जहां आंध्र प्रदेश में हाल ही में दिन दहाड़े एक महिला के रेप की खबर ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था, वहीं केरल से एक ऐसी खबर आई है जिसे जानकर आपका इंसानियत पर विश्वास शायद दोबारा वापस लौट आएगा. केरल के दो गांवों ने महज 5 घंटों में 11 लाख रूपए जुटा कर तमिलनाडु के एक शख़्स की मदद की है. 45 साल के कुलाथुपरमबिल जयन को किडनी ट्रांसप्लांट की ज़रूरत थी और उनकी इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए चिंगावनम और पल्लम गांव के लोगों ने घर-घर जाकर लोगों से डोनेशन मांगी. सुनने में ये भले हैरतअंगेज़ लगे लेकिन ये सच है कि डोनेशन के लिए लोग अपने साथ बाल्टी लेकर जाते थे. गौरतलब है कि जयन पिछले 20 सालों से इन गांवों में कपड़ों को प्रेस करने का काम कर रहे हैं.

इस फंड कलेक्शन कैंपेन को जयन लाइफ़ समिति संस्था ने आयोजित किया था. इस समिति को इन दोनों गांवों के पांच प्रतिनिधित्व हेड कर रहे थे. इस पूरे कैंपेन में करीब एक महीने का समय लगा. कई कैथोलिक पादरियों को बुलाया गया ताकि वे लोगों को पैसा डोनेट करने के लिए प्रेरित कर सकें. जयन के मुताबिक, 'चिंगावनम और पल्लम गांव में सभी लोग मुझे जानते हैं क्योंकि मैं पिछले बीस सालों से यहां के लोगों के कपड़े प्रेस कर रहा हूं. मुझे डर था कि पैसों की कमी के कारण शायद मेरी मौत हो जाएगी. लेकिन मुझे एहसास हुआ कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग मुझसे बेहद प्यार करते हैं.

माना जा रहा है कि जयन अगले महीने लिवर ट्रांसप्लांट के लिए सर्जरी कराएंगे. समिति हेड टीनो के थॉमस ने कहा कि 'हमने कोट्टायाम म्युनिसिपालिटी के पांच वार्डो में दो से ढाई हज़ार घर कवर किए हैं. हालांकि इलाज के लिए सिर्फ़ 10 लाख रूपए की ज़रूरत थी लेकिन इस कैंपेन के सहारे हम 11.25 लाख रूपए जुटाने में सफ़ल रहे हैं.'

थॉमस ने बताया कि 'इस कैंपेन के लिए मिडिल क्लास फ़ैमिली से लेकर लोअर मिडिल क्लास तक सब लोगों ने डोनेट किया. समिति ने इसके अलावा डेली वर्कर्स से एक दिन की आमदनी को इस कैंपेन के लिए डोनेट करने की अपील भी की थी. गौरतलब है कि ये राशि लगभग 500 रू होती है. इसके अलावा इस कैंपेन के लिए लोगों ने 50 रू से लेकर 25000 रू तक डोनेट किए. लोगों को इस कैंपेन के लिए प्रेरित करने का काम फ़ादर सेबेस्टिन पुनासेरी ने भी बखूबी निभाया.'

ये कैंपेन एक महीने पहले ही शुरू हो गया था. पल्लम और चिंगावनम गांवों के पांच म्युनिसिपालिटी प्रतिनिधित्वों से मिलने के बाद इस कैंपेन को काफी गति मिली. इसके बाद वार्ड लेवल पर इस कैंपेन को लेकर रणनीति बनाई गई और मोबाइल एड्रेस सिस्टम के सहारे कई लोगों को इस मामले में जागरूक करने की कोशिश की गई.

Source: Financial Express