उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड ने दिल्ली में कब्रिस्तान की समस्या को देखते हुए हुमायूं के मकबरे को तोड़ने का प्रस्ताव रखा है. बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में कार्यवाई करने की गुज़ारिश की है. वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने 18 अक्तूबर को लिखे गए इस पत्र में कहा कि 'हुमायूं के मकबरे को राष्ट्रीय धरोहर की लिस्ट से हटा लिया जाए और मकबरे की बिल्डिंग को तोड़कर इसे दिल्ली के मुसलमानों के लिए कब्रिस्तान घोषित किया जाए. इस मकबरे की वजह से सरकार को किसी तरह की आमदनी नहीं होती है और हर साल कई लाख रूपए इस मकबरे की मरम्मत में खर्च हो जाते हैं. सरकारी पैसा लोगों के हित के लिए इस्तेमाल होना चाहिए न कि क्रूर शासकों के लिए.'

उन्होंने कहा कि 'कुछ मुगल सम्राटों ने भारतीय कल्चर को काफी नुकसान पहुंचाया है और कई इतिहासकारों के मुताबिक अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करते हुए 3000 से ज़्यादा मंदिर को इन शासकों ने नुकसान पहुंचाया है. वे न तो इस्लाम के पैरोकार थे और न ही वे अच्छे शासक थे. हमने सही जगह तलाशने की कोशिश भी की है लेकिन दिल्ली के आसपास ऐसी बड़ी जगह मौजूद नहीं है और ये वाकई एक गंभीर समस्या बनी हुई है.'

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बोर्ड की इस पहल से उन कई लाख मुस्लिम लोगों का फ़ायदा हो सकता है जिन्हें अपने परिवार वालों को दफ़नाने के लिए कब्रिस्तान की तलाश करनी पड़ती है. अगर इस प्रस्ताव को सरकार स्वीकार कर लेती है तो दिल्ली में मुस्लिम लोगों को अगले कई सालों तक कब्रिस्तान की कमी महसूस नहीं होगी.

35 एकड़ की ज़मीन में फ़ैले इस मकबरे के बारे में बोर्ड को ऑल इंडिया राब्ता-ए-मस्ज़िद और मदारीस-ए-इस्लामिया ने अनुरोध किया था. गौरतलब है कि बोर्ड इससे पहले भी यूपी में बनने जा रहे भगवान राम के 100 मीटर स्टैचू के लिए 10 चांदी के तीर दान करने की बात कह चुका है.