इंटरनेट और सोशल मीडिया ने इंसान की ज़िन्दगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही मुश्किल भी बना दिया है. इन दिनों सोशल मीडिया फ़ेक न्यूज़ को लेकर चर्चा में है. फ़ेसबुक, WhatsApp, Tiwtter जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर फ़ेक न्यूज़ फैलाकर कुछ शरारती तत्व अराजकता फ़ैलाने का काम कर रहे हैं. जिसकी वजह से देशभर में कई बेगुनाह लोग मारे जा चुके हैं.

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आये दिन हमारे फ़ेसबुक टाइमलाइन और WhatsApp मेसेंजर पर कई तरह की फ़ेक न्यूज़ और वीडियोज़ आती रहती हैं. ये कोई और नहीं, बल्कि हमारे दोस्त, रिश्तेदार और जान पहचान के लोग ही भेजते हैं. हम भी इन फ़ेक वीडियोज़ पर भरोसा कर लेते हैं और झट से ग्रुप के अन्य लोगों को फ़ॉरवर्ड कर देते हैं. जिसको हमने भेजा वो किसी और को भेजते हैं. इस तरह एक वीडियो एक दिन में कम से कम लाखों लोगों तक पहुंच जाता है.

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक फ़ेक वीडियो के कारण पिछले दिनों बेंगलुरु में भीड़ ने एक शख्स को बच्चा चोर समझकर उसकी जान ले ली. उस बेगुनाह को बांधा गया, सड़कों पर घसीटा गया और पीट-पीटकर मार डाला गया. उस भीड़ ने उन WhatsApp मैसेजेस के बाद ये कदम उठाया, जिनमें कहा गया था कि इलाक़े में बच्चों को चुराने वाला गैंग घूम रहा है. जब ये शख़्स वहां बच्चों को मिठाइयां और चॉकलेट बांट रहा था, तो लोगों ने उसे बच्चा चोर समझकर मार डाला. बंगाल और असम में भी भीड़ कुछ इसी तरह की घटना को अंजाम दे चुकी है. वहीं मई में भी इस तरह की 3 घटनाएं हो चुकी हैं.

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WhatsApp से फ़ैली अफ़वाहों की वजह से तमिलनाडु में 24 घंटे के अंदर 2 लोगों को मार डाला गया. आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में कम से कम 5 लोगों की जान WhatsApp के फ़ेक मैसेज की वजह से हो चुकी है. जबकि असम में भी ऐसी ही शर्मनाक घटना घट चुकी है.

साल 2017 में पश्चिम बंगाल में हुए दंगों के दौरान WhatsApp पर एक महिला के साथ छेड़छाड़ की तस्वीर ख़ूब वायरल हुई. जिसकी वजह से दो समुदायों के बीच हिंसक झड़पें भी हुई. लेकिन बाद में जांच में पता चला कि वो वीडियो किसी भोजपुरी फ़िल्म का सीन था.

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आज लोग फ़ेसबुक और WhatsApp पर फ़ैल रहे इन फ़ेक वीडियोज़ से इतने ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं कि किसी की भी जान लेने को तैयार हैं. देश भर में लगातार बढ़ रही इन घटनाओं के बाद सरकार ने फ़ेसबुक की स्वामित्व वाली कंपनी WhatsApp को कड़ी फटकार लगाई.

IT मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने कहा, 'इस तरह के फ़ेक वीडियो और कंटेंट को WhatsApp पर बार-बार शेयर किया जाना भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. अब मंत्रालय ने इस तरह की अफ़वाहों के ज़रिये होने वाले नुकसान पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर दिया है. अगर इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो सरकार और भी कड़े कदम उठाएगी'

सरकार की चेतावनी के बाद WhatsApp ने इस समस्या से निजात पाने के लिए एक साथ मिलकर आगे आने की अपील की. इसके साथ ही एक विज्ञापन के माध्यम से यूज़र्स को फ़ेक न्यूज़ की पहचान करने के लिए कुछ अहम जानकारियां भी दी हैं.

1- किसी भी वीडियो या कंटेंट को रिसीव करते समय उसकी सत्यता की जांच के बाद ही फ़ॉरवर्ड करें.

2- जिन अहम घटनाओं को लेकर आप चिंतित हैं उसके बारे में गहन अध्यन कर लें.

3- फ़ेक न्यूज़ का पता लगाने के लिए आप उस कंटेंट की स्पेलिंग चेक करें, आपको कई मिस्टेक्स मिल जाएंगी.

4- फ़ेक न्यूज़ के सोर्स का पता लगाएं और फ़ेक फ़ोटो की जांच करें, ताकि उसकी सत्यता का पता चल सके.

5- अगर किसी एक नंबर से इस तरह की फ़ेक न्यूज़ मिल रही हैं, तो उस नंबर को ब्लॉक करें.

6- इस तरह की फ़ेक न्यूज़ से कई लोगों की जान जा चुकी है इसलिए आप अपनी ज़िम्मेदारी को समझें.

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इसके बाद WhatsApp ने फ़ेक न्यूज़ से निजात पाने के लिए एक नया टूल पेश किया है. जिसका नाम Suspicious Link Detection है. इस नए फ़ीचर के कारण यूजर्स फ़ेक न्यूज़ को पहचान पाएंगे. फ़िलहाल फ़ीचर एंड्रॉइड बीटा वर्जन पर टेस्टिंग मोड में है. जबकि गूगल प्ले स्टोर पर 2.18.204 बीटा वर्जन के साथ डेवलपमेंट स्टेज पर है. कुछ ही दिनों में ये एडवांस फ़ीचर सभी यूज़र्स के लिए उपलब्ध होगा.

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WABetainfo वेबसाइट के अनुसार, अगर WhatsApp को कोई भी लिंक फ़ेक लगता है, तो वो उसे Suspicious Link का लेबल दे देगा. इसके बाद इस लिंक को जिस किसी को भी फ़ॉरवर्ड करेंगे, तो उसके साथ “This link contains usual characters. It may be trying to appear as another site.” वार्निंग भी मिलेगी.

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WhatsApp के प्रवक्ता ने कहा, 'हम अपने यूज़र्स की सुरक्षा के लिए फ़िक्रमंद हैं. इस समस्या के लिए हम भारत में एकेडमिक एक्सपर्ट के साथ काम कर रहे हैं, ताकि पता चले कि किस तरह ग़लत चीज़ें फैलाने के लिए इस प्लेटफ़ार्म का इस्तेमाल किया जा रहा है.'

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