20 अप्रैल को हरियाणा के झज्जर में मौजूद बहादुरगढ़ की गलियां गुलज़ार थीं. 34 देशों से आईं कुछ सुपरमॉडल्स बहादुरगढ़ की गलियों में लोगों को महिला सशक्तिकरण का पाठ पढ़ा रही थीं. लाल ड्रेस और हाई हील्स में ये महिलाएं तीखी धूप की परवाह किए बिना हिंदी और इंग्लिश में कई प्लेकार्ड्स थामे हुए थीं. वियतनाम से लेकर दक्षिण अफ़्रीका तक की ये मॉडल्स 43 डिग्री तापमान में भी झज्जर की गलियों में एक महत्वपूर्ण मकसद के साथ मार्च कर रही थी़ं.

दरअसल ये मॉडल्स दिल्ली में एक इंटरनेशनल सुपरमॉडल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई थीं. झज्जर का एक टैलेंट प्रमोटिंग ग्रुप, 'रूबरू' 22 अप्रैल को इस कॉन्टेस्ट का आयोजन कराने जा रहा है. झज्जर के जिला प्रशासन को जब इन सुपरमॉडल्स के दिल्ली में होने का पता चला तो उन्होंने आयोजकों से संपर्क किया. इन मॉडल्स के माध्यम से प्रशासन नारी सशक्तिकरण के लिए एक कैंपेन करना चाहता था.

प्रशासन ने एक वर्कशॉप का भी आयोजन किया, जहां इन मॉडल्स से महिलाओं के उत्थान से जुड़े मु्द्दों को लेकर बातचीत की गई. गौरतलब है कि हरियाणा में सबसे कम सेक्स रेशियो झज्जर में ही है.

बेल्जियम, जापान, चीन, वियतनाम, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड और ब्राज़ील जैसे देशों से आई ये महिलाएं सहसा ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गईं. हॉलैंड की एक मॉडल ने जब गलियों में राम-राम ताऊ जी कह कर एक वृद्ध को पुकारा तो वहां मौजूद दर्शक खिलखिला कर हंस पड़े.

इस कैंपेन के तहत ये महिलाएं अपने साथ पोस्टर्स और बैनर्स लिए हुए थीं. इनमें "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ", "महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा बंद करो", "असली मर्द औरतों पर हाथ नहीं उठाते" और "झिलमिल लोटा बंद करो, शौचालय का प्रबंध करो" जैसे सफ़ाई और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई पोस्टर्स शामिल थे.

अमेरिका की स्टीफ़न एलियन ने एक बेहतरीन वाकये के साथ लोगों को संबोधित कर कैंपेन को खत्म किया -

"ये दुनिया एक बहुत बेहतर जगह हो सकती है अगर लोग महिलाओं और पर्यावरण को इज़्ज़त देना शुरु कर दें."

Source: Hindustan Times