साइबर वायरस ‘रैन्समवेयर वॉनाक्राई’ की वजह से इस समय दुनिया के कई देशों में हड़कंप मचा हुआ है. इस खतरनाक वायरस का असर दुनिया के 150 देशों पर पड़ा है. इससे साइबर सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं. देश में भी कुछ जगहों पर इसका असर पड़ा है.

इसे अब तक का सबसे खतरनाक साइबर अटैक कहा जा रहा है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब दुनिया को किसी खतरनाक वायरस से जूझना पड़ा हो.

I Love You

दुनिया में प्यार का प्रतीक आई लव यू साइबर दुनिया में एक वायरस का रूप धारण किए हुए था.

लोग इस वायरस से सबसे पहले सन 2000 में मुखातिब हुए थे. Email से आने वाले इस वायरस की सब्जेक्ट लाइन 'I Love You' होती थी और अटैचमेंट 'Love letter for you' होता था.

ये वायरस मेल ओपन करते ही एक्टिव हो जाता है और अपने आप ही बढ़ने लगता है. इसके बाद ये आपके मेल बॉक्स में मौजूद 50 लोगों को वही मैसेज भेज देता है, जिससे यह आपके सिस्टम में इंस्टॉल हुआ था. यह वायरस पूरे मेल और सर्वर सिस्टम को क्रैश कर देता है और कई बैंकिंग सिस्टम को भी खत्म कर चुका है.

My Doom

2004 में आया 'My Doom' आपके लिए बेहद परेशानी भरा हो सकता है. यह वायरस “mail transaction failed” जैसे सब्जेक्ट के साथ आता है. यह मेल की एड्रेस बुक में ट्रांसफ़र होकर डाटा क्रेश कर देता है.

Storm Worm

इंटरनेट पर जनसंख्या बढ़ने के साथ ही वायरस के भी नए तरीके दिखाई देने लगे. स्टॉर्म वॉर्म नाम का ये वायरस फ़ोन में भी प्रवेश कर सकता था. 2006 में दुनिया का इससे पहली बार सामना हुआ था. यह वायरस मेल में आने वाली लिंक पर क्लिक करते ही फोन में इन्स्टॉल हो जाता है. जैसे ही यह सिस्टम में डाउनलोड होता है, हैकर्स आपके कम्प्यूटर पर कमांड कर इंटरनेट के द्वारा Spam मेसेज भेज सकते हैं.

Conficker वायरस

सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता को देख हैकर्स ने भी अब अपना टारगेट सोशल मीडिया बना लिया है. ये खतरनाक वायरस Windows OS पर चलने वाले कंप्यूटर सिस्टम पर प्रभाव डालता है और ये अब तक करोड़ों सरकारी ऑफ़िस, बिज़नेस और होम कम्प्यूटर्स को प्रभावित कर चुका है. 2009 में आने वाले इस वायरस का इस्तेमाल आर्थिक डाटा और जानकारियों को चुराने के लिए किया जाता है. यह खतरनाक वायरस लोकल नेटवर्क से कनेक्ट दूसरी डिवाइसेज़ को भी Infect कर सकता है.

Melissa

फ्लोरिडा की एक डांसर के नाम पर रखा गया ये वायरस भी 'आई लव यू' की तरह ही काम करता है. ये वायरस भी अपने आप Replicate हो जाता है और आपके मेल बॉक्स में मौजूद 50 लोगों को वही मैसेज भेज देता है, जो आपके सिस्टम में आया था. ये जिस भी नेटवर्क पर अटैक करता है, उसे ओवरलोड कर देता है. एक साथ कई मेल आपकी आईडी से जाने लगते हैं. 1999 में इसकी शुरुआत हुई थी.

Trojan Horse

ये वायरस सॉफ्टवेयर से आता है. 2002 में पहली बार सामने आने वाला ये वायरस, कम्प्यूटर में डाउनलोड होते ही पूरे सिस्टम को कंट्रोल कर लेता है. इस वायरस से इन्फेक्टेड सिस्टम पर हैकर्स आपके फाइल मैनेजर, रजिस्ट्री एडिटर, वेबकेम, पावर ऑप्शन, रिमोट आईपी स्कैनर पर पूरा कंट्रोल कर लेते हैं. ये कुछ ही सेकेंडों में कॉपी होकर हज़ारों फाइल बना लेता है.

CIH

ये दुनिया के सबसे पुराने वायरसों में शुमार है. दुनिया इस वायरस से सबसे पहले 1988 में रूबरू हुई थी. हार्ड ड्राइव से आने वाला ये वायरस हार्ड ड्राइव को क्रैश कर देता है. इसके अलावा ये सिस्टम की BIOS चिप को ओवरराइट कर देता है.

Ransomeware Wannacry वायरस

इंटरनेट की दुनिया में ये सबसे भयानक वायरस कहा जा रहा है. यह किसी भी तरह आपके कंप्यूटर को हैक करने की कोशिश करता है. एक बार यह जब कामयाब हो जाता है तो हैकर्स इसको हटाने के लिए फिरौती की मांग करते हैं. इस वायरस के सक्रिय हो जाने पर आपका कंप्यूटर पूरी तरह से लॉक हो जाता है. खास बात यह है कि हैकर्स फिरौती की रकम बिटक्वाइंस के ज़रिए देने की मांग करते हैं.

Tyupkin

2015 में रूस का एक टीनेजर ATMs के लिए खतरा बन गया था. 19 साल के इस नौजवान ने एक ऐसा वायरस बनाया था, जो कैश मशीन्स को Maintainence मोड में डाल देता था और मशीन से कैश निकलने लगता था. गुजरात के सूरत में एटीएम को लूटने की घटना भी सामने आई थी, हालांकि भारत पर इसका असर बेहद कम रहा.

फ़ेसबुक वायरस

Source: amazonnews

फ़ेसबुक वायरस 2014 से ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इस वायरस से प्रभावित फ़ेसबुक अकाउंट, न चाहते हुए भी अपने फ़ेसबुक फ्रेंड्स की प्रोफ़ाइल पर अश्लील वीडियो या मेसेज भेजने लगता है.

यह वायरस, यूज़र की जानकारी के बगैर ही उसके फेसबुक अकाउंट से दूसरे यूज़र के इनबॉक्स में मेसेज भेज देता है. आम तौर पर ये मेसेज एक अश्लील वीडियो या यूज़र की तस्वीर लगी वीडियो  होती है. जैसे ही इस मैसेज पर क्लिक किया जाता है, ये वायरस यूज़र के फ़ेसबुक अकाउंट को  इंफेक्ट कर देता है. इस पर क्लिक करते ही यूज़र के फ़ेसबुक फ्रेंड्स के इन-बॉक्स और टाइमलाइन पर ये वीडियो शेयर होने लगती है. लॉग इन, फ़ाइनेंशियल डाटा और ऐसे ही ज़रुरी जानकारियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस वायरस से सितंबर 2016 में 8 लाख लोग प्रभावित हुए थे.