आप खुद ही परेशान नज़र आते होंगे जब...

आंगन में चहकती-फुदकती गौरैया नजर नहीं आती.

गिद्ध दिखाई नहीं देते.

कोयल की कूक भी अब अमराई में कम ही सुनाई देती है.

कुछ लोगों को पक्षियों के बारे में लिखी गईं ये लाइनें सिर्फ़ एक कहावत के रूप में नज़र आ सकती हैं, लेकिन ये आज के हाईटेक युग की एक गंभीर समस्या है. शहरों में पक्षियों की घटती संख्या को लेकर परेशान वैज्ञानिकों ने इसके लिए मानवीय गतिविधियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

सच में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, कि पक्षियों की विलुप्त हो रही प्रजातियों के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं, लेकिन आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिनका पक्षियों के प्रति लगाव देखकर दिल ख़ुश हो जाता. ऐसे ही लोगों में शुमार में हैं मुंबई की अरुंधति म्हात्रे.

पेशे से IT प्रोफ़ेशनल, अरुंधति मुंबई के पवई इलाके में रहती हैं. इन्हें पक्षियों से इतनी मोहब्बत है कि इन्होंने अपने घर में ही 100 पक्षियों और 350 तितलियों का आशियाना बना रखा है.

बेहद ख़ुश मिज़ाज स्वभाव की अरुंधति इन छोटे-छोटे पक्षियों को अपने बच्चे की तरह प्यार करती हैं. The Logical Indian से बातचीत के दौरान अंरुधति कहती हैं कि 'शहरी लोग प्रकृति के साथ कनेक्टिविटी खोते जा रहे हैं और वो ऐसा करके प्रकृति के साथ रिश्तों को फ़िर से जीवंत करना चाहती हैं '. 2013 में उन्होंने Bird Feeders And Shelters की स्थापना की. उनकी इस पहल का मुख़्य आकर्षण 'Arenya' है. बीते चार सालों से वो सैंकड़ों पक्षियों का पालन-पोषण कर रही हैं.

अंरुधति के मुताबिक, उनके एक दोस्त ने उन्हें Shelter गिफ़्ट किया था, उसने उन्हें एक तितली पालने के लिए भी बोला. इस दौरान उन्होंने पेड़-पौधे और पशु-पक्षियों के बारे में बहुत कुछ सीखा और धीरे-धीरे उन्हें ये काम अच्छा लगने लगा.

अंरुधति की बालकनी में पौधों की विभिन्न प्रजातियां हैं, जैसे कि Shoe Flowers, Ixora, Sadaphuli, Marigold, Plumbago, और सनबर्ड्स के लिए Nectarine.

'Arenya' पहल के जरिए, अरुंधति प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम कर रहीं हैं. इस अभियान का यही मकसद है कि देश के हर दूसरे घर में पक्षियो के लिए जगह ज़रूर होनी चाहिए.

Source : thelogicalindian