मरीना अब्रामोविच, यूगोस्लाविया की एक परफ़ॉरमेंस आर्टिस्ट, पिछले 30 सालों से भी ज़्यादा समय से स्टेज पर परफॉर्म कर रही हैं. उनके अपार अनुभव को देखते हुए उन्हें परफ़ॉरमेंस कला की दादी भी कहा जाता है. उनका काम आसान नहीं है. वे स्टेज पर अकेले परफॉर्म नहीं करतीं, बल्कि उनकी परफ़ॉरमेंस के दौरान दर्शकों को बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना होता है. वे अपनी कला की मदद से लोगों को झकझोरने का काम करती आई हैं. एकदम शांत रह कर वे लोगों के दिमाग से खेलती हैं और अक्सर उनकी कई परफ़ॉरमेंस से लोगों के कई रूप सामने आते रहे हैं. ऐसी ही उनकी एक यादगार परफ़ॉरमेंस थी रिदम ज़ीरो.

इटली के नेपल्स शहर में हुई इस परफ़ॉरमेंस को लोग आज भी याद रखते हैं. ये घटना साल 1974 की है और मरीना इसके बारे में आज भी बात करती हुई देखी जाती हैं. 6 घंटे चली इस परफ़ॉरमेंस में मरीना ने कुछ भी नहीं किया था. वो बस वहां बेसुध होकर खड़ी थीं. पास में एक टेबल थी. टेबल पर 72 चीज़ें रखी हुई थीं. वहां आए लोगों को उन 72 चीजों में अपनी पसंद की चीज़ से मरीना के साथ कुछ भी करना था. मरीना ने लिखा था कि उनके साथ जो भी कुछ होता है, उसकी ज़िम्मेदारी वो खुद लेंगी.

इस परफॉरमेंस में कोई स्टेज नहीं था. वो बस देखना चाहती थीं कि ऐसी स्थिति में पब्लिक किस हद तक जा सकती है.

मरीना के इस प्रयोग के निर्देश कुछ ऐसे थे:

टेबल पर 72 चीज़ें रखी हैं. लोग चाहें तो इनमें से कितनी भी चीज़ों का मुझ पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

मैं इस परफ़ॉरमेंस की वस्तु हूं.

इस दौरान जो भी होगा उसकी पूरी ज़िम्मेदारी मेरी होगी.

समय: 6 घंटे (शाम 8 से रात 2 बजे तक)

इस परफॉर्मेंस के दौरान सबसे पहले तो उनके नज़दीक केवल फ़ोटोग्राफ़र आए.

कुछ लोग टेबल की ओर बढ़े. टेबल पर आकर्षक वस्तुओं से लेकर खतरनाक चीज़ें भी थीं. पंख, फूल थे तो ब्लेड, चाकू और बंदूक भी थी.

कुछ लोगों ने उन्हें बिठाया और सर पर पानी गिराकर शर्मिंदा करने की कोशिश की.

कुछ ने उन्हें हिलाया-डुलाया और एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर खड़ा कर दिया.

लोग मरीना को रस्सी से बांधने लगे.

एक व्यक्ति ने उन्हें ब्लेड से काट दिया.

एक व्यक्ति ने उन्हें खुद पर बंदूक तानने के लिए कहा.

एक व्यक्ति ने तो उन्हें नग्न कर उनका शरीर यहां-वहां छुआ.

लोग यही नहीं रुके. उन्हें कांटे चुभाए गए और शारीरिक प्रताड़ना दी गई.

6 घंटे बाद जब परफ़ॉरमेंस खत्म हुई तो मरीना ने कमरे में चलना शुरु किया. वह हर उस व्यक्ति के पास गईं, जो इस परफॉर्मेंस के दौरान वहां मौजूद था. वह उनकी आंखों में आंखें डाल कर उन्हें देख रही थी. जो लोग उसे कुछ समय पहले तक प्रताड़ित कर रहे थे, अब वे इस महिला से आंख भी नहीं मिला पा रहे थे. मरीना ने उन्हें उनके अंदर का हैवान दिखा दिया था.

मरीना ने बाद में कहा, ‘इस परफ़ॉरमेंस ने बताया कि इंसानियत की सबसे बुरी चीज़ क्या है. लोग आपको असहाय पाकर आपको पीड़ा देने का मौका नहीं छोड़ते. ये बताता है कि कितना आसान है किसी इंसान को वस्तु बना कर उसके साथ बुरा बर्ताव करना. खासकर जब वो इंसान कमज़ोर हो, और लड़ने की शक्ति न रखता हो. इससे पता चलता है कि अगर लोगों को मौका मिले, तो उन्हें इंसान से हैवान बनने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगता’.

दरअसल मरीना के इस परफ़ॉरमेंस ने साबित किया था कि अगर खुली छूट दे दी जाए तो लोगों की प्रवृति खासकर समूह में कितनी ज़्यादा हिंसक हो सकती है. दुनिया में जब-जब भीड़ ने इंसाफ़ की कोशिश की है तो इतिहास को इसी हिंसक प्रवृति से दो-चार होना पड़ा है.

Source: Elitereaders