वो कहते हैं न कि ज़िन्दगी की डोर ऊपर वाले के हाथ में होती है, और ज़िन्दगी कब, किसको और किस मोड़ पर ले जाकर खड़ा कर दे ये कोई नहीं जानता पर वो जानता है. और सबकी तरह ही वो भी अपने आने वाले जीवन से अंजान थी और अपने बचपन को जी रही थी, पर तभी कुछ ऐसा हुआ कि पूरी तरह बदल गई उसकी ज़िन्दगी. पर कहते हैं न कि जो इंसान कभी हार नहीं मानता है किस्मत भी उसके साथ चलती है और हर मुश्किल उसके लिए आसान हो जाती है.

आज हम आपको एक ऐसी ही लड़की की प्रेरणादायक कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसका नाम पौलमी पटेल है और वो सिर्फ़ 12 साल की थीं जब एक दुर्घटना में उसने अपना सीधा हाथ खो दिया था. वो मुंबई की है अब वो 28 साल की हो चुकी है. इन 16 सालों में उसकी 45 सर्जरीज़ हो चुकी हैं. इतनी कम उम्र में इतनी सारी मुश्किलों का हिम्मत के साथ सामना करने वाली पौलमी बहुत स्ट्रोंग और परिस्थिति से लड़ने वाली बहादुर लड़की है.

"मैं 12 साल की थी, जब मुझे फ़िशिंग रॉड से खेलते वक़्त ख़तरनाक करंट लगा था. फ़िशिंग रॉड मेरे हाथ से छूटकर खिड़की से बाहर गिरने वाली थी और उसको गिरने से बचाने के लिए मैंने रॉड के बजाये उस बिजली के तार को पकड़ लिया, जिसमें 11,000 वोल्ट का करंट दौड़ रहा था. जैसे ही मैंने उस तार को छुआ मेरे सीधे हाथ में 11,000 वोल्ट का करंट लगा और मैं बिजली के झटके से बेहोश हो गई. तुरंत ही मुझे हॉस्पिटल में ICU में एडमिट किया गया, क्योंकि मेरी बॉडी के कई पार्ट्स जल गए थे और कई जगह का मांस गायब हो चुका था. इस हादसे के एक हफ़्ते बाद बॉडी इन्फ़ेक्शन को फैलने से बचाने और हाथ के बाकी मांस को सड़ने और गलने से बचाने के लिए मेरे दाहिने हाथ को आधा काट दिया गया.

मैं केवल 12 साल की थी और इतनी छोटी उम्र में मुझको ये समझ नहीं आया कि आखिरकार मेरे साथ हुआ क्या है और ये हादसा कितना बड़ा है. बस मुझे ये पता चला था कि अब मुझे एक बार फिर से बच्चे की तरह शुरुआत करनी होगी. इस मुश्किल घड़ी में मेरे पेरेंट्स, रिश्तेदार और दोस्त मज़बूती की साथ मेरे लिए खड़े थे. यहां तक कि मेरे पापा ने एक रूल बना दिया था कि जो भी मुझसे मिलने या मुझे देखने आएगा, उसको सबसे पहले एक जोक सुनाना होगा, उसके बाद ही मुझसे वो कोई बात कर पायेगा. सच मानिये पापा के इस रूल ने मेरी बहुत मदद की, मेरा दर्द कम होने लगा. मैं अब पहले से बेहतर महसूस करने लगी थी, मैं हंसने लगी थी और धीरे-धीरे मैं हाथ न होने की इस वास्तविकता के साथ दुनिया का सामना करने के लिए तैयार हो रही थी. मेरा सबसे बड़ा टास्क था अपने नकली हाथ से लिखने की प्रैक्टिस करना. शुरुआत में तो ये नामुमकिन लग रहा था. पर क्योंकि मेरा आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट चल रहा था, मैं हर दिन पेन को पकड़ने की कोशिश करती थी और हर दिन पहले से बेहतर हो रहा था और फिर वो दिन आया जब मैंने पेन पकड़ा और पहला शब्द लिखा. और इलाज के ख़त्म होने तक मैंने 'Matilda' नाम की एक किताब को देखकर दोबारा लिख डाला... वाकई क्या जीत है!

इस तरह धीरे-धीरे मैं अपने संघर्षों पर ध्यान देने के बजाये, मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं अपनी दूसरी ज़िन्दगी का जश्न मना रही हूं. चाहे मेरी नई ज़िन्दगी का वो दिन जब मैंने अपने बैग की चेन बंद की थी, या फिर वो दिन जब मैंने ख़ुद अकेले अपने आप कपड़े पहने थे, या फिर वो वक़्त जब पहली बार मैंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद करके खुद अपना पूरा पेपर लिखा... ये सब कुछ मेरे लिए जश्न से कम नहीं था.

जब मैंने खुद अपने दम पर BCOM किया, फिर MBA करने के लिए 2 साल मैं अकेले रही... तब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि मैं पूरी हूं, मुझे एहसास हुआ कि मेरी अक्षमता मेरी लाइफ़ का एक छोटा सा हिस्सा था, न कि में मेरी ज़िन्दगी का मतलब. और इससे मेरी ज़िन्दगी जीने के जज़्बे को कोई फ़र्क नहीं पड़ता है.

शुरुआत में मैं अपने हाथ को फ़ुल बाजू के नीची, दुपट्टे के पीछे छुपाने की कोशिश करती थी और कभी भी शॉर्ट्स नहीं पहनती थी क्योंकि मेरे दोनों पैरों पर और हाथों पर जलने के निशान थे. लेकिन कुछ समय बाद मैंने इन निशानों को छुपाना छोड़ दिया. इसका कारण था कि मैं अपनी कमज़ोरी और निशानों पर गर्व करने लगी थी. मेरे इन घावों ने मुझे वो बनाया जो मैं आज हूं... एक निर्भीक, पॉज़िटिव और कॉन्फ़िडेंट लड़की.

28 साल की उम्र में मैं 45 सर्जरीज़ से गुज़र चुकी थी और मैं अपना दाहिना हाथ खो चुकी थी, लेकिन मैं अपनी ज़िन्दगी को बिंदास जी रही हूं. मैंने अपने प्यार से शादी की, और वो मुझे ज़िन्दगी की हर ख़ुशी दे रहा है, मुझे बेइंतेहां खुश रखता है. वो मुझे सफ़लता की हर ऊंचाई पर ले जाना चाहता है. वो मेरे बिज़नेस में पूरा सहयोग करता है, एक बॉस की तरह मुझे आर्डर देता है. हम स्काईडाइविंग करते हैं, बंजी जंपिंग करते हैं, और साथ में वॉटर ड्राइव्स भी करते हैं. और अभी हमारे पास करने के लिए बहुत कुछ है... पर इसके साथ ही मैं अपनी हर छोटी से छोटी जीत का जश्न बनाना जारी रखूंगी और डांस करना भी जारी रखूंगी...!"

सच में पौलमी तुम बहुत बहादुर हो तुमने अपनी अक्षमता को अपनी सफ़लता के आड़े नहीं आने दिया.