रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का महाकाव्य है. रामायण के सारे चरित्र अपने धर्म का पालन करते हैं. रामायण के चरित्रों से सीख लेकर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है. आज भी ये महाग्रंथ अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है. जब-जब रामायण के बारे में बात की जाती है तो श्रीराम से लेकर हनुमान तक के बारे में ज़िक्र होता है, लेकिन क्या आपको श्रीराम के जुड़वा बच्चों के बारे में ये दिलचस्प तथ्य मालूम है?

लव और कुश श्रीराम और सीता के पुत्र थे. अयोध्या से निकलने के बाद उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली थी. ये आश्रम तमसा नदी के किनारे एक जंगल में स्थित था.

लव और कुश का जन्म महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में हुआ. लव और कुश की पढ़ाई-लिखाई से लेकर विभिन्न कलाओं में निपुण होने के पीछे महर्षि वाल्मीकि का ही हाथ था. लेकिन लव के जुड़वा भाई, कुश के जन्म की कहानी बेहद दिलचस्प है.

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दरअसल एक बार माता सीता आश्रम के पास ही एक नदी में नहाने गई थी. उन्होंने मुनि वाल्मीकि से निवेदन किया कि जब तक वे नहा कर नहीं आतीं, वे लव की देखभाल कर लें. मुनि वाल्मीकि उस समय लिखने में बेहद व्यस्त थे, लेकिन उन्होंने 'हां' में सिर हिला दिया. जब सीता ने उन्हें लिखने में इतना मग्न पाया तो वे लव को अपने साथ ही ले गईं. वहीं कुछ देर बाद जब मुनि वाल्मीकि ने लव को अपने आसपास नहीं पाया तो वे परेशान हो गए. उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि सीता लव को अपने साथ ले जा चुकी हैं. मुनि परेशान थे कि वे सीता को आखिर क्या जवाब देंगे?

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इसी के चलते उन्होंने कुश की मदद से हूबहू लव जैसे एक बच्चे का निर्माण कर दिया. कुश दरअसल ऐसी घास है, जिससे चटाई और छत के निर्माण में मदद मिलती है. जब सीता लौटीं, तो मुनि वाल्मीकि उनके पास लव को देखकर हैरान हुए. लव के साथ अब कुश भी आ चुका था. महर्षि वाल्मीकि ने सीता से अनुरोध किया कि वे कुश को भी अपने बेटे की तरह पालें. चूंकि मुनि वाल्मीकि ने कुश के इस्तेमाल से इस बच्चे को बनाया था, इसी वजह से इस शिशु का नाम भी कुश पड़ गया.

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लव और कुश महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में पैदा हुए थे. लव के पैदा होने से पहले सीता ने वाल्मीकि से अनुरोध किया थी कि वे उसे अपना शिष्य बना लें. वाल्मीकि ने पांच साल की उम्र में लव और कुश को शिक्षा देनी शुरू की थी. महर्षि वाल्मीकि के सानिध्य में लव और कुश धनुष विद्या में महारत हासिल कर चुके थे. वे ध्वनि की रफ़्तार से धनुष चला सकते थे.

मुनि वाल्मीकि ने लव और कुश को तीरंदाज़ी में बेहद पारंगत कर दिया था. किसी भी युद्ध में लव और कुश को हराना बेहद मुश्किल था. उन्होंने लव और कुश के साथ एक मानसिक तौर पर कनेक्शन बना लिया था, जिससे वे अपना सारा ज्ञान लव-कुश तक पहुंचाया करते थे.

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मिलिट्री कौशल के बाद महर्षि वाल्मीकि ने लव और कुश को संगीत की कला और वीना चलाने का तरीका सिखाया था. उन्होंने लव और कुश को रामायण भी पढ़ाई थी. महर्षि वाल्मीकि ने इसे खुद ही लिखा था और इसे पढ़ाते वक्त उन्होंने श्रीराम के किरदार पर खासी तवज्जो दी थी.

श्रीराम एक बार जब अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे, तभी एक घोड़ा भटकते हुए जंगल में आ गया था, जिसकी वजह से लव का अपने पिता के साथ ही टकराव हो गया था. लव-कुश ने इस घोड़े को अपने कब्जे़ में ले लिया और इसे छोड़ने से इंकार कर दिया. इस वजह से श्रीराम के भाइयों भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के साथ लव-कुश का टकराव भी हुआ और दोनों ने इन्हें आसानी से हरा दिया.

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ये देखने के बाद श्रीराम को खुद ही इस लड़ाई में कूदना पड़ा. इन बच्चों की योग्यता को देखते हुए श्रीराम ने इन्हें अयोध्या आने का निमंत्रण दिया ताकि वे वहां आकर यज्ञ पूरा कर सकें. इसी के बाद श्रीराम को ये पता चला था कि लव और कुश उनके ही बेटे हैं.

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