देश के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में आगरा का नंबर दूसरा है. यहां रहने वाले लोगों की ज़िंदगी में दिन प्रतिदिन उतना ही प्रदूषण घुल रहा है, जितना कि यमुना में गंदगी. दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल के पास से गुज़रने वाली इस नदी का पानी एकदम काला हो चुका है. इसके आस-पास मौजूद जंगल भी धीरे-धीरे गायब हो गए हैं और अब इसका असर ताज पर दिखने लगा है. प्रदूषण के चलते अब ताजमहल का रंग भी बदलने लगा है, जिसे लेकर देश की शीर्ष अदालत हैरान और परेशान है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए इसे रोकने के लिए उचित कदम उठाने के लिए कहा . केंद्र सरकार जो इतने दिनों तक चिर निद्रा में सोई हुई थी, अदालत की डांट खाकर जागी है. अब ख़बर आई है कि केंद्रीय संस्कृति और पर्यावरण मंत्री महेश शर्मा ताजमहल में लगे संगमरमर के पत्थरों के असली रंग की जांच करने जा रहे हैं.

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इसके लिए एक वैज्ञानिकों की एक टीम गठित की जाएगी. उनके द्वारा जो रिपोर्ट सौंपी जाएगी, उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा. बीते रविवार को ताजमहल के संरक्षण के लिए पर्यावरण मंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ताजमहल की Colour Stereography कराने का फै़सला लिया गया.

इसके तहत ताजमहल के पुराने और नए फ़ोटोज़ की स्टडी कर ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आख़िर ताजमहल किस कलर का था और अब इसके रंग में आ रहे बदलाव का कारण क्या है?

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गौरतलब है कि पर्यावरणविद मेहता ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने पूछा था कि आगरा में बढ़ते प्रदूषण से ताजमहल को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से 1 महीने पहले जवाब तलब किया था. तब से लगातार सुप्रीम कोर्ट इस पर अपनी नज़र बनाए हुए है. अब देखते हैं कि ये जांच समिति क्या रिपोर्ट पेश करती है? उम्मीद है कि प्रेम की इस निशानी को बचाने के लिए वक़्त रहते उचित कदम उठाए जाएंगे.

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