'जब तक लोग कोई चीज़ पसंद कर रहे हैं, तब तक समझ लो अच्छा बुरा कुछ नहीं होता'

अजीबोगरीब लिरिक्स के बादशाह बाबा सहगल ने अपने जीवन में कई वाहियात गाने लिखे, लेकिन उन्होंने ऊपर दी गई जो बात कही है, उसे गुरूमंत्र बनाकर आज इंटरनेट पर लोग स्टार बन रहे हैं.

आज बड़े शहरों से लेकर कस्बों में इंटरनेट मौजूद है. इस दौर में मशहूर होने के लिए लोगों को न ही कुछ असाधारण करने की ज़रूरत है और न किसी टैलैंट की. लेकिन सबसे हताश करने वाली बात ये है कि आपको किसी चीज़ को लोकप्रिय बनाने के लिए सोशल मीडिया पर भी लाइक करने की ज़रूरत नहीं है. इंटरनेट पर कुछ अपर क्लास बुद्धुजीवी बैठे हैं, जो इंटरनेट पर मौजूद हर झामताम पर कमेंट कर उसे मशहूर बना रहे हैं और कहीं न कहीं उन्हें हमारी टाइमलाइन पर पहुंचा रहे हैं.

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ढ़िंचैक पूजा का 'सेल्फ़ी मैंने ले ली आज' एक क्लासिक Cringe Pop सॉन्ग है. ख़ास बात ये है कि उसे रातों-रात मिलती शौहरत के पीछे इंटरनेट ट्रोल्स का बड़ा हाथ है. किसी सेलेब्रिटी के शेयर, फ़ेसबुक पुश या ट्रोल्स का सहारा मिलने के बाद ऐसे कलाकारों के वीडियोज़ फ़ेसबुक पर मौजूद सामान्य यूज़र के न्यूज़फ़ीड में भी नज़र आने लगते हैं.

Cringe Pop दरअसल एक ऐसा Genre है, जिसमें आप कुछ भी सेंसिबल की उम्मीद नहीं कर सकते. इन सभी गानों में बिना सेंस के लिरिक्स, Catchy ट्यून्स और बेसिर-पैर की सिनेमाटोग्राफ़ी और आवाज़ के नाम पर आर्ट के गले को तसल्ली से घोंटा जाता है. कहीं न कहीं इस Genre ने कला को एकदम साधारण स्तर पर लाने का काम बखूबी किया है. गुंडा फ़िल्म की तर्ज पर ही इस Genre ने 'Its so bad, Its good' कार्ड को बार-बार खेला है और ज़्यादातर लोग भी इन वीडियोज़ को इसलिए शेयर करते हैं, ताकि वे बता सकें कि उन्होंने 3-4 मिनट का जो अत्याचार सहा है, उससे दूसरे लोग भी महरूम न रह सकें.

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पूजा और ओमप्रकाशों का दौर तो अभी आया है लेकिन इससे कुछ सालों पहले ही ताहेर शाह अपने गाने 'Eye to Eye' से लोगों की ज़िंदगी में जहर झोंक चुका था. कपड़ों से लेकर गाने के अंदाज़ और लिरिक्स तक, सभी इतना ज़्यादा बुरा था कि ये जल्दी ही वायरल हो गया और इसे मॉर्डन दौर का पहला Cringe Pop सॉन्ग भी माना जाता है. एडवर्टाइज़िंग के क्लासिक मंत्र. 'किसी भी तरह की पब्लिसिटी, अच्छी पब्लिसिटी ही होती है' को ये लोग घोंट कर पी चुके होते हैं और शायद यही कारण है कि हज़ारों गालियां खाने के बावजूद ये लोग ऐसे सॉन्ग्स को बनाना जारी रखते हैं.

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हमने इन So Called सितारों को अपने जीवन में कितनी अहमियत दे दी है, ये इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि कल तक मॉल्स में ऑटोग्राफ़ देने वाली ढिंचैक पूजा आज बिग बॉस के घर में सफ़र पूरा कर चुकी है, ऑटोट्यून के सहारे चमकने वाले ओमप्रकाश के गाने को चिल्लाकर गाने वाली एक सेंसलेस भीड़ कनॉट प्लेस में इकट्ठा हो जाती है, Pineapple सॉन्ग जापान के टॉप गानों में शुमार हो जाता है और गंगनम स्टाइल यूट्यूब पर सबसे ज़्यादा देखे जाने वाला वीडियो बन जाता है.

कोई गाना जितना बेतरतीब औऱ बेसिरपैर का होता है, उसके वायरल होने के चांस उतने ही बढ़ जाते हैं.'क्या बेवकूफ़ी है, लोग कैसे कैसे गाने बनाते हैं या कम से कम मेैं इतना वाहियात नहीं गाता' इन वीडियोज़ में आते ऐसे कमेंट्स साबित करते हैं कि लोग एक सेंस ऑफ़ Superiority से भी भरे हो सकते हैं और इसलिए भी इन गानों को पसंद करते हैं लेकिन इन्हें व्यू देकर कहीं न कहीं इन वीडियोज़ की प्रासंगिकता बढ़ा देते हैं.

हम इन्हें देखते हुए हंसते हैं, इनका मज़ाक उड़ाते हैं.ये वीडियोज़ इतने वाहियात होते हैं कि इन्हें शेयर न करना अपराध सरीखा होता है और वहीं ऐसे आर्टिस्ट्स (या आप जो कुछ कह लें) इन गालियों और मज़ाक के द्वारा पैसा बनाने में सफ़ल होते हैं, लेकिन इन सबके बीच जिसकी धीरे-धीरे मौत होती चली जाती है, वो कला ही होती है.