेस्ट जैसा होता था. लेकिन अब आप उनका बूम-बूम रूप नहीं देख पाएंगे. टेस्ट और वन-डे से पहले ही सन्यास ले चुके अफ़रीदी ने T-20 को भी अलविदा कह दिया है.

साल 1996 में केन्या के खिलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले शाहिद ने अपनी मौजूदगी का एहसास विरोधी टीमों को काफ़ी जल्दी करवा दिया था. पहले मैच में शाहिद शांत दिखे. न तो उन्होंने बल्लेबाज़ी की और न ही उन्हें कोई विकेट हासिल हुआ. लेकिन अपने दूसरे मैच में उन्हें बल्लेबाज़ी का मौका मिला. तीसरे नम्बर पर बल्लेबाज़ी करने आए शाहिद ने श्रीलंका के गंदबाज़ों की ख़बर ले ली. मात्र 37 गेंदों की बल्लेबाज़ी में शाहिद ने शतक जड़ दिया. ये उस वक़्त का सबसे तेज़ शतक था. शाहिद के नाम वन-डे और टेस्ट मिला कर 11 शतक हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी खुद को बल्लेबाज़ नहीं माना. उनका पाकिस्तान टीम में चयन भी लेग स्पिनर मुस्ताक अहमद की जगह हुआ था.

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उनकी गेंदबाज़ी ने भी कई बार पाकिस्तान की जीत की इबारत लिखी थी. शाहिद अफ़रीदी ने टेस्ट, वन-डे और टी-20 मिला कर 500 से ज़्यादा विकेट लिए हैं.

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हांलाकि उनका क्रिकेट करियर कई बार विवादों में भी आया. बॉल ट्रेम्परिंग के मामले में उनका नाम भी उछला. साथ ही PCB से हुए विवाद के कराण उन्होंने 2011 में Conditional Retirement की भी घोषणा कर दी थी.

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साल 2011 में उन्होंने टेस्ट और साल 2015 में वन-डे से पूरी तरह से सन्यास ले लिया था. लेकिन अपने आक्रामक बल्लेबाज़ी के कारण उन्हें टी-20 टीम की कमान मिली. कई नए खिलाड़ी और पुराने खिलाड़ियों की खराब फ़ॉर्म के कारण टीम लगातार खराब प्रदर्शन कर रही थी. पाकिस्तान क्रिकेट लीग में उनकी टीम की लगातार हार के कारण उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को पूरी तरह से अलविदा कह दिया.

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भारत के खिलाफ़ उनका प्रदर्शन काफ़ी शानदार रहा. कई मौकों पर अकेले ही उन्होंने भारत को मैच में शिकस्त दी. शाहिद एक शानदार खिलाड़ी थे. उनकी बल्लेबाज़ी शायद हम भारतीयों को बुरे सपने की तरह दिखे लेकिन हम हमेशा उनकी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी का लुफ़्त उठाते रहे हैं. ऐसे में उनके सन्यास के बाद क्रिकेट के मैदान में उनकी कमी न सिर्फ़ पाकिस्तान को बल्कि हर क्रिकेट प्रेमी को खलेगी.