दुनिया में आये हो तो लव कर लो, थोड़ा सा जी लो थोड़ा-थोड़ा मर लो. जुड़वा फ़िल्म के एक गाने के ये बोल अब सच होते दिख रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि एक शख़्स ने ऐसी मशीन बनायी है जिससे इच्छामृत्यु की मांग करने वाले लोगों के लिए मरना आसान हो जायेगा.

अगर किसी इंसान को लगता है कि उसने अपनी ज़िन्दगी अच्छे से जी ली है और वो अब चैन से मरना चाहता है, तो ऐसे लोगों के लिए ऑस्ट्रेलियाई इच्छामृत्यु कार्यकर्ता Philip Nitschke और डच डिज़ाइनर Alexander Bannink ने 'Sarcophagus' नामक एक ऐसी 3D-प्रिंटेड मशीन बनायी है. जो एक बटन दबाते ही इंसान की जान ले सकती है. इसे उन्होंने 'Sarco' नाम भी दिया है.

एक बटन दबाते ही इंसान को मौत के घाट उतारने वाली इस विवादस्पद मशीन का अनावरण बीते शनिवार को Amsterdam Funeral Show के दौरान किया गया. जहां कई ऐसे लोग आये हुए थे, जो इच्छामृत्यु चाहते थे.

इस दौरान Philip ने कहा कि 'जो व्यक्ति इच्छामृत्यु चाहता है उसे एक कैप्सूल नुमा पॉड में बैठना होगा. फिर एक बटन दबाते ही उस पॉड में नाइट्रोजन भर जायेगी. थोड़ी देर तक व्यक्ति को चक्कर आने महसूस होंगे उसके बाद बेहोश होकर वो मर जायेगा. इस दौरान वहां आये लोग Virtual Reality Glasses द्वारा इस मंज़र को लाइव देख रहे थे.

इच्छामृत्यु की क़ानूनी अड़चनों को लेकर उन्होंने कहा कि कई देशों में इच्छामृत्यु का क़ानून है. इसीलिए हम सिर्फ़ उन लोगों की मदद करना चाहते हैं, जो अपनी ज़िंदगी से तंग आ चुके हैं. एक इंसान के लिए ट्रेन के आगे कूदकर जान देने से अच्छा है एक बटन दबाकर चैन से मौत को गले लगाना. मुझे लगता है कि ये हर इंसान का मौलिक अधिकार होना चाहिए कि वो कब और कैसे मरना चाहता है? अगर किसी इंसान ने अपने जीवन की सारी ख़ुशियां पा ली हैं और वो चैन से मरना चाहता है इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

Philip ने कहा कि मैं इस साल के अंत से पहले ही एक ऐसे पॉड का निर्माण करना चाहता था, जो बेहतर तरीके से काम करे. बाद में इसके डिज़ाइन को पूरी जानकारी के साथ ऑनलाइन रखने का सोचा, जिससे कि लोग इसे डाउनलोड कर सकें. इसका मतलब ये कि इन जानकारियों के साथ कोई भी व्यक्ति ख़ुद की 3 डी-प्रिंट बना सकता है.

Source: 3ders

52 वर्षीय Piet Verstraaten ने कहा 'मौत के नए-नए तरीकों को जानने के लिए हर साल हज़ारों लोग Amsterdam Funeral Expo के लिए Westerkerk आते हैं. यहां हर साल मौत से जुड़े उपकरणों जैसे Biodegradable Coffins और Hot-Rod की प्रदर्शनी लगती है. लेकिन इस बार 'Sarco' सबसे ज़्यादा भीड़ खींचने में कामयाब रहा. कई लोग चेयर पर बैठकर Virtual Reality Glasses से इसका अनुभव ले रहे थे. जो कि मेरे लिए भी एक अलग अनुभव था.'

वहीं 52 वर्षीय Rob Bruntink का कहना था कि ये बहुत मूर्खतापूर्ण और बेवकूफ़ी भरा अनुभव था. मुझे इस 'Sarco' में कोई दिलचस्पी नहीं है.

Source: washingtonpost