उत्तर प्रदेश की 'मोगली गर्ल' पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों मे है. ये बच्ची खराब मानसिक अवस्था में बहराइच में पाई गई थी. कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया था कि ये लड़की केतरनियाघट के जंगलों में कई महीनों से रह रही है और जब उसे बचाया गया, तब वो निर्वस्त्र थी. यहां तक कि पुलिस वालों को बंदरों से लड़ाई कर इस बच्ची को छुड़ाना पड़ा था. मीडिया ने उसके तौर-तरीकों को देखते हुए उसे मॉर्डन ज़माने की 'मोगली' भी बना दिया था. लेकिन दुनिया के सामने अब इस लड़की के बारे में नयी सच्चाई सामने आई है.

पुलिस और वन अधिकारियों ने लड़की के बारे में कही जा रही ज़्यादातर बातों को सिरे से नकार दिया है. पुलिस का कहना है कि ये बच्ची मानसिक रूप से कमज़ोर थी और 24 जनवरी को बहराइच के जंगलों में मिली थी.

इस लड़की का बहराइच के एक अस्पताल में इलाज हुआ था. डॉक्टरों के मुताबिक, लड़की को बोलचाल में तकलीफ़ थी और जब भी कोई इंसान इसके पास जाने की कोशिश करता था, तो ये चिल्लाने लगती थी, हालांकि अब उसकी हालत में काफ़ी सुधार हुआ है.

मोतीपुर पुलिस स्टेशन के हेडकांस्टेबल सर्वजीत यादव ने कहा कि ढाई महीने पहले मिली इस 11 साल की बच्ची के बारे में जितनी भी बातें सामने आ रही है, वो केवल अफ़वाहें हैं. वो न तो नग्न हालातों में थी, न ही वो पैरों और हाथों का इस्तेमाल कर रही थी और न ही उसके आस-पास कोई बंदर मौजूद थे.

दरअसल 24 जनवरी को मोतीपुर पुलिस स्टेशन के पास इमरजेंसी हेल्पलाइन पर इस लड़की को लेकर एक कॉल आई थी. इसके बाद यादव अपने दो साथियों के साथ इस बच्ची को बचाने पहुंचे थे.

यादव ने बताया कि वो लड़की घसीटते हुए अपना शरीर को हिला रही थी. उसने Frock पहनी हुई थी. वो बेहद कमज़ोर लग रही थी और हमे देखकर वह असहज हो गई थी. उसके आस-पास कोई बंदर नहीं थे और न ही वे नग्न हालात में थी. वो चलने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल भी नहीं कर रही थी. मुझे नहीं पता कि ये अफ़वाहें कैसे फ़ैल रही हैं.

पुलिस का मानना है कि लड़की की खराब मानसिक हालत की वजह से ही शायद उसके मां-बाप ने उसे छोड़ दिया होगा, लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि लड़की ज़्यादा समय से ऐसे खराब हालातों में नहीं है. मोतीपुर के एसएचओ ने कहा कि लड़की के हालातों को देखते हुए मैं कह सकता हूं कि ये 24 घंटों से ज़्यादा देर से घर से बाहर नहीं रही है. ऐसे में इस बच्ची का महीनों से बंदरों के साथ रहने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

Source: telugu.1tv

बहराइच जिला अस्पताल के चीफ़ मे़डिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ डी के सिंह ने कहा कि सबसे पहले एक हिंदी अखबार ने इस बच्ची को 'मोगली गर्ल' के नाम से अपने अखबार में छापा था. इसके बाद से अस्पताल में बच्ची को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया.

मीडिया में आई एक रिपोर्ट में तो इस लड़की को 'वन देवी' तक कह दिया गया था. डॉ सिंह ने बताया कि लोग इस बच्ची को देखने के लिए अब अपने परिवारों के साथ आने लगे. कुछ लोगों ने तो बच्ची के पैर छुए और पैसे तक दान किए. मीडिया में फ़ैली अफ़वाहों का असर ऐसा था कि लोगों की भीड़ को संभालने के लिए अस्पताल को एक गार्ड तक का इंतज़ाम कराना पड़ा था.

इस बच्ची को अब एक नया घर और नया नाम भी मिल चुका है. निर्वाण संस्था के प्रेज़ीडेंट सुरेश धापोला 'बैलूंस' नामक एक संस्था चलाते हैं जो मानसिक रुप से असंतुलित लोगों के लिए काम करती है. 'बैलूंस' ही अब इस बच्ची का घर है. सुरेश ने इस बच्ची का नाम एहसास रखा है. उन्होंने कहा कि इस बच्ची के धर्म के बारे में हमें कुछ नहीं पता और 'एहसास' किसी धर्म विशेष का नाम भी नहीं है, ऐसे में ये नाम बच्ची के लिए एकदम सही है.

Source: Hindustan Times