हर इंसान का कोई न कोई एक ऐसा सपना होता है जिसे वो अपने जीते जी पूरा करना चाहता है. कोई डॉक्टर बनकर ग़रीबों की मदद करना चाहता है, तो कोई इंजीनियर बनकर पूरी दुनिया घूमना चाहता है. हरियाणा में हिसार ज़िले के सारंगपुर गांव के रहने वाले विकास ज्याणी ने कुछ अलग ही सपना देखा था. विकास ने कई साल पहले ख़ुद से ये वादा किया था कि जिस दिन वो पायलट बन जायेंगे उस दिन गांव के सभी बुज़ुर्गों को हवाई सफ़र कराएंगे.

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विकास ने सालों पहले जो सपना देखा था, पायलट बनने के बाद आज उसे बख़ूबी पूरा किया. इस यात्रा के लिए विकास ने गांव के उन लोगों को चुना जिनकी उम्र 70 साल या इससे ज़्यादा हो. उन्होंने गांव के 22 सीनियर सिटिजंस के साथ चंडीगढ़ से अमृतसर की उड़ान भरी. इस दौरान इन बुज़ुर्गों ने स्वर्ण मंदिर के दर्शन किये, साथ ही जलियांवाला बाग़ और वाघा बॉर्डर भी घूमे.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में विकास के पिता महेंद्र ज्याणी ने कहा कि 'मेरे बेटे ने जो काम किया है, वो किसी पुण्य से कम नहीं है'.

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जबकि पहली बार हवाई सफ़र करने वाली 90 वर्षीय बिमला देवी ने कहा कि 'मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी जहाज में सफ़र करूंगी. कई लोगों ने हवाई यात्रा कराने का वादा तो किया मगर वादा सिर्फ़ विकास ने निभाया'. जबकि 78 वर्षीय राममूर्ति औऱ कांकरी ने कहा कि, ये उनकी ज़िंदगी का सबसे शानदार अनुभव था. साथ में बैठे लोगों की भी प्रशंसा की जिन्होंने यात्रा के दौरान इन बुज़ुर्गों की मदद की.

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एक जमाना था जब हवाई सफ़र करना बहुत बड़ी बात होती थी, लेकिन आज ये किसी भी आम इंसान के लिए बड़ी बात नहीं है. 70 साल से ज़्यादा उम्र के इन बुज़ुर्गों के लिए तो ये एक उड़ान किसी सपने से कम नहीं है.

इन 22 बुज़ुर्गों के सपने को पूरा करने और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए विकास का शुक्रिया.