बाल कटवाने के लिए नाई की दुकान में बैठे हुए हों या किसी चाय की दुकान में अख़बार को पढ़ रहे हों. आपको कई बार ये सुनने को मिला होगा कि 'देश का कुछ नहीं हो सकता, नेताओं ने देश को बेच खाया, ऐसा ही चलता रहा तो देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता.' इनमें से कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जो सरकार और सिस्टम को नाकारा समझते हुए कभी वोट ही नहीं देते. अगर आप भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं, तो आप सरकार या सिस्टम से कोई सवाल नहीं कर सकते. ऐसा हमारा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया का कहना है.

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ख़बरों के अनुसार दिल्ली के एक NGO 'वॉइस ऑफ़ इंडिया' के धनेश ईशधन ने सुप्रीम कोर्ट में अतिक्रमण के ख़िलाफ़ एक याचिका डाली थी. जिसमें उन्होंने कहा था कि 'आज देश में हर तरफ अतिक्रमण ही अतिक्रमण दिखाई देता है. हमारी सरकारें इसे हटाने के लिए कुछ नहीं करतीं इसलिए सुप्रीम कोर्ट को सामने आ कर पूरे देश में इसे हटाने के लिए एक आदेश जारी करना चाहिए.'

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मामले की सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस जेएस खेहर की अध्‍यक्षता वाली बैंच ने धनेश से सवाल किया कि आप अब तक कितनी बार वोट डालने गए हैं? जिस पर धनेश ने कहा कि 'ईमानदारी से कहूं, तो मैंने आज तक कभी वोट नहीं डाला.' धनेश का ये जवाब सुन कर बेंच में बैठे जज गुस्से से लाल हो गए और कहा कि 'यदि आप अपने वोट के अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते, तो आपको सरकार या सिस्टम से सवाल करने या दोष देने का कोई अधिकार नहीं है.' इसके साथ ही बैंच ने कहा कि अतिक्रमण का मामला हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर है. जिस पर हम हटाने का आदेश देने की ताकत नहीं रखते. अगर हम कोई ऐसा आदेश जारी कर भी देते हैं, तो अवमानना के मामले में आने शुरू हो जाएंगे.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने धनेश से कहा कि आप इस मामले को लेकर किसी भी हाई कोर्ट में जा सकते हैं, अगर आप ऐसा नहीं करते, तो हमें लगेगा कि आप यहां केवल पब्लिसिटी के उद्देश्य से आए हैं.

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