वो सिकंदर ही दोस्तों कहलाता है, हारी बाज़ी को जीतना जिसे आता है...

नए दौर के नए सिकंदर हैं शशांक अग्रवाल, जिन्होंने ज़िंदगी की हारी बाज़ी को पलट दिया. ये बाज़ी थी परिवार पर आए आर्थिक संकट की और अपनी पढ़ाई को जारी रखने की. इससे लड़ते हुए उन्होंने साल 2017 की कैट की परीक्षा में 98.01 का परसेंटाइल हासिल किया है. अब शशांक आईआईएम रोहतक से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं.

इंदौर के रहने वाले शशांक अग्रवाल उन तमाम स्टूेडेंट्स के लिए प्रेरणा हैं, जो कैट की परीक्षा पास करने का सपना देखते हैं. इन्होंने अपने जीवन में कई परेशानियों को झेला है.

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बचपन में ही उठ गया था पिता का साया

आईआईएम रोहतक में मैनेजमेंट की डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे शशांक अग्रवाल एक मिडिल क्लास फ़ैमिली से हैं. बचपन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था, जिसके बाद उनके दादाजी की पेंशन से उनका घर चलता था.

शशांक ने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन सेकेंड इयर में उनके दादाजी चल बसे. अब उनके परिवार पर आर्थिक संकट आन पड़ा और साथ ही पढ़ाई भी जारी रखनी थी.

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मगर शशांक इतनी सारी मुसीबतों के आने पर घबराए नहीं, उन्होंने इनका डटकर सामना किया. अपने परिवार को इस परेशानी से निकालने के लिए उन्होंने कर्ज़ लेकर एक ढाबा शुरू किया. इसके लिए उन्होंने इंदौर के भवर कुआं चौराहे पर एक कमरा किराए पर लिया, साथ ही कुक समेत पांच लोगों को हायर किया.

कर्ज़ लेकर शुरू किया ढाबा

इस चौराहे पर बहुत से कोचिंग सेंटर हैं, जिनमें सैंकड़ों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं. उन्हें ध्यान में रखते हुए शशांक ने स्टूडेंट्स को 50 रुपये में भरपेट खाना देना शुरू किया. उनका ये प्लान कामयाब रहा और बहुत जल्द ही वो इस ढाबे से 30 हज़ार रुपये प्रतिमाह कमाने लगे.

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वो रोज़ सुबह 6 बजे पहले बाजार से सब्ज़ियां और सामान लाते और ढाबे की तैयारी कराते. इसके बाद दोपहर में कॉलेज पहुंच जाते. शाम को लौटकर फिर से ढाबे पर रात 11 बजे तक काम करते. इस तरह उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक संकट से बाहर निकाला और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी.

ढाबा चलाते हुए की कैट की तैयारी

ढाबा चलाते हुए शशांक को एहसास हुआ कि उन्हें मार्केट की अच्छी समझ है, इसलिए उन्हें मैनेजमेंट की शिक्षा लेनी चाहिए. फिर क्या था, उन्होंने इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करने के बाद ही कैट की परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी. साथ ही हैदराबाद के एक स्टार्टअप से जुड़ गए, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कॉन्टेंट तैयार करता था.

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शशांक ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा- 'इंजीनियरिंग स्टूडेंट होने का मुझे फ़ायदा मिला. मेरे लिए Data Interpretation & Logical Reasoning सेक्शन ज़्यादा कठिन नहीं थे. इसलिए मैंने अपना सारा ध्यान Verbal and Reading Comprehension सेक्शन की ओर लगाया. इसी का नतीजा है कि मैं कैट की परीक्षा पास करने में कामयाब रहा.'

शशांक को हमारी ओर से उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं.