साल 2017 कई मायनों में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसलों का गवाह रहा. जहां कुछ फ़ैसलों ने सालों से चले आ रहे केस निपटाए गए वहीं कई नए फ़ैसलों ने देश में नई तरह की बहस को जन्म दिया. लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि साल 2017 में कई बड़े और विवादास्पद फ़ैसलों में न्याय मिला जिससे लोगों की कोर्ट में आस्था को बल मिला. ये हैं साल 2017 के सबसे ज़रूरी और महत्वपूर्ण जजमेंट्स जिन्हें लोकतंत्र के इस स्तंभ में लोगों का विश्वास मज़बूत किया.

राइट टु प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला

राइट टु प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला दिया था. कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है. कोर्ट ने 1954 में 8 जजों की संवैधानिक बेंच के एमपी शर्मा केस और 1962 में 6 जजों की बेंच के खड्ग सिंह केस में दिए फैसले को पलट दिया.

इन दोनों ही फैसलों में निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था. यह फैसला केंद्र सरकार के लिए तगड़ा झटका है. केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि निजता मौलिक अधिकार नहीं है. इस फ़ैसले का सीधा असर आधार कार्ड और दूसरी सरकारी योजनाओं पर भी पड़ा. सरकारी नीतियों पर अब नए सिरे से समीक्षा करनी होगी. यानी आपके निजी डेटा को लिया तो जा सकता है, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

आरूषि तलवार केस

नोएडा में हुई आरूषि की मर्डर मिस्ट्री ने पूरे देश को हिला दिया था. पिछले दस सालों से अब तक ये केस चलता आ रहा है. 13 साल की आरूषि अपने बेडरूम में मृत पाई गई थी. लोगों को हेमराज पर शक था लेकिन अगले ही दिन हेमराज की भी लाश छत पर मिली थी. हाई कोर्ट ने इस बार अपने फ़ैसले में आरूषि के माता-पिता को राहत दी है और उन्हें ज़मानत दी गई थी.

राम रहीम को हुई बलात्कार के केस में सज़ा

डेरा सच्चा सौदा चीफ़ गुरमीत राम रहीम को 2002 के एक रेप केस में सज़ा सुनाई गई थी. डेरा की एक साध्वी ने तब पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को खत लिखकर अपने साथ हुए रेप के बारे में बताया था. इसके बाद हुए कई खुलासों में राम रहीम की सेक्स गुफ़ा से लेकर उसके गुंडई के कई कारनामे सामने आए थे. राम रहीम को सज़ा इस मायने में भी उल्लेखनीय हैं क्योंकि रसूखदार और एक प्रभावशाली बाबा होने के नाते उसके कई बडे नेताओं से ताल्लुकात थे, ऐसे में इस केस पर सबकी नज़रें टिकी हुई थी.

राम रहीम के समर्थकों ने दिल्ली और पंचकुला में हिंसा भरे प्रदर्शन किए थे जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई थी और 250 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

निर्भया रेप केस में आरोपियों की मौत की सज़ा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद चर्चित मुकदमें में निर्भया केस के मुज़रिमों की मौत की सज़ा को बरकरार रखा था. ज्योति सिंह के साथ हुए खौफ़नाक बलात्कार के बाद लोगों में गुस्सा भड़का था और देश और दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन हुए थे.

वहीं 5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की उम्रकैद के खिलाफ़ अपील को खारिज कर दिया था और कहा था कि इन लोगों ने बेहद जघन्य अपराध किया है जिसकी कड़ी सज़ा मिलनी ही चाहिए.

मुंबई बम ब्लास्ट फ़ैसला

1993 मुंबई बम धमाकों में 6 आरोपियों को 16 जून 2017 में स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया. स्पेशल जज गोविंद ए सनप को गैंग्सटर अबू सलेम, मुस्तफ़ा दोसा, ताहेर मर्चेंट फ़िरोज़ खान और करिमुल्लाह खान के खिलाफ़ पक्के सबूत मिले हैं. गौरतलब है कि बाबरी मस्ज़िद टूटने के बाद मुंबई में बम ब्लास्ट्स हुए थे जिनमें 257 लोगों की जान चली गई थी. वहीं 67 साल के रियाज़ सिद्दीकी को आतंकवाद को बढ़ावा देने के चलते उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी.

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान नहीं ज़रूरी

Source: The Hindu

सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगाने के दौरान खड़े होने को लेकर भी एक अहम फ़ैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा, यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता है तो ऐसा नहीं माना जा सकता कि वह कम देशभक्त है. नागरिकों को अपनी आस्तीनों पर देशभक्ति लेकर चलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, अदालतें जनता में देशभक्ति नहीं भर सकती हैं.

इसके एक साल पहले दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही पिछले साल एक दिसंबर को सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने और दर्शकों को सम्मान में खड़े होने का आदेश दिया था.

एक ऐसे समय में जब देशभक्ति और राष्ट्रवाद के नाम पर कुछ लोग राजनीतिक फ़ायदा उठाने के लिए हिंसा तक पर उतर आने को तैयार है, ऐसे में ये फ़ैसला बेहद

ट्रिपल तलाक को ठहराया गैरकानूनी

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फ़ैसला देते हुए एक बार में तीन तलाक देने को असंवैधानिक करार दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है. ये गैर-ज़रूरी है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है.

कोर्ट ने इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किए जाने का हवाला देते हुए पूछा था कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता. कोर्ट में 3 जज इसे अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 जज इसके पक्ष में नहीं थे.

दरअसल 15 साल की शादी के बाद शायरा के पति ने उन्हें ट्रिपल तलाक दे दिया था. एक साल बाद 35 साल की शायरा बानो ने 2016 में इस प्रथा को कोर्ट में चैलेंज किया था.

रियल इस्टेट के महारथियों पर नकेल

Source: Indian Express

रियल इस्टेट के महारथी यूनिटेक, जेपी और सुपरटेक अपने ग्राहकों को तयशुदा तारीख पर फ़्लैट देने में कामयाब रहे तो कोर्ट ने यहां भी सख़्ती का परिचय दिया. एपेक्स कोर्ट ने इन बिल्डर्स के खिलाफ़ कड़ा एक्शन लिया. मसलन 12 दिसंबर को कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि जब तक यूनिटेक के एम़डी संजय चंद्रा बेल बॉन्ड के 750 करोड़ जमा नहीं कराएंगे तब तक उन्हें ज़मानत नहीं मिलेगी. वहीं जेपी इंफ़्राटेक केस में कोर्ट ने 25 जनवरी तक जेपी इंफ़्राटेक को 125 करोड़ जमा कराने की मोहलत दी थी ताकि फ़्लैट खरीदने वाले लोगों की रकम को सुरक्षित किया जा सके.

Source: Scoopwhoop