चेन्नई की एसआरएम यूनिवर्सिटी में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है. यहां के गर्ल्स हॉस्टल की लिफ़्ट में एक सफ़ाई कर्मचारी छात्रा के सामने Masturbate करने लगा. लेकिन इस पूरे प्रकरण में यूनिवर्सिटी प्रशासन सवालों के घेरे में है, जिसने सब कुछ जानते हुए भी मामले को दबाने की कोशिश की.

दरअसल, 22 नवंबर को बी.टेक. की एक छात्रा अपने हॉस्टल में जा रही थी. अपने रूम तक जाने के लिए उसने लिफ़्ट ली, जिसमें एक सफ़ाई कर्मचारी पहले से ही मौजूद था. यही कर्मचारी छात्रा के सामने ये घिनौनी हरकत करने लगा. छात्रा ने लिफ़्ट से निकलने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी ने उसका रास्ता भी रोका.

इस घटना के बाद छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी शिकायत की. वार्डन ने पहले तो मामले को दबाने की कोशिश की और साथ ही छात्रा को इस बारे में अधिकारियों से कुछ न कहने की हिदायत दी.

यूनिवर्सिटी प्रशासन की ऐसी निष्क्रियता देखते हुए छात्र गुस्सा हो गए. छात्रों ने गुरुवार रात को ही कैंपस के अंदर प्रदर्शन किया. इस मामले पर छात्र लगातार सोशल मीडिया पर भी यूनिवर्सिटी प्रशासन के रवैये की निंदा करते दिखाई दिए.

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर संदीप संचेती ने हालांकि निष्क्रियता के आरोपों से इनकार किया. वीसी ने कहा, 'हम छात्रों से बात कर रहे हैं, जो भी मामला है उसका ध्यान रखा जाएगा. यदि कोई मामला है तो उसकी जांच की जाएगी.'

कैंपस में प्रदर्शन कर रहे छात्रों में एक छात्र ने बताया कि, 'छात्रा ने सबसे पहले हॉस्टल की वॉर्डन को इसकी जानकारी दी. लेकिन उसने लिफ़्ट की सीसीटीवी फुटेज देखने और शिकायत दर्ज करवाने में 2 घंटे से ज़्यादा की देर की.'

एक अन्य छात्र ने बताया कि, 'सीसीटीवी फुटेज में छात्रा ने कर्मचारी की पहचान कर ली थी. लेकिन उसे चुप रहने को कहा गया. इतना ही नहीं हॉस्टल प्रशासन ने उल्टा छात्रा को ही दोषी ठहरा दिया. उन्होंने कहा कि जो लड़की हॉस्टल में सिगरेट और शराब पीती है, वो अपनी सेफ़्टी के लिए इस तरह बहस नहीं कर सकती'.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंपस के अंदर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को स्थानीय पुलिस ने जबरन हटा दिया था. वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा मामले को देखने के आश्वासन के बाद छात्रों ने प्रदर्शन वापस ले लिया. इसके बाद प्रशासन ने सफ़ाई कर्मचारी के ख़िलाफ एफ़आईआर दर्ज कराई. 

अब ख़बर आई है कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया है. लेकिन जिस तरह से इस पूरे मामले में एसआरएम यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लीपापोती करने की कोशिश की है, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है.