साफ़-सुथरा और स्वच्छ शौचालय किसे पसंद नहीं होता. लोग अपने टॉयलेट में उसकी सफ़ाई और Comfort के हिसाब से समय बिताते हैं. कई लोग तो घर में टॉयलेट को बड़े मन से बनवाते हैं. आखिर क्यों न बनवाएं, ये भी तो ज़रूरी है. विद्या बालन ने भी कहा है कि जहां सोच वहां शौचालय, तो इस हिसाब से अच्छी सोच के लिए साफ़ और अच्छा टॉयलेट होना भी ज़रूरी है. खैर, ये तो थी मज़ाक की बात, अब असली बात पर आते हैं. आपने अपने जीवन में कई तरह के टॉयलेट देखे होंगे, रेल वाले अजीब टॉयलेट, हॉस्पिटल वाले बदबूदार टॉयलेट, सार्वजनिक जगहों पर बनाये गये गंदे टॉयलेट और होटल्स वाले साफ़-सुन्दर टॉयलेट. पर आज हम जिस टॉयलेट के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, उसके बारे में कभी आपने सोचा भी नहीं होगा. साइबेरिया के इस टॉयलेट को दुनिया का सबसे ख़तरनाक टॉयलेट भी कहा गया है.

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ये बात तो तय है कि प्रेशर जगह नहीं Urgency देखता है. साइबेरिया में Altai की पहाड़ियों के चोटी पर वैज्ञानिकों ने अपने यूज़ के लिए एक ख़ास टॉयलेट बनाया है, जो हवा में 8,500 फीट की ऊंचाई पर है. यहां ऊपर वैज्ञानिकों के काम करने के लिए एक लैब बनाई गई है, जिसके बाहर किनारे पर ये शौचालय बनाया गया है. लकड़ी का बना ये टॉयलेट चैम्बर वैज्ञानिकों को ऐसा अनुभव दिलाता है, जैसे वो दुनिया के दूसरे छोर पर बैठ कर हलके हो रहे हों.

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चलिए अगर आपको अभी तक ऐसा लग रहा था कि हम बस ऊंचाई की वजह से इसको दुनिया का सबसे ख़तरनाक टॉयलेट बता रहे थे, तो आप बिलकुल गलत हैं. जहां ये टॉयलेट बना है, वहां तापमान -50 डिग्री सेंटीग्रेट रहता है. जी, बिलकुल सही सुना आपने! -50 डिग्री सेंटीग्रेट. अब आप समझ ही गये होंगे कि वैज्ञानिकों को अपने लैब से निकल कर वहां जाने में कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा!

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इस ख़तरनाक टॉयलेट की एक झलक देखिये:

एक बात और, यहां आने के बाद आपको हलके होने में ज़्यादा टाइम नहीं लगेगा. अब इतनी ऊंचाई पर होने के बाद सब तो अपने आप ही हो जाता है. तो क्या आप भी इतने हिम्मतवाले हैं कि इस टॉयलेट में जा सकें, हमें कमेंट-बॉक्स में बताएं.