यूं तो पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर आम नहीं है लेकिन ये एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में अक्सर लोग बात करने से कतराते हैं. कभी स्टिग्मा की वजह से तो कभी लापरवाही के चलते लोग ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों पर ध्यान नहीं देते और इसकी उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है. संजय गोयल बचपन से ही थोड़े मोटे थे और उनका दाहिना स्तन सामान्य से थोड़ा बड़ा था. लोगों के साथ-साथ संजय भी मानते थे कि समय के साथ-साथ ये ठीक हो जाएगा, इसी लापरवाही भरे रवैये के चलते 45 साल के संजय ब्रेस्ट कैंसर के शिकार हो गए.

24 साल की उम्र में उनके दाहिने स्तन से द्रव निकलना शुरू हुआ था और 30 साल की उम्र होते होते गांठ निकल आई थी. हालांकि, जब इससे खून आने लगा तब कहीं जाकर उन्होंने डॉक्टर से इस बारे में संपर्क किया. संजय के डॉक्टर ने भी इस समस्या को गंभीरता से न लेते हुए गोयल को एंटीबायोटिक्स दी. अब दर्द ख़त्म हो चुका था लेकिन एक साल बाद यही समस्या फिर उभर आई. डॉक्टर ने एक बार फिर एंटीबायोटिक्स लेने को कहा तो उन्होंने अपना डॉक्टर ही बदल लिया. उन्होंने अपने फ़ैमिली फ्रेंड और सर्जन से अपने स्तन में हो रहे दर्द को लेकर संपर्क किया.

ये 2010 का समय था. संजय के डॉक्टर फ्रेंड उनकी हालत देखकर चिंतित थे. उन्होंने संजय को Fine needle aspiration cytology (FNAC) नाम का स्पेशल टेस्ट कराने की सलाह दी. इस टेस्ट में नतीजा पॉज़िटिव रहा. संजय को ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हो चुका था. बायोप्सी में भी सामने आया कि उन्हें स्टेज 2 कैंसर है और ये उनके शरीर में फ़ैल रहा है.

संजय ने बताया 'मुझे तो यही लगता था कि कैंसर का मतलब ही मौत होता है. सो अगले कुछ घंटों तक मैं और मेरी पत्नी चुपचाप बैठे रहे. ज़ाहिर है, ये मेरे लिए बहुत चौंकाने वाला था. मैंने हेल्दी लाइफ़स्टायल अपनाई हुई है. मैं योगा में बहुत दिलचस्पी लेता था, मैं हैरान था कि ये मेरे साथ क्यों हो रहा है?'

कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कराने के बाद गोयल को हॉर्मोन थेरेपी भी दी गई, जो अब तक जारी है. विशेषज्ञों के अनुसार, जहां महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बेहद आम होता है वहीं पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना महज 2 प्रतिशत होती है. इसके अलावा 35 साल से कम उम्र के मर्दों में ये समस्या भी सामान्य नहीं है लेकिन अगर किसी शख़्स के परिवार में महिला को ब्रेस्ट कैंसर हो जाए तो पुरूषों को भी सतर्क हो जाने की ज़रूरत है.

हीरानंदानी अस्पताल के प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉ विनोद विज़ का कहना है कि कई लोग अक्सर इन गांठों को नज़र अंदाज़ कर देते हैं, जो कई बार आगे चलकर घातक बन जाती है. अगर कोई पुरुष Gynecomastia या ब्रेस्ट के बड़े होने से पीड़ित है, तो उसे फ़ौरन गांठ या ब्लीडिंग की जांच करानी चाहिए, क्योंकि ये कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं. पुरुषों में छोटे टिशू होने के चलते कैंसर को डिटेक्ट करना मुश्किल होता है, यहीं कारण है कि पुरुषों में कैंसर ज़्यादा तेजी से फ़ैलता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, जीन टेस्टिंग से यकीनन फ़ायदा हुआ है क्योंकि इससे आपको ये अंदाज़ा हो जाता है कि कोई ड्रग मरीज़ पर काम करेगा या नहीं, किस तरह के कैंसर से आप निपट रहे हो और कैंसर को ऐसे में आप अपने ट्रीटमेंट को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं. लेकिन ये बेहद महंगे टेस्ट्स हैं जिनकी कीमत 30000 से लेकर 3.5 लाख तक हो सकती है.

उन्होंने कहा कि 'मैं इस बात का जीता जागता उदाहरण हूं कि कैंसर के बाद भी जीवन जिया जा सकता है. मैं घूमता हूं, योगा करता हूं और कई ऐसी चीज़ें करता हूं जिन्हें मैं पहले करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था. हमने एक लड़की भी एडॉप्ट की है और हम अपनी लाइफ़ पूरी शिद्दत से जी रहे हैं.'

Source: Hindustan Times