हमारे पुरुष प्रधान देश में औरतों को काफ़ी कम आज़ादी नसीब हो पाती है. शास्त्रों का हवाला देकर धार्मिक स्थानों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक उनके आगे बढ़ने पर पाबंदियां लगाई जाती है. किसी और के बारे में क्या कहें, हमारे लोकतंत्र के मन्दिर संसद में ही आज तक महिला सांसदों के आरक्षण का बिल पास नहीं हो पाया है. ऐसे माहौल में हमें हमारे देश के पूर्वांचल जैसे राज्यों से काफ़ी कुछ सीखना चाहिए.

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भौगोलिक रूप से कटे भारत में इन क्षेत्रों में महिलाओं को भी समाज में बराबरी का दर्ज़ा दिया जाता है. महिलाएं भी यहां पुरुषों के बराबर खड़े होकर सभी कामों को अंजाम देती हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण है, मणिपुर का 'इम्मा मार्केट'. मणिपुर के इस ख़ास बाज़ार को केवल महिलाएं ही चलाती हैं, इसलिए इसे 'मदर मार्केट' भी कहा जाता है.

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2,000 से ज़्यादा दुकानों वाले इस मार्केट को औरतें सुचारु रूप से संचालित करती हैं. इससे भी ख़ास बात यह है कि इस मार्केट में बिकने वाला सारा सामान स्थानीय होता है. यहां की औरतें मोलभाव करने में काफ़ी उदार होती हैं, इस मार्केट में जाने वाला हर इंसान यहां से कुछ न कुछ खरीद कर ही लौटता है.

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मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित इस मार्केट को एशिया में महिलाओं द्वारा संचालित होने वाले मार्केट्स में दूसरा स्थान प्राप्त है.

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इस मार्केट में फल-सब्जियों से लेकर कपड़े, आभूषण आदि ज़रुरत की सभी चीज़ें मिलती हैं. यह मार्केट 16वीं सदी से ही यहां पर चलता आ रहा है. इतिहासकारों का कहना है कि पहले के समय में मणिपुरी पुरुष अधिकांश समय चीन, बर्मा जैसे क्षेत्रों से युद्ध करने में ही व्यस्त रहते थे. ऐसी परिस्थितियों में अपने परिवार की ज़िम्मेदारियों को उठाने के लिए यहां की औरतें आगे आयीं और इस तरह इस मदर मार्केट की नींव पड़ी.

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यहां कई औरतें हैं, जो पिछले 40-50 सालों से दुकानदारी करती आ रही हैं. प्रशासन की तरफ़ से भी इस मार्केट को पूरा सपोर्ट दिया जाता है.

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बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं, जो उत्तर भारत को पूर्वोत्तर से सीखनी चाहिए. एक समाज तभी सुचारु रूप से लम्बे समय तक अस्तित्तव में रह पाता है, जहां स्त्री और पुरुष दोनों ही समाज के निर्माण में बराबर भूमिका निभाएं.

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