सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़. मॉर्डन क्रिकेट के सबसे बड़े दो नाम. विवादों से जिनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था. लेकिन आज से 14 साल पहले एक ऐसी घटना हुई, जिसने इन दोनों ही क्रिकेटर्स को एक-दूसरे के सामने ला खड़ा किया था.

मीडिया भी इन दोनों में हुई कलह को लेकर तमाम अफ़वाहें उड़ाने में मशगूल थी. इस घटना के बारे में ख़ुद राहुल ने कहा था कि 'सचिन से जुड़ा हुआ ये सवाल पूछने पर अगर हर बार मुझे एक रुपए मिले, तो मैं अब तक लखपति हो जाता.'

जी हां, ये वही लम्हा था जब द्रविड़ ने सचिन को दोहरा शतक बनाने से रोक दिया था.

भारत-पाक सीरीज़, पहला टेस्ट, मुल्तान, Day 2.

2004 में भारत पाकिस्तान के ऐतिहासिक दौरे पर गया. सहवाग पहली ही पारी में 309 रन बनाकर मुल्तान के सुल्तान बन चुके थे. वहीं सचिन ने इस मैच में विवादास्पद 194 नाबाद बनाए थे. विवादास्पद इसलिए क्योंकि राहुल द्रविड़ ने उनका दोहरा शतक पूरा होने से पहले ही पारी घोषित करने का फै़सला किया था.

उस दौर में कई अफ़वाहें उड़ी. मसलन टीम इंडिया में फ़ूट पड़ चुकी है, सचिन टीम मैनेजमेंट के फ़ैसले से बेहद खफ़ा थे इत्यादि. लेकिन सच क्या था, ये सचिन ने अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी में खुल कर लिखा.

उन्होंने लिखा, 'उस दिन चाय ब्रेक के समय मैंने राहुल और जॉन से मैच की रणनीति के बारे में पूछा था. गांगुली पीठ की चोट के चलते उस मैच में नहीं खेल रहे थे और ऐसे में राहुल कप्तानी कर रहे थे. मुझे बताया गया कि पाकिस्तान को कम से कम एक घंटे बैटिंग कराई जाएगी यानि दिन के आखिरी 15 ओवरों में पाकिस्तान को बल्लेबाज़ी कराकर उन पर दबाव डालने की कोशिश की जाएगी. मुझे ये प्लान एकदम सही लगा और चाय ब्रेक के बाद मैं बल्लेबाज़ी के लिए चला गया.'

टी-ब्रेक के बाद ही हुआ मॉर्डन इंडियन क्रिकेट का सबसे बड़ा विवाद

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सचिन ने अपनी किताब में लिखा कि 'टीब्रेक सेशन ख़त्म होने के बाद मैच फिर चालू हुआ. अभी करीब आधा घंटे से थोड़ा वक्त ज़्यादा ही बीता होगा कि ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान उस दौरे पर अतिरिक्त खिलाड़ी रोमेश पवार मेरे पास आया और मुझे तेज़ रन बनाने के लिए कहा.'

मैंने उसे मज़ाक में कहा कि 'मुझे पता है कि हमें जल्दी-जल्दी रनों की ज़रूरत है लेकिन फ़ील्ड के पूरी तरह से फ़ैलने के कारण हम इतना ही कर सकते हैं.इसके थोड़ी देर बाद जब मैं 194 पर बल्लेबाजी कर रहा था तो पवार फिर आया और मुझे बोला कि मुझे इसी ओवर में अपना दोहरा शतक पूरा करना होगा क्योंकि राहुल ने पारी घोषित करने का फ़ैसला कर लिया है. मैं ये सुनकर थोड़ा चौंका क्योंकि मेरे दिमाग में ये चल रहा था कि अब भी मेरे पास 12 गेंदें बची हैं और मैं उनमें बाकी बचे 6 रन बना सकता हूं. इसके बाद हम पाकिस्तान को 15 ओवर खेलने को दे सकते हैं.'

'लेकिन उस ओवर में मुझे एक भी बॉल खेलने को नहीं मिली. उस ओवर के दौरान इमरान फ़रहत युवराज सिंह को बॉल डाल रहे थे. उन्होंने पहली दो गेंदों पर डिफ़ेंस किया, फिर तीसरी गेंद पर 2 रन लिए, चौथी बॉल पर डिफ़ेंस किया और पांचवी गेंद पर आउट हो गए. फिर जैसे ही मैंने अगले बल्लेबाज़ पार्थिव पटेल को आते हुए देखा, तो मैंने देखा कि राहुल पारी घोषित करने का फ़ैसला ले चुका है और हमें पवेलियन वापस बुला रहा है.'

राहुल पारी घोषित कर चुका था और मैं वहां नाबाद 194 पर खड़ा था. दिन के 16 ओवर्स अब भी बाकी थे.

'मुझे गुस्सा आ रहा था लेकिन मैंने कोई सीन खड़ा नहीं किया.'

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सचिन ने कहा कि 'मैं भौंचक्का रह गया था. मैं जब ड्रेसिंग रूम पहुंचा तो टीम के खिलाड़ी शायद मुझसे उम्मीद कर रहे थे कि मैं रूम में आते ही अपने बैट और पैड्स फेंक दूंगा और कोई बड़ा सीन करूंगा. लेकिन मैं कोई विवाद नहीं खड़ा नहीं करना चाहता था क्योंकि मुझे ये सब करने की आदत नहीं है. हां, मैं हैरान था क्योंकि मेरे हिसाब से इस फ़ैसले का कोई मतलब नहीं था. मैंने अपना बैट और बाकी सामान रखा और फ़ील्ड पर जाने से पहले जॉन से कुछ देर का समय मांगा क्योंकि काफ़ी देर बल्लेबाज़ी करने के कारण मैं काफ़ी टाइट महसूस कर रहा था लेकिन अंदर ही अंदर मैं काफी गुस्से में था.'

जॉन राइट ने मांगी थी माफ़ी

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सचिन ने कहा 'मैं बाथरूम में अपना चेहरा धो रहा था, जॉन मेरे पास आए और मुझसे माफ़ी मांगी. जॉन ने कहा कि उसका इस फ़ैसले में कोई रोल नहीं है. मैं हैरान हुआ और मैंने जॉन से कहा कि एक कोच के तौर पर आप टीम के फ़ैसले लेने वाले लोगों में से हो और आपको सॉरी फ़ील करने की ज़रूरत नहीं है.'

गांगुली ने भी मांगी थी माफ़ी

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सचिन ने कहा- 'इसके थोड़ी देर बाद सौरव मेरे पास आया. उसने कहा कि वह मेरे लिए सॉरी फ़ील कर रहा है और उसका भी इस फ़ैसले में कोई योगदान नहीं था. लेकिन ये थोड़ा हैरान करने वाला था क्योंकि वो भी टी ब्रेक के दौरान रणनीति का हिस्सा था और पारी घोषित के समय भी वो ड्रेसिंग रूम में ही था. लेकिन मैंने उससे कहा कि अब इस बारे में बात करने का कोई फ़ायदा नहीं है.'गौरतलब है कि सौरव ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी राहुल के फ़ैसले को ग़लत बताया था.'

संजय मांजरेकर को सुनाई सचिन ने खरी-खरी

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर, जो इस दौरे के दौरान कमेंटरी भी कर रहे थे, सचिन से मिलने पहुंचे. उन्होंने टीम मैनेजमेंट के रवैये की तारीफ़ की लेकिन सचिन इससे भड़क गए.

सचिन ने लिखा "मैंने उसे समझाया कि तुम्हें नहीं मालूम है कि ड्रेसिंग रूम में क्या हुआ है, और बेहतर होगा कि अपनी बात रखने से पहले तुम पूरी बात को ठीक से जानो." 'मैंने साफ़ कर दिया था कि मुझे उसकी राय में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है. मुझे लग रहा था कि संजय इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रखने की कोशिश कर रहा था.'

राहुल की सफ़ाई से बिल्कुल सहमत नहीं थे मास्टर-ब्लास्टर

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इसके बाद सचिन राहुल से मिले. राहुल ने अपना पक्ष रखा लेकिन सचिन उनकी दलील से संतुष्ट नहीं थे. सचिन ने लिखा ' मैं आखिरकार राहुल से मिला. राहुल का कहना था कि ये फ़ैसला टीम हित को ध्यान में लेकर लिया गया था. राहुल के अनुसार, पाकिस्तान को ये दिखाना ज़रूरी था कि हम जीतने को लेकर बेहद गंभीर है.'

लेकिन मैं राहुल की राय से असहमत था. सबसे पहले तो मैंने उसे कहा कि मैं भी टीम के लिए ही बल्लेबाज़ी कर रहा था. जो मैंने 194 बनाए थे, वो टीम को ही मदद पहुंचा रहे थे और ये मेरा टीम को व्यक्तिगत योगदान ही था. सचिन ने ये भी कहा था कि फ़ील्ड पर मैं अपनी पूरी ज़िम्मेदारी निभाउंगा लेकिन ऑफ़ द फ़ील्ड मुझे अकेला छोड़ दिया जाए क्योंकि मुझे इस घटना से उबरने में समय लगेगा.

इसके बाद सचिन ने जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए टेस्ट मैच के बारे में राहुल से बात की. सचिन ने द्रविड़ से कहा - 'जब हम दोनों ही टेस्ट मैच के चौथे दिन बल्लेबाज़ी कर रहे थे और सौरव ने पारी घोषित करने को लेकर 2-3 मेसेज भेजे थे, तब तुमने बैटिंग करना ही बेहतर समझा था.'

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सचिन ने आगे कहा कि 'मुल्तान और सिडनी की परिस्थितियां काफ़ी मिलती-जुलती थी. सिडनी में पारी घोषित का फ़ैसला यूं भी बेहद निर्णायक हो सकता था, क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया 1-1 मैच जीत चुके थे और सिडनी में टेस्ट मैच जीतने के साथ ही हम ऑस्ट्रेलिया जैसी मज़बूत टीम से, उन्हीं की धरती पर सीरीज़ जीत सकते थे. वहीं मुल्तान टेस्ट सीरीज़ का पहला ही टेस्ट मैच था. अगर वो मुल्तान में इस तरह का फ़ैसला लेने का जोख़िम उठा रहा था, तो उसे सिडनी में भी ऐसा ही करना चाहिए था.'

हालांकि दोस्ती बनी रही

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तेंदुलकर साफ़ करते हैं कि 'इस घटना के बावजूद उनका राहुल से कोई मतभेद नहीं रहा. उन्होंने कहा कि इस घटना के बावजूद मैं और राहुल अच्छे दोस्त रहे और फ़ील्ड पर भी हमने कई खास साझेदारियां की. मैं खुश हूं कि इस घटना से न तो हमारी दोस्ती पर आंच आई और न ही हमारे खेल पर कोई असर पड़ा.'

राहुल द्रविड़ का पक्ष

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सचिन ने अपनी ऑटोबायोग्राफ़ी में भले ही राहुल द्रविड़ को सिडनी टेस्ट में पारी घोषित न करने के लिए ज़िम्मेदार ठहरा दिया हो लेकिन वे शायद ये भूल गए कि जब सिडनी में भारत की पारी घोषित हुई थी तब द्रविड़ भी 91 रन पर नाबाद लौटे थे और तब उन्होंने अपने शतक को लेकर कोई विवाद खड़ा नहीं किया था.

सिडनी टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलिया के चार विकेट शेष थे और ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 86 रनों की दरकार थी. अगर भारत पहले पारी घोषित कर देता तो भारत के रन कम बनते और ऑस्ट्रेलिया को स्कोर चेस करने के लिए ओवर्स ज़्यादा मिलते. ज़ाहिर है, इससे ऑस्ट्रेलिया के जीतने की संभावना बढ़ जाती. ख़ास बात ये है कि पारी जब घोषित की गई, उस समय राहुल 91 रनों पर नाबाद थे यानि वो भी अपना शतक पूरा करने के लिए कुछ समय की मांग कर सकते थे, लेकिन द्रविड़ ने ऐसा कुछ नहीं किया.

दरअसल मुल्तान में सचिन जब 190 पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तब दिन के 21 ओवर्स बचे थे. जॉन राइट से सलाह मशविरा करने के बाद द्रविड़ ने सचिन को मेसेज भेजा. अगले 6 ओवर्स में सचिन केवल 4 रन बना पाए. पाकिस्तानी कप्तान इंजमाम ने उस दौरान ऑफ़ साइड में कड़ी फ़ील्डिंग लगाई हुई थी और उस दौरान पाक के गेंदबाज़ ऑफ़ साइड से बेहद बाहर बॉल फ़ेंक रहे थे, ऐसे में सचिन जिस गति से रन बना रहे थे, उन्हें अपना दोहरा शतक पूरा करने के लिए 6 ओवर्स की ज़रूरत पड़ती. पाकिस्तान को उस दिन 15 ओवर्स नहीं खेलने पड़ते और शायद पाकिस्तान मैच ड्रा करा पाने में सफ़ल होता.

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सचिन ने 493 गेंदों में 194 बनाए थे. सचिन के नर्वस नाइंटीज़ सिंड्रोम से भी लोग अंजान नहीं थे. पिछले तीन ओवर्स में उन्होंने केवल तीन रन बनाए थे और पारी भी तब घोषित की गई थी जब युवराज आउट हुए थे, राहुल को लगा होगा कि नया बल्लेबाज़ जाकर सेटल होगा और 2-3 ओवर्स खेलेगा, इससे बेहतर है पारी घोषित कर दी जाए. राहुल चाहते तो सचिन की प्रतिक्रिया का माकूल जवाब दे सकते थे (रीड: नवर्स 90 सिंड्रोम) लेकिन उन्होंने जेंटलमैन व्यवहार बनाए रखा क्योंकि इससे ड्रेसिंग रूम में चीज़ें ख़राब हो सकती थी.

द्रविड़ का फ़ैसला सही साबित हुआ क्योंकि उन 15 ओवर्स में भारत ने पाकिस्तान के तीन विकेट चटकाए थे, जिसमें पाक के फ़ॉर्म में चल रहे दोनों ओपनर्स शामिल थे.

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द्रविड़ के शब्दों में - 'मैं नास्त्रेदमस नहीं हूं, मुझे नहीं मालूम था कि पाकिस्तान इस तरह समर्पण कर देगा और टेस्ट चार दिनों में ख़त्म हो जाएगा...मुझे याद है कि उस दिन पाकिस्तान की पारी के दौरान मैंने सचिन को गेंद थमाई थी और वो दिन का आखिरी ओवर फ़ेंकने जा रहे थे. सचिन ने अपने ओवर में मोइन खान को आउट कर दिया था और हम जश्न मनाते हुए पवेलियन लौट रहे थे. भारत, पाकिस्तान में पहली बार टेस्ट मैच जीतने जा रहा था और मेरे लिए इससे महत्वपूर्ण कुछ नहीं था. सचिन की मुस्कुराहट से साफ़ झलक रहा था कि वो भी उस मुद्दे को भुला चुके हैं और एक टीम प्लेयर होने के नाते वो भी भारत के लिए टेस्ट मैच जीतना चाहते थे.'

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वो कहते हैं ना, अंत भला तो सब भला.

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