इस दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है ज़रूरतमंदो की मदद करना, इसके लिए इंसान का अमीर या ग़रीब होना मायने नहीं रखता. इंसानियत हमें ज़रूरतमंदो की मदद करना सिखाती है. दुनियाभर में कई ऐसे संगठन हैं जो बिना किसी लाभ के मानवहित के लिए काम कर रहे हैं. युद्ध हो या प्राकृतिक आपदा या फिर सरकार और सेना के अत्याचार के शिकार लोग, ये संस्थाएं हर संभव मदद के लिए तैयार रहती हैं.

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ब्रिटेन का 'खालसा एड' भी एक ऐसा ही संगठन है जो पिछले कई सालों से ज़रूरतमंदों की मदद के लिए दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाता है. चाहे नेपाल भूकंप के वक़्त लोगों की मदद करना हो या फिर सीरिया के कठिन हालातों में बेघरों की ज़रूरतों को पूरा करना 'खालसा एड' के वॉलिंटियर्स बिना अपनी जान की परवाह किये हर जगह पहुंच जाते हैं.

आईये नज़र डालते हैं खालसा एड के वॉलेंटियर्स कब-कब ज़रूरतमंद लोगों की मदद कर चुके हैं:

1- केरल बाढ़

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पिछले कई दिनों से 'खालसा एड के वॉलेंटियर्स दिन-रात बाढ़ पीड़ितों के खाने-पीने के इंतज़ाम में लगे हुए हैं. ये वॉलेंटियर्स हर दिन लंगर के दौरान तकरीबन 2000 बाढ़ पीड़ितों को ताज़ा खाना खिलाने का नेक काम कर रहे हैं. कठिन हालातों के बावजूद ये वॉलेंटियर्स लगातार बाढ़ पीड़ितों तक खाने से लेकर मेडिकल हर सुविधा पहुंचा रहे हैं. इस संस्था के लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के लोगों से बाढ़ पीड़ितों की मदद की अपील भी कर रहे हैं.

2- मुंबई बाढ़

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साल 2005, मुंबई में आई भयानक बाढ़ के वक़्त भी 'खालसा एड' ज़रूरतमंदों की मदद के लिए सबसे आगे खड़ी थी. पीड़ितों को समय से भरपेट खाना मिल सके इसके लिए इस संस्था ने कई दिनों तक विशाल लंगर लगाया हुआ था, जिसमें प्रतिदिन 2 से 3 हज़ार लोग खाना खाते थे.

3- नेपाल भूकंप

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नेपाल में आये भयंकर भूंकप के वक़्त भी 'खालसा एड' के वॉलेंटियर्स ने न सिर्फ़ हज़ारों लोगों की खाने-पीने, रहने और मेडिकल ज़रूरतों को पूरा किया, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी की. इस दौरान इस संस्था के लोगों ने अपनों से बिछड़ गए कई बच्चों को मानव तस्करी से भी बचाया. इस दौरान इन लोगों ने हज़ारों की संख्या में खाने के पैकेट लोगों तक पहुंचाए थे, जिसमें पीने का साफ़ पानी, दवाएं, बच्चों के लिए दूध सहित कपड़े पीड़ितों को मुहैया कराये थे.

4- रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद

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बर्मा में रोहिंग्याओं पर हुए अत्याचार के बाद 'खालसा एड' के कई वॉलेंटियर्स ने बांग्लादेश पहुंच कर शरणार्थियों की मदद की थी. दुनियाभर के लोगों ने उनके इस काम की सराहना की. वहीं भारत में कुछ लोगों ने इन्हें जमकर ट्रोल भी किया. ये लोग इनको याद दिलाना नहीं भूले कि एक सिख संगठन कैसे मुसलमानों की मदद कर रहा है, जबकि सिख धर्म गुरुओं और मुसलमानों का पिछला इतिहास ठीक नहीं रहा है. सोशल मीडिया पर इन्हें आतंकवादियों का समर्थक बता दिया गया जिस पर 'खालसा एड' को सफ़ाई भी देनी पड़ी.

5- सीरिया

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खालसा एड ने आतंकवाद से तबाह हुए सीरिया जाकर भी लोगों की मदद की. जिन इलाकों में जाने से सेना भी घबरा रही थी, इन लोगों ने वहां पहुंचकर घायलों को राहत शिविरों तक पहुंचाने का नेक काम किया. इस दौरान इन लोगों ने न सिर्फ़ कई लोगों की जान बचाई, बल्कि उन तक खाने-पीने से लेकर मेडिकल सुविधाएं भी पहुंचाई. इस संस्था ने मां-बाप से बिछड़ चुके कई बच्चों की ज़िंदगियां संवारने का काम भी किया.

6- जम्मू-कश्मीर बाढ़

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साल 2014 में जम्मू-कश्मीर में आयी भयंकर बाढ़ के वक़्त भी 'खालसा एड' ने शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई थी. उस वक्त अमृतसर के हरमंदर साहिब से लंगर हवाई मार्ग से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया गया था. बाढ़ प्रभावित जम्मू, श्रीनगर, पुलवामा, सहित अनंतनाग जैसे इलाकों में जाकर इन वॉलेंटियर्स ने जान की परवाह किए बगैर ज़रूरतमंदों की सेवा की.

इसके अलावा भी 'खालसा एड' ने सुनामी और गुजरात भूकंप के वक़्त भी पीड़ितों की मदद की थी. जब कभी भी दुनियाभर में कोई बड़ी आपदा आती है, तो इस संस्था के लोग बिना कुछ सोचे ही मदद को पहुंच जाते हैं. 'खालसा एड' ज़रूरतमंदों के खाने, पीने, रहने और मेडिकल ज़रूरतों को ही पूरा नहीं करता, बल्कि उनके उज्जवल भविष्य के लिए भी काम करता है.