बदलती तकनीक और इंटरनेट क्रांति ने दुनिया की कई चीज़ों को विलुप्त-सा कर दिया है. ये वो चीज़ें हैं, जो एक ज़माने में हमें बेहद अजीज़ हुआ करती थी. लेकिन समय के साथ हुए बदलाव की वजह से हमने इन्हें अलविदा कह दिया. इन दो दशकों में इस्तेमाल करने वाली कई चीज़ों में भी बदलाव आए हैं.

1. कंचे Vs इलेक्ट्रॉक्निक गेम्स

90 के दशक के बच्चे शायद वो आखिरी जेनरेशन है, जिसके लिए आज के दौर में इंटरनेट भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना बचपन में खेले गए कंचे, लट्टू, गुल्ली-डंडा. आज इन खेलों को इलेक्ट्रॉक्निक गेम्स व डिवाइस ने रिप्लेस कर दिया है.

2. थपकी Vs वॉशिंग मशीन

पहले मम्मी, दादी, नानी, थपकी से कपड़े धोती नज़र आती थीं. पहले कपड़े धोने से पहले कई समान लेकर बैठती थी जैसे थपकी, साबुन, ब्रश. लेकिन आज इनकी जगह वॉशिंग मशीन ने ले ली है.

3. टोस्ट Vs Cookies

रस, मठ्ठी, फैन जैसे नाश्ते को 90 के दशक में खूब चाव से खाया जाता था, लेकिन आज तरह-तरह की Cookies लोगों की पसंद बने हुए हैं.

4. उजाला Vs कम्फ़र्ट

पहले अक्सर कपड़े धोने के बाद चमक के लिए उजाले का प्रयोग किया जाता था, पर आज उजाले को कम्फ़र्ट जैसे फ़ेबरिक कंडिशनर ने रिप्लेस कर दिया है.

5. मोबाइल Vs स्मार्ट हैंडसेट

90 के दशक में आए सिंपल मोबाइल फ़ोन को महंगे व कई ऑप्शन वाले स्मार्ट हैंडसेट ने जगह ले ली है. पहले फ़ोन केवल बात करने के लिए होता था, आज कई लोगों के लिए ये स्मार्टफ़ोन एडिक्शन हो चुके हैं.

6. टॉफ़ी Vs कैंडी/ चॉकलेट

बचपन में खूब़ शौक से खाई जाने वाली मछली वाली टॉफी और संतरे वाली टॉफी की जगह अब बच्चे कलरफुल कैंडि्स को पसंद करने लगे हैं.

7. रेज़र Vs ट्रिमर

शेविंग ब्रश का जलवा कुछ और ही था. बॉलीवुड के कई बड़े नाम इनके विज्ञापनों में नज़र आ चुके हैं. Masculinity के पर्याय समझे जाने वाले शेविंग ब्रश और रेज़र की जगह आज ट्रिमर ने ले ली है.

8. हवाई चप्पल Vs स्लीपर

ग्लोबलाइज़ेशन के दौर ने दुनिया के पैरों को भी एक नई रंगत प्रदान की है. सफ़ेद और साधारण हवाई चप्पलों का बाज़ार आज रंग-बिरंगी चप्पलोंं से भरा पड़ा है.

समय के साथ-साथ हमने अपना रहन-सहन बदला है और ये बदलाव हमारे जीवन का अभिन्न अंग है. इन सभी चीज़ों को हमने अपनी सुविधा के अनुसार रिप्लेस किया है. आज स्मार्ट फ़ोन से हमें कई फ़ायदे हुए हैं, तो वहीं दूसरी ओर वॉशिंग मश़ीन ने महिलाओं के काम को ज़्यादा सरल बनाया है. तकनीक ने हमारी बीच की दूरियों को कम किया है और ऐसे ही बदलाव हमें आगे भी देखने को मिलेंगे.