देश बदल रहा है या सूख रहा है?

The Telegraph में आयी एक रिपोर्ट के अनुसार, National Institute for Transforming India (NITI) ने चेतावनी दी है कि साल 2020 तक दिल्ली में ज़मीन का पानी पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा. इसके पीछे कई कारण बताये जा रहे हैं, जैसे बढ़ती आबादी, बारिश की कमी, मौसम में बदलाव और लंबा खिंच रहा गर्मी का मौसम.

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वैसे चिंता का ये विषय सिर्फ़ राजधानी दिल्ली तक ही सीमित नहीं है. 24 शहरों से जमा करे गए इस डाटा से पता चलता है कि पूरा देश इस वक़्त पानी की कमी से जूझ रहा है. इस आपदा से 600 मिलियन लोगों पर सीधा-सीधा असर पड़ेगा.

हाल ही में शिमला में इसका एक नमूना देखने को मिल चुका है. पानी की कमी के कारण वहां पर्यटकों को आने से ही मना कर दिया गया.

यही हाल बेंगलुरु का भी है, जो पहले से ही पानी के संकट का सामना कर रहा है. यूं ही चलता रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब एक-एक कर शहर के सारे नल सूख जाएंगे और लोगों को पानी के लिए बाहरी साधनों पर निर्भर होना पड़ेगा.

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दरअसल देश भर में वॉटर-सप्लाई का लगभग 40% स्रोत ज़मीनी पानी ही है, जो तेज़ी से ख़त्म हो रहा है. ऐसे में ज़रूरी है कि इसकी ज़िम्मेदारी हम और प्रशासन दोनों ही लें. एक तरफ़ जल्द से जल्द पानी के दूसरे सक्षम विकल्पों को जल्द से जल्द अपनाया जाना चाहिए, तो दूसरी तरफ़ पानी इस्तेमाल करने में कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाए.

सोचने वाली बात ये है, कि नौकरी और पढ़ाई के नाम पर हज़ारों की संख्या में जो लोग दिल्ली आते हैं, उनके पास कोई दूसरा विकल्प है क्या?

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