न्यूज़ पेपर और टेलीविज़न की ख़बरों से एक बात, तो आपकी भी समझ में आ गई होगी कि कुछ दिनों बाद उत्तर प्रदेश समेत देश के चार राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. चुनावों का मौसम आते ही फिजाओं में जुमलों की बारिश के साथ ही वोटरों को लुभाने के लिए नारों की बौछार भी होती है. ऐसा ही इस बार के चुनावों में भी देखने को मिल रहा है. इस बार चुनावों में एक और नई चीज़ देखने को ये मिल रही है कि नेता दूसरी पार्टियों के नारे को बिगाड़ कर मज़े भी ले रहे हैं. अब जैसे इसे ही देखिये,

'अखिलेश का जलवा कायम है, उसका बाप मुलायम है.'

'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' पर राहुल गांधी भी 'अरहर मोदी' और 'सूट बूट की सरकार' के ज़रिये चुटकियां लेते हुए दिखाई दे रहे हैं.

आज हम आपके लिए कुछ ऐसे ही स्लोगन लेकर आये हैं, जो वोट में बदले या न बदलें, पर उत्तर प्रदेश की आबोहवा में काफ़ी पॉपुलर हो रहे हैं.

मायावती जी इस नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरी हैं, 'बेटियों को मुस्कुराने दो, बहन जी को आने दो'. तो भाजपा भी 'अबकी बार 300 के पार' और 'दो बातें कभी न भूल- एक नरेंद्र मोदी, दूसरा कमल का फूल' के नारे के साथ वोटों को खींचने की कोशिश कर रही है.
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उधर कांग्रेस कभी भाजपा पर 'गरीबों से खींचों और अमीरों को सीचों' से तो कभी बसपा पर 'कर्जा माफ़, बिजली बिल हाफ़' और बसपा का 'करो हिसाब' के ज़रिये काम तमाम करती हुई दिखाई दे रही है.

लखनऊ में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली के बाद भाजपा एक बार फिर प्रदेश चुनाव में मोदी लहर कायम करने की कोशिश कर रही है. जिसके लिए उसका नारा है 'साथ आएं, परिवर्तन लाएं, कमल खिलाएं', 'जन-जन का संकल्प, परिवर्तन एक विकल्प.'
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इनके अलावा कुछ और नारे आजकल यहां काफ़ी प्रचलित हो रहे हैं, जिनमें 'न इकाई, न दिहाई, पूरा दो-तिहाई', 'गली-गली मचा है शोर, जनता चली भाजपा की ओर.'

खैर किस पार्टी के नारे कितने सफल हुए, ये तो चुनाव के परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा, पर तब तक ऐसे ही और नारों का इंतज़ार कीजिये और मज़े लीजिये.

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