टुनटुन... नाम सुनते ही आ गई न मुस्कान. कुछ ऐसी ही थी गुज़रे ज़माने की मशहूर कॉमेडियन टुनटुन. आज की जेनरेशन भले ही कपिल शर्मा, सुनील ग्रोवर जैसे कॉमेडियन्स की दीवानी हो, लेकिन टुनटुन एक ऐसी हास्य कलाकार थीं, जिनके लिए ख़ास तौर पर रोल लिखे जाते थे. उन्होंने अपने ज़माने के सभी बड़े स्टार्स के साथ काम किया था. साथ ही उन्होंने बॉलीवुड की पहली फ़ीमेल कॉमेडियन का तमगा भी हासिल किया था. तो ज़्यादा वक़्त न लेते हुए, चलिए आपको बताते हैं उमा देवी उर्फ़ टुनटुन कैसे एक सफल हास्य कलाकार बनीं.

पहले सिंगर के रूप में ब्रेक मिला

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टुनटुन का पूरा नाम उमा देवी खत्री था और उन्हें रेडियो पर गाने सुनने का शौक था. टुनटुन अकसर रेडियो पर गाने सुनकर उन्हें गुनगुनाती थीं. उनका यही शौक उन्हें मुंबई ले गया. वो यहां अपनी एक सहेली के साथ सिंगर बनने का सपना लेकर आईं थीं. कुछ दिनों तक संघर्ष करने के बाद, उन्हें तब के फ़ेमस म्यूज़िक डायरेक्टर नौशाद अली से मिलने का मौका मिला.

संगीतकार नौशाद अली ने दिया था पहला ब्रेक

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नौशाद ने उनका ऑडिशन लिया और टुनटुन को पहला ब्रेक दिया. फ़िल्म थी वमिक अज़रा (Wamiq Azra) और गाना था 'हाय दो दिल मिलते-मिलते रह गए…'

इसके बाद उन्होंने गाया 'अफ़साना लिख रही हूं...' मशहूर अदाकारा सुरैया पर फ़िल्माया गया ये गाना आज भी लोग गुनगुनाते हैं. टुनटुन का सिंगिंग करियर अच्छा चल रहा था, उन्होंने 'प्यासा', 'मिस्टर एंड मिसेज़ 55' जैसी कई सुपरहिट फ़िल्मों के गाने गाए.

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फिर बॉलीवुड में लता मंगेशकर की एंट्री हो गई और टुनटुन को गाने के ऑफ़र मिलने कम हो गए. यहां फिर से नौशाद ने उनके करियर को सहारा दिया और टुनटुन को एक्टिंग करने की सलाह दी.

एक्टिंग शुरू करने के लिए रखी थी ये शर्त

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टुनटुन राज़ी हुई मगर एक शर्त पर, वो ये कि टुनटुन डेब्यू करेंगी तो दिलीप कुमार की फ़िल्म से. इस शर्त को सुनकर नौशाद हंस दिए. फिर उनके कहने पर दिलीप साहब की फ़िल्म 'बाबुल' में उन्हें एक कॉमिक रोल करने को मिला. इस तरह टुनटुन की मुराद पूरी हो गई. इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान एक बार दिलीप साहब उनसे टकराकर उन्हीं के ऊपर गिर गए और उनके मुंह से निकला, 'टुनटुन.'

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तभी से ही उमा देवी का नाम टुनटुन हो गया. फिर टुनटुन ने कई फ़िल्मों में अपनी कमाल की कॉमेडी से लोगों को हंसाया और गुदगुदाया. 60-70 के दशक में कॉमेडी का दूसरा नाम बन गई थीं टुनटुन और हर फ़िल्म में उनके लिए एक रोल ज़रूर रखा जाता था.

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वो 23 नवंबर 2003 को इस दुनिया को छोड़कर चली गईं. मगर आज भी वो हर सिने प्रेमी के दिल में ज़िंदा हैं.

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