शाहिद कपूर. बॉलीवुड का ऐसा सितारा, जिसकी खुद की ज़िन्दगी किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. 'ताल' और 'दिल तो पागल है' जैसी फ़िल्मों में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर शुरुआत करने वाले शाहिद एक कंप्लीट बॉलीवुड पैकेज थे. चॉकलेटी लुक्स, शानदार डांसर और एक्टिंग में गजब की विविधता देखते हुए उन्हें अगला रोमैंस किंग भी कहा जाने लगा था.

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लेकिन बॉलीवुड में सब कुछ इतना आसानी से भी कहां मिलने वाला था.

पिता पंकज कपूर और मां नीलिमा दोनों बॉलीवुड में स्थापित अभिनेता तो थे, लेकिन बड़े फ़िल्म स्टार नहीं थे. ऐसे में शाहिद से उम्मीदें भी बहुत थीं, लेकिन संभावनाएं उनके लिए किसी स्टार किड जितनी नहीं थी. लिहाज़ा, शाहिद को भी कई दफ़ा किसी नॉन फ़िल्मी बैकग्राउंड एक्टर की ही तरह ही संघर्ष करना पड़ता.

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शाहिद खुद ये स्वीकार चुके हैं कि उन्हें 100 से ज़्यादा ऑडिशंस से ठुकराया गया था. ऐसा भी वक्त आया जब जेब में खाने के लिए या ऑडिशन लोकेशन तक पहुंचने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, लेकिन अपनी लगन और दृढ़ता के जरिए वो सभी मुश्किलों को पीछे छोड़ आज एक सुपरस्टार हैं.

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2003 में 'इश्क विश्क' से एक रोमैंटिक अभिनेता के तौर पर शुरुआत करने वाले शाहिद जल्दी ही टाइपकास्ट होकर रह गए. उनके चॉकलेटी लुक को भुनाने के लिए निर्देशकों ने उन्हें ज्यादातर रोमैंटिक रोल ही ऑफर किए. नतीजा ये हुआ कि 'विवाह' और 'जब वी मेट' को छोड़कर उनकी ज़्यादातर फिल्में सिलसिलेवार तरीके से फ्लॉप होती चली गईं.

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इंड्रस्टी में सोनम कपूर और नवाज़ सिद्दीकी जैसे कलाकार अपने आपको डायरेक्टर एक्टर मानते हैं यानि एक ऐसा कलाकार जो अपने निर्देशक के सानिध्य में हैरतअंगेज परफॉर्मेंस देने के काबिल है. गज़ब के प्रतिभाशाली होने के बावजूद शाहिद अब भी किसी ऐसे किरदार की तलाश में थे जो उन्हें इंड्रस्टी में स्थापित कर दे. उनके फैंस अब भी उनसे ऐसे किरदार की उम्मीद में थे जो दर्शकों के दिमाग में रच-बस जाए. बॉलीवुड में छह साल बिताने वाले और इक्का-दुक्का हिट फ़िल्में देने वाले शाहिद भी आने वाले समय में डायरेक्टर एक्टर ही होने वाले थे.

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साल 2009 वो समय था जब उन्होंने विशाल भारद्वाज की फ़िल्म 'कमीने' साइन की और यही उनके लिए मील का पत्थर साबित हुआ. अपने कलाकारों से काम निकालने में माहिर हुनरमंद विशाल, शाहिद को भी तराशने के लिए कमर कस चुके थे. फ़िल्म 'कमीने' में शाहिद ने जुड़वां भाइयों के किरदारों को बेहद संजीदगी से निभाया और दर्शकों और क्रिटिक्स की खूब वाह-वाही लूटी.

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इस फ़िल्म से शाहिद बॉलीवुड के फ़लक पर अपनी मौजदूगी दर्ज करा चुके थे. लेकिन उनका उतार-चढ़ाव से सामना अब भी जारी था. 'कमीने' के बाद एक बार फिर शाहिद कैरक्टर बेस्ड फिल्मों की जगह हल्की फुल्की फिल्मों में नजर आएं और फिर फ्लॉप हुए. चांस पे डांस, मौसम, फटा पोस्टर निकला हीरो, तेरी मेरी कहानी जैसी फ़िल्में कब आईं और कब चली गईं, किसी को पता ही नहीं चला.

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पांच साल बाद यानि 2014 में एक बार फिर भारद्वाज, शाहिद के उद्धारक साबित होने वाले थे. शेक्सपियर के नाटक हेमलेट पर आधारित फ़िल्म 'हैदर' शाहिद के करियर की सबसे बेहतरीन फ़िल्म साबित हुई. शाहिद के गंभीर और संवेदनशील किरदार से मशहूर लेखक रस्किन बांड इतने प्रभावित हुए थे कि अपनी बायोपिक के लिए भी उन्होंने शाहिद का नाम सुझा दिया था.

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हैदर में पावर परफॉर्मेंस देने वाले शाहिद मेथड एक्टिंग ज़ोन का हिस्सा बन चुके थे. वे अब किरदार के हिसाब से मेथड एक्टिंग को भी तरजीह देने लगे थे. उड़ता पंजाब में इसकी बानगी देखने को मिली थी. ताउम्र नशे से दूर रहने वाले शाहिद ने एक क्रेज़ी ड्रग एडिक्ट टॉमी सिंह की भूमिका के लिए उन्होंने शारीरिक और मानसिक तौर पर काफी मेहनत की.

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शाहिद आज 36 साल के हो चुके हैं और बॉलीवुड में उनकी एक अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है. हालिया सालों में आई आर राजकुमार, हैदर और उड़ता पंजाब के साथ ही उनकी हिट फिल्मों के खाते में भी बढ़ोतरी हुई है. हर फ़िल्म के लिए अपने आपको ट्रांसफॉर्म कर लेने वाले शाहिद आज पॉप कल्चर मीडिया के भी फेवरेट बने हुए हैं. लेकिन उनकी जिंदगी कोई स्वप्न सरीखी नहीं रही है. इंड्रस्टी में 14 साल पूरे कर चुके शाहिद आज अगर एक प्रेरणा स्त्रोत हैं तो उसका श्रेय उनके कभी न हार मानने वाला एट्टीट्यूड और सफ़लता के प्रति उनकी ज़िद को दिया जा सकता है.

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ग़ज़बपोस्ट की तरफ़ से शाहिद कपूर को जन्मदिन की शुभकामनाएं.

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