भाजपा शासित राजस्थान में क़ानून व्यवस्था कितनी लचर स्थिति में पहुंच चुकी है. फिर चाहे वो गौरक्षा के नाम पर किसी की हत्या हो, या फिर तथाकथित समाज सेवकों द्वारा की गई हिंसक घटनाएं या फिर बात हो धर्म के नाम पर प्रवासी मजदूर की निर्मम हत्या, वो भी कैमरे के सामने, ये सभी ऐसी घटनाएं जो इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि आखिर ये राज्य में चल क्या रहा है. राजस्थान की क़ानून व्यवस्था की स्थिति इससे ख़राब क्या होगी कि एक क्रूर हत्या के आरोपी को जेल में मोबाइल मिल रहा है और वो जेल में बैठे-बैठे नफ़रत भरे मेसेज सोशल मीडिया पर बिना किसी डर के पोस्ट कर पा रहा है.

जी हां, राजस्थान के राजसमंद लाइव मर्डर केस के मुख्य आरोपी शंभूनाथ रैगर, जिस पर एक अप्रवासी मजदूर मोहम्मद अफ़राजुल की नृंशस हत्या का आरोपी है, ने जोधपुर सेंट्रल जेल से अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि उसकी जान को दूसरे क़ैदी से ख़तरा है.

Source: indiatimes

इस वीडियो के वायरल होने के बाद राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने जांच का आदेश दिया है कि यह कैसे संभव हुआ है. जिसके बाद जेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया. उन्होंने शंभूनाथ के बैरक की तलाशी की, लेकिन वहां उन्हें कोई मोबाइल नहीं मिला. इस बीच उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि आखिर शंभू के पास मोबाइल कैसे आया और जेल की चाक चौबंद सुरक्षा के बीच कैसे शंभू ने वीडियो बनाया है.

गौर करने वाली बात ये है कि उसने जोधपुर सेंट्रल जेल से दो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए हैं. शंभू लाल का पहला वीडियो दो मिनट 25 सेकंड का है, जबकि दूसरा वीडियो 6 मिनट 19 सेकंड का है.

अपने एक वीडियो में शंभू लाल ने दावा किया है कि जेल में उसको पश्चिम बंगाल के एक कैदी से जान का ख़तरा है, जिस पर ड्रग्स से सम्बंधित चार्जेज़ के अंतर्गत सज़ा मिली हुई है. जेल के अंदर शूट किये गए इस वीडियो में शंभू लाल एक हुडी पहने हुए नज़र आ रहा है ऐसा लग रहा है मानो वो लोगों के सामने शेख़ी बखार रहा है.

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मोहम्मद अफ़राजुल की नृंशस हत्या को न्यायसंगत बनाने के लिए शंभू लाल ने कहा कि वो 'लव जिहादियों' से क्रोधित था और जिसकी प्रतिक्रिया में उसने ये हत्या की है. इसके साथ ही उसने अपने हिन्दू भाइयों को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा होने का आह्वान किया है.

जेल के अधीक्षक विक्रम सिंह ने कहा किजैसे ही वीडियो वायरल हुआ तुरंत ही जेल में एक सर्च ऑपरेशन चलाया गया. लेकिन नहीं बैरक से और नहीं आस-पास कहीं किसी क़ैदी के पास से कोई मोबाइल बरामद हुआ. हालंकि, अब शंभू लाल को दूसरे बैरक में शिफ़्ट कर दिया गया है. वहीं गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा, 'हम इस बात की पूरी जांच करायेंगे कि कैसे उसको ये मोबाइल मिला और कब और किस तरह उसने ये वीडियो शूट किया. हमने उसके ख़िलाफ़ FIR भी दर्ज कर दी है और अब इस मामले की जांच चल रही है.'

पर अगर सोचा जाए तो इस ख़तरनाक हत्यारे को जेल में किसी को भनक लगे बिना मोबाइल मिल गया, पर कैसे? इसका एक मतलब ये भी निकाला जा सकता है कि जेल में कैदियों से मिलने आने वाले लोगों की तलाशी ढंग से नहीं की जाती है.

नोट: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल उस वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया गया है, इसलिए वो उपलब्ध नहीं है.

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