दुनिया इतनी भी ख़ूबसूरत नहीं है, जितना हम उसे समझते हैं, या हमें समझाया जाता है. आजकल देश के हालात बहुत ज़्यादा 'मज़ेदार' हैं. कहीं किसी के साथ हुई छेड़छाड़ का वीडियो अपलोड किया जा रहा है, तो कहीं देश में न्यायाधीश, मोर-मोरनी के शारीरिक संबंधों पर प्रकाश डाल रहे हैं. बात बस इतनी सी है कि हम ज़रूरी मुद्दों पर ही बात करने से कतराते हैं. वो मुद्दे जो हमारी ज़िन्दगी से जुड़े हैं.

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बाल यौन शोषण. इससे जुड़ी कोई न्यूज़ आती है तो लोग गालियों की बौछार करने में लग जाते हैं, पर इस समस्या के बारे में बात नहीं करते. ये समस्या जितनी गंभीर है, उसे हम उतनी गंभीरता से नहीं लेते. हम अपने बच्चों को बड़ों का आदर करना, तो सीखा देते हैं पर उन्हें संभावित खतरों के बारे में नहीं बताते. इसमें माता-पिता का भी पूरा दोष नहीं है, क्योंकि किसी भी बलात्कारी के माथे पर नहीं लिखा होता कि वो बलात्कारी है. बच्चों का यौन-शोषण भारत में बहुत आम है. कई बार तो बच्चों को ये पता भी नहीं होता कि उनके साथ कुछ गलत हो रहा है. पर उनकी स्मृति में ये बात रह जाती है. यौन शोषण से पीड़ित एक बच्ची का ख़त मुझे मिला. इस ख़त ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया.

प्रिय पापा,

पापा, कैसे हो आप? मां से तो आप रोज़ बात करते हो और मुझसे नहीं करते. गंदे पापा! अगली बार आना तो किताबें ज़रूर ले आना, भूलना मत. वरना मैं और ज़्यादा गुस्सा जाऊंगी. मां भी मुझसे प्यार नहीं करती और आप भी. आप बाहर रहते हो और मां भी छोटू के पीछे लगी रहती हैं. आपने Letters From A Father To His Daughter दी थी ना, उसे मैंने पढ़ना शुरू कर दिया है. भारत के बारे में बहुत कुछ है उसमें.

मैं स्कूल भी जाती हूं और गेम्स भी खेलती हूं. अभी यूनिट टेस्ट के पेपर मिले, मैं First तो नहीं आई, पर अच्छे नंबर आए हैं.

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सबकुछ ठीक है पापा, मैं ठीक नहीं हूं. कुछ है जो मुझे अंदर ही अंदर बहुत परेशान कर रहा है. कई बार में रात में नींद में ही चीखने लगती हूं, तब मां आकर सुला देती हैं. कई बार मैं डर के उठ जाती हूं. कई बार तो नींद ही नहीं आती. पता नहीं क्यों? या फिर शायद मुझे पता है.

पापा वो जो राजू भईया हैं ना, जो हमारे घर में काम करते हैं, मुझे उनके साथ खेलना अच्छा नहीं लगता. मम्मी जब छोटू को प्ले स्कूल से लेने या फिर किसी काम से जाती हैं, तभी वो मेरे साथ खेलने आते हैं. प्ले स्कूल से वापस आने में 2 घंटे लग जाते हैं और मम्मी राजू भईया को मेरा ध्यान रखने के लिए मेरे साथ छोड़ के जाती हैं.

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जब माली चाचा, काम में लग जाते हैं न, तब राजू भईया मेरे साथ आंख-मिचौनी खेलते हैं. पर पापा हर बार चोर मुझे ही बनाते हैं और आंखों पर पट्टी बांध देते हैं. पर उनकी आंख-मिचौनी आसान होती है, क्योंकि ये खेल हम हमेशा ऊपरवाले कमरे में ही खेलते हैं. वहां बहुत अंधेरा रहता है, पर मुझे राजू भईया को ढूंढने के लिए ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती, वो मेरे पास ही खड़े रहते हैं.

पापा, राजू भईया की आंख-मिचौनी बहुत अलग है. पहली बार जब मैं उनके साथ ये खेल खेलने गई थी तब उन्होंने कहा था कि ये खेल बड़े ही खेलते हैं और मैं बड़ी हो गई हूं इसलिए मुझे भी वो खेल खेलना चाहिए. मुझे वो ऊपरवाले कमरे में ले गए थे पापा और मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी थी. मैं खुश थी कि मैं भी बड़ी हो गई हूं. उन्होंने मुझे दीवार की तरफ़ मुंह करके हाथ ऊपर करके खड़े होने को कहा. इसके बाद उन्होंने मुझे शोर न करने की हिदायत दी और कहा की चुप रहना, वरना खेल ख़त्म हो जाएगा.

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मुझे बड़ों का खेल खेलने का मन था इसीलिए मैंने उन्हें शोर न करने का वादा किया. राजू भईया ने मेरी फ्रॉक की चेन खोली और मेरी फ्रॉक उतार दी. पापा, फिर उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और मेरे गालों को जीभ से छूने लगे. मुझे गुटखे की बदबू अच्छी नहीं लग रही थी, इसलिए मैंने उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा. पर राजू भईया मेरी बात सुन ही नहीं रहे थे.

मम्मी की गाड़ी का हॉर्न सुनकर उन्होंने मुझे फ्रॉक वापस से पहनने को कहा और कहा कि हम दूसरे दिन भी ये खेल खेलेंगे. मैं मम्मी के पास जाकर उनको खेल के बार में बताने वाली थी पर राजू भईया ने कहा कि अगर मम्मी को बता दिया तो मम्मी खेलने नहीं देंगी. मैंने उनकी बात मान ली.

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अगले दिन जब मम्मी शॉपिंग करने गईं तो राजू भईया फिर से मुझे खेलने के लिए लेकर चले गए. मेरी आंखों पर फिर से पट्टी बांध दी और मेरी फ्रॉक उतार दी, इस बार मुझे उस ऊंचे वाले टेबल पर बिठा दिया. राजू भईया ने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी पैंट उतार दी. उसके बाद अपने पेंट से एक अजीब सी चीज़ निकाली और ज़बरदस्ती मेरा हाथ उस पर रख दिया. मैंने पूछा कि ये क्या है तो उन्होंने मुझे उसे सहलाने को कहा. पापा मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.

फिर उन्होंने उस अजीब सी चीज़ को मेरे सुसु वाली जगह पर रख दिया और मेरा मुंह बंद कर दिया.

पापा मुझे दर्द हो रहा था पर मेरा मुंह बंद कर दिया था उन्होंने. मैं रो रही थी पर वो मुझे नहीं छोड़ रहे थे. कुछ देर बाद उन्होंने मुझे छोड़ा और कपड़े पहनाकर अपने रूम में जाने को कहा. मम्मी तब तक नहीं आईं थी. मुझे बहुत गंदा लग रहा था पापा और वो गुटखे की बदबू अब मेरे मुंह से भी आ रही थी.

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मैं डर गई कि मम्मी डांटेंगी, इसीलिए मैंने ब्रश कर लिया और नहा लिया. मम्मी ने पूछा भी था कि मैं क्यों नहाई, मैंने मम्मी से झूठ बोला कि गर्मी लग रही थी.

पापा, राजू भईया 2 हफ़्तों से रोज़ मेरे साथ यही खेल खेलते हैं. अब तो मैं चीख भी नहीं पाती. पापा मुझे राजू भईया के साथ नहीं खेलना पर मैं उन्हें रोक भी नहीं पाती. कल मैं जानबूझकर स्कूल से देर से घर आई थी ताकि राजू भईया के साथ खेलना ना पड़े.

मम्मी मुझे अपने साथ भी नहीं ले जातीं. एक दिन मैंने मम्मी से उस खेल के बारे में बात करने की कोशिश भी की लेकिन मम्मी का फ़ोन आ गया और मम्मी ने मेरी बात नहीं सुनी. पापा आप तो मेरी बात समझते हो न?

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मैं एक दिन माली चाचा के साथ खेल रही थी तो राजू भईया ने मम्मी से माली चाचा की शिकायत कर दी कि वो मुझे परेशान करते हैं. मम्मी ने माली चाचा को नौकरी से निकाल दिया. माली चाचा अच्छे थे पापा, राजू भईया गंदे हैं.

पापा मम्मी ने बताया कि आज आप घर आ रहे हैं. जब तक आप नहीं आते मैं छिपी रहूंगी, ताकि राजू भईया मुझे ढूंढ न पाएं. मम्मी अभी-अभी घर से निकली हैं और राजू भईया आते ही होंगे. बाय पापा! किसी को मत बताना कि मैं फ्रिज में छिप रही हूं. जल्दी आना और मुझे यहां आकर 'धप्पा' कहना.

बाय पापा! मुझे ढूंढ लोगे न?

सोना

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ये ख़त मुझे कहां मिला, सवाल ये नहीं है. सवाल ये है कि न जाने कितने राजू भईया हर घर में होंगे और न जाने कितनी सोना हर दिन किसी राजू भईया का शिकार होती होंगी. छोटे बच्चे किसी की हवस का शिकार भी हो जाएं तो उन्हें पता नहीं चलता कि उनके साथ जो हो रहा है वो ग़लत है. अब हम Good Touch-Bad Touch की शिक्षा देते हैं. ये शिक्षा भी हर माता-पिता नहीं दे पाते. एक बार उस बच्चे की हालत के बारे में सोचिए. बहुत से बच्चों के जीवन में वो घटना एक बुरी याद बनकर रह जाती है. कुछ बच्चे, बड़े होने पर आम जीवन जीने लगते हैं, पर बहुत से बच्चे ऐसा नहीं कर पाते. बड़े होने के बाद भी आम ज़िन्दगी नहीं जी पाते, इसका असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ता है. हमारे बच्चों की सुरक्षा हमारी ही ज़िम्मेदारी है.

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