दिल्ली की प्रदूषित हवा से परेशान लोगों के लिए एक राहत की ख़बर आई है. दरअलस, System of Air Quality and Weather Forecasting And Research (सफ़र इंडिया) के सर्वे के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में दिल्ली की हवा दूषित हुई है, लेकिन प्रदूषित हवा में पाए जाने वाले तत्व ज़्यादा ख़तरनाक नहीं हैं. दिल्ली में अति सूक्ष्म कणों की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इन कणों में हानिकारक तत्वों की मात्रा थोड़ी कम है.

क्या कहता है सर्वे?

सफ़र इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली की हवा में अति सूक्ष्म कणों की पीएम 2.5 और पीएम 10 की वृद्धि हुई है, इन कणों में हानिकारक तत्वों की मात्रा ज़्यादा नहीं है. आकड़ों के अनुसार, हवा में 7.6 प्रतिशत ब्लैक कार्बन, 7 प्रतिशत सल्फ़ेट है. अगर इन तत्वों की मात्रा ज़रा भी अधिक होती, तो ये स्वास्थ्य के लिए काफ़ी हानिकारक साबित हो सकते थे. वहीं दिल्ली की हवा में 38 फ़ीसदी एल्यूमिनयम और सीलिकॉन ऑक्साइड है, जो कि पृथ्वी की उपरी सतह में पाया जाता है. ये तत्व ब्लैक कॉर्बन और सल्फ़ेट की तरह हानिकारक नहीं होते.

बातचीत के दौरान प्रोजेक्ट के डॉयरेक्टर गुरफ़ान बेग ने बताया, 'अगर ब्लैक कार्बन या सल्फे़ट कण की मौजूदगी 15-20 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो ये प्रमुख कारकों के तौर पर काम करने लगते हैं. वहीं मुंबई में अति सूक्ष्म कणों का स्तर कम है, लेकिन इन कणों में ब्लैक कार्बन की मात्रा ज़्यादा है.' हलांकि बेग मामले को लेकर चिंता भी व्यक्त की है. उन्होंने कहा, 'भले ही हानिकारक तत्वों की मात्रा कम है, लेकिन अति सूक्ष्म कणों की मात्रा दिल्ली की हवा में अधिक है, जिसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. फ़सलों का अवशेष जलाने के दौरान ब्लैक कार्बन की मात्रा भी बढ़ जाती है. खुले में कूड़ा जलाने और पटाखा छोड़ने से भी इसकी मात्रा बढ़ जाती है.'

सेहत के लिए हैं हानिकारक

पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में वृद्धि, हमारे श्वसन तंत्र के लिए बेहद घातक हैं. इन कणों में पाए जाने वाले हानिकारक तत्व फेफड़े के अंदरूनी हिस्सों में पहुंच कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं, ये हमारे बल्ड में पहुंच जाए, तो ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी समास्याएं उत्पन्न हो जाती है.