आया हूं तो कुछ तो चुरा कर ही जाऊंगा...

खानदानी चोर हूं मैं, खानदानी...

मोगैम्बो का भतीजा, गोगो!

क्यों याद आया कुछ? क्या कहा नहीं आया? ऐसे-कैसे, ये तो ग़लत बात है. इस डायलॉग को कोई कैसे भूल सकता है? ख़ैर, कोई बात नहीं, हम ही बता देते हैं. ये डायलॉग फ़िल्म अंदाज़ अपना-अपना का है. मुझे खुद नहीं पता मैंने ये फ़िल्म कितनी बार देखी है. भले ही इस फ़िल्म के साथ ब्लॉकबस्टर का नाम न भी जुड़ा हो, लेकिन मेरे लिए ये अभी तक की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर है. और मुझे क्राइम मास्टर गोगो बहुत पसंद है.

फ़िल्म के हर किरदार की अपनी अलग ख़ासियत है. चाहे वो अमर-प्रेम (आमिर-सलमान) की बेमेल जोड़ी हो, करिश्मा-रवीना (रवीना टंडन-करिश्मा कपूर) की मासूमियत, तेजा सेठ, या मिस्टर बजाज, जो घड़ी की सूइयों से भी ज़्यादा समय के पाबंद हैं (परेश रावल), रॉबर्ट, विनोद उर्फ़ भल्ला, इनके अलावा और भी कई पात्र हैं फ़िल्म के जिन्होंने कुछ देर के रोल में ही अपनी छाप छोड़ी. पर फिर भी मेरा फ़ेवरेट तो क्राइम मास्टर गोगो (शक्ति कपूर) ही है.

लोगों को फ़िल्म में अमर-प्रेम या करिश्मा-रवीना पसंद आयी होंगी, लेकिन वो क्या है ना कि क्राइम मास्टर गोगो मुझे बहुत ही ज़्यादा पसंद है बाई गॉड... मैंने जितनी बार भी ये फ़िल्म देखी है, मुझे हर बार पहले से ज़्यादा प्यार हो गया क्राइम मास्टर गोगो से. मेरे लिए तो गोगो ही हीरो है, वो ही विलेन है और वो ही कॉमेडियन. मुझे उसका एक-एक डायलॉग ज़ुबानी याद है. अगर आपको ये लग रहा है कि गोगो के लिए मेरा प्यार अंधा है, तो अंधा ही सही. पर सच मानिये ऐसे ही नहीं वो मुझे पसंद है, इसके पीछे कई सारी बातें है उसकी जब आप मेरे प्यार की वजह जानेंगे तो हो सकता है कि आपको भी उससे प्यार हो जाए...

एक हीरो से ज़्यादा धमाकेदार एंट्री थी गोगो साब की.

और एंट्री के साथ ही उनका ये डायलॉग, क्राइम मास्टर गोगो नाम है मेरा... बाई गॉड सुनते ही मज़ा आ जाता है.

एक हीरो की तरह ही जब वो बोलता है कि अब आया हूं तो कुछ तो लूट कर जाऊंगा... सच में कितनी आध्यात्मिक सोच है बन्दे की अगर वो कहीं पहुंचा है, तो वहां से खाली हाथ नहीं लौटेगा, कुछ तो लेकर ही जाएगा. क्या आपने सोचा है कभी ऐसा.

मास्टर गोगो भोला तो इतना है कि थोड़ी सी तारीफ़ से ही उसके चेहरे पर ख़ुशी आ जाती है, अब इस डायलॉग को ही देख लीजिये... जब अमर उसकी झूठी तारीफ़ करते हुए बोलता है, आप तो पुरुष नहीं... महापुरुष हैं, और वो मासूम मान भी लेता है.

वो इतना Cute है कि पूछो मत, जब प्रेम ने अमर के सामने गोगो की बेइज़्ज़ती करते हुए बोला कि गोगो साब इडियट, बेवकूफ़, गधे... शक़ल से लगते हैं, लेकिन हैं नहीं! तो गोगो उसको समझा ही नहीं, तो वो तो मासूम हुआ न, क्यों उस बेचारे को विलेन बना दिया? अगर विलेन बोलना ही है, तो मासूम विलेन ही बोल दो...

पर कभी-कभी वो समझदार भी है, जैसे जब उसे समझ आया कि अमर और प्रेम उसकी चिकाई (खिंचाई) कर रहे हैं, तो तुरंत ही उसने पूछ लिया...

छोटी-छोटी चीज़ों में अपनी जीत की ख़ुशी मनाने वाला, जब अमर की हाथ की गन में गोली ख़त्म हो जाती है, तो वो ख़ुशी से नाचने लगता है, धाकि तिकी धाकि तिकी तां... इसमें एक ही गोली थी! जी हां ऐसा ही है Cute गोगो.

फ़ैशन सेन्स भी बढ़िया है उसका, आपने किसी विलेन को घाघरा (प्रेम के शब्दों में) पहने हुए देखा है? नहीं न, वो था तो गुंडई करने के लिए, पर उसका फ़ैशन सेन्स भी उम्दा था.

ये तेजा तेजा क्या है, ये तेजा तेजा... हर बात को कन्फ़र्म करने की अदा तो निराली है क्राइम मास्टर गोगो की.

समय बर्बाद करने में विश्वास नहीं करता है गोगो... तभी तो जब अमर-प्रेम गोदाम पहुंचकर सबसे नमस्ते करने लगे तो, उसने तुरंत बोला कि क्या नमस्ते नमस्ते, दावत में आए हो क्या?

यानि की जिस काम के लिए आये हो वो करो. बताओ हीरे कहां हैं...

और क्या कहूं मैं गोगो जी के बारे में सिर्फ़ इतना ही कहूंगी, सुनो-सुनो दुनिया के लोगों सबसे बड़ा है, मिस्टर गोगो!

देखा है कभी ऐसा विलेन, जो विलेन होकर भी हीरो की तरह काम करता है. फ़ालतू ही उसे विलेन बना दिया है.

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