जब कभी भी देश मुसीबत में होता है फ़रिश्ते बनकर भारतीय सेना के जवान हमारी रक्षा करते हैं. बाढ़ हो या भूकंप अपनी जान पर खेलकर ये जवान हमें हर मुसीबत से बचाकर ले जाते हैं. इसीलिए भारतीय सेना का हर एक जवान देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. इन सैनिकों के अदम्य साहस के कारण ही आज हम अपने घरों में सुरक्षित हैं.

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सेना के जवानों के साहस का एक ऐसा ही नज़ारा उत्तराखंड के एक गांव में भी देखने को मिला. दरअसल, पिछले हफ़्ते उत्तराखंड के चमोली ज़िले के मलारी इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते इस गांव तक पहुंचने वाला पुल बह गया. जिसकी वजह से इस गांव के लोग जहां के तहां फ़ंस गए. ऐसे हालात में इन लोगों को सुरक्षित इनके घरों तक पहुंचाने के लिए किसी करिश्मे की ही उम्मीद थी.

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दरअसल, इस पुल के बह जाने से इस गांव के 40 परिवार वहां फंस गए. ऐसे में भारतीय सेना की फ़ील्ड इंजीनियर कंपनी इस जगह पर पहुंची. इन जवानों ने बिना किसी डर के उफ़ान मारती इस नदी के ऊपर एक फ़ुटब्रिज बना डाला. सबसे बड़ी बात ये है कि इस पुल को बनाने में इन जवानों को सिर्फ़ 36 घंटे का समय लगा.

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब सेना के जवानों ने कम समय में इस तरह के पुल का पुनर्निर्माण करने में मदद की हो. मुंबई में एल्फ़िंस्टन पुल त्रासदी को हम कैसे भूल सकते हैं. केदारनाथ हादसे के वक़्त भी सेना के जवानों ने अपनी जान पर खेलकर हज़ारों लोगों की जान बचाई थी. तब भी जवानों ने कम समय में कई ऐसे पुल बनाये थे.

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चाहे सीमा पर कोई मुसीबत हो या फिर कोई प्राकृतिक आपदा भारतीय सेना हमेशा हमारी सेवा के लिए हाज़िर रहती है. इसीलिए देश के हर नागरिक का भी कर्तव्य बनता है कि वो भी इन वीर जवानों की मदद के लिए आगे आएं.

जैसे लद्दाख के सोनम वांगचुक ने सियाचिन में तैनात सेना के सैनिकों के लिए Eco-Friendly मिट्टी के गर्म सोलर झोपड़ियां बनाई हैं.

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