भले ही हम विकास की कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर लें. शिक्षा के मामले में अमेरिका से ले कर ब्रिटेन के उदाहरण दे दें, पर सच ये है कि आज भी हम संकीर्ण मानसिकता से पीड़ित हैं. जो संस्कृति और सभ्यता की छोटी-छोटी बातों पर उग्र रूप धारण कर लेती है. विकास और उन्नति के बड़े-बड़े लेक्चर लेने के बावजूद ऐसी ही एक संकीर्ण मानसिकता हमारी ट्रांसजेंडर्स के प्रति बनी हुई है. ट्रांसजेंडर होना हमारे समाज में आज भी एक टैबू है. ऐसे ही एक टैबू को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं अंजलि आमिर. जिन्हें हाल ही में साउथ के सुपरस्टार Mammootty ने अपनी आने वाली फ़िल्म में लीड रोल दिया है.

इसी के साथ ये पहला ऐसा मौका होगा, जब किसी ट्रांसजेंडर को भारतीय सिनेमा में मुख्य महिला किरदार निभाते हुए दिखाया जायेगा. ये फ़िल्म दो भाषाओं, तमिल और मलयालम में मशहूर डायरेक्टर राम के निर्देशन में बनेगी.

20 साल की उम्र में अंजलि ने सेक्स ट्रांसप्लांट सर्जरी का सहारा लिया और मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा. अंजलि अपनी फ़िल्म को लेकर काफी उत्सुक होते हुए कहती हैं कि Mammootty जैसे अभिनेता और Ram जैसे निर्देशक के साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा. शुरुआत में मेरे मन में एक डर था, जिसे Mammootty के बढ़ावे ने आत्मविश्वास में बदल दिया.'

अंजलि, केरल के Kozhikode में एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुई थीं. कम उम्र में ही अंजलि के सिर से उनकी मां का साया उठ गया था. वो बचपन से ही अपने अंदर महिलाओं वाले गुणों को महसूस किया करती थी.

दसवीं पास होते-होते उनके अंदर का ये बदलाव लोगों के सामने आने लगा, जिसे ले कर अंजलि के घर में उनका विरोध होने लगा. जिसके बाद अंजलि घर छोड़ बेंगलुरु और Kozhikode में ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच रहने लगी. इन सब के बावजूद अंजलि ने सपने देखना नहीं छोड़ा और आज अपनी कामयाबी से लोगों के बीच एक मिसाल कायम की.

Source: indiatimes