आज का दौर T-20 क्रिकेट का दौर है. हर बल्लेबाज़ मैदान पर आते ही चौके छक्के लगाने में जुट जाता है. इस दौरान बल्लेबाज़ों को न तो तकनीक की ज़रूरत होती है न ही किसी की परवाह, लेकिन एक अच्छे बल्लेबाज़ की असल परख टेस्ट क्रिकेट से ही होती है. जिस खिलाड़ी में एक या दो दिन तक बल्लेबाज़ी करने की क्षमता होती है, वही टेस्ट क्रिकेट में सरवाईव कर पाता है. 

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आज हम भारत के एक ऐसे धुरंधर खिलाड़ी का ज़िक्र करने जा रहे हैं, जो अपने दौर में वर्ल्ड क्रिकेट के महानतम टेस्ट बल्लेबाज़ हुआ करते थे. वो कोई और नहीं बल्कि लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर हैं. गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10 हज़ार रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज़ हैं. उन्होंने ये उपलब्धि साल 1987 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपने 124वें मैच में हासिल की थी. 

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साल 1981-82 की बात है, इंग्लैंड की टीम 6 टेस्ट मैचों की सीरीज़ खेलने भारत दौरे पर आयी हुई थी. मुंबई में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने इंग्लैंड को 138 रनों से मात दी. इसके बाद बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 9 दिसंबर से 14 दिसंबर तक खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान भारतीय क्रिकेट इतिहास के लिए एक अनूठा रिकॉर्ड बना. 

जब गावस्कर ने खेली 708 मिनट की मैराथन पारी

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उस समय गावस्कर टीम इंडिया के कप्तान हुआ करते थे. दूसरे टेस्ट की पहली पारी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड के 400 रनों के जवाब में 428 रन बनाए. इस दौरान गावस्कर ने 472 गेंदों का सामना करते हुए 172 रन की स्पेशल पारी खेली थी. ये पारी इसलिए भी स्पेशल थी क्योंकि गावस्कर ने इस दौरान 708 मिनट तक बल्लेबाज़ी की थी. 

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पहले विकेट के लिए 102 रन की साझेदारी के बाद भारत ने अपना दूसरा विकेट 192 के स्कोर पर खोया. इसके बाद एक छोर से भारतीय विकेट्स लगातार गिरते रहे, लेकिन दूसरे छोर पर गावस्कर इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के सामने डटे रहे. इस दौरान इंग्लिश गेंदबाज़ों ने उन्हें कई बार उकसाने की कोशिश भी की लेकिन गावस्कर टस से मस नहीं हुए और लगातार रन बनाते रहे. गावस्कर ने सातवें विकेट के लिए कपिल देव के साथ 92 रन की साझेदारी निभाई. आख़िरकार 9वें विकेट के रूप में गावस्कर 708 मिनट की इस मैराथन पारी में 172 रन बना कर आउट हो गए. 

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टेस्ट क्रिकेट में सबसे लम्बी पारी खेलने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ़्रीका के गैरी कर्स्टन के नाम है. उन्होंने 15 घंटे यानि कि 900 मिनट तक बल्लेबाज़ी की.

6 मैचों की इस टेस्ट सीरीज़ की सबसे अनोखी बात ये रही कि 6 में से 5 टेस्ट ड्रॉ रहे. भारत ये सीरीज़ 1-0 से जीता था. इस दौरान गावस्कर ने 9 परियों में 62.50 की शानदार औसत से 500 रन बनाये. 

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सुनील गावस्कर की उस मैराथन पारी ने भारतीय युवाओं को टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया था. भारतीय क्रिकेट इतिहास के लिए वो पारी आज भी बेहद ख़ास है.