'राष्ट्रगान' किसी भी देश के नागरिकों के लिए धर्म से बढ़ कर होता है. इससे देश की पहचान होती है. राष्ट्रगान का सम्मान मतलब देश का सम्मान. ये बात हमें बचपन से ही सिखाई जाती है. राष्ट्रभक्ति सभी धर्मों से बढ़ कर होती है. लेकिन पश्चिम बंगाल में एक काज़ी को बच्चों को राष्ट्रगान सिखाना भारी पड़ गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,पश्चिम बंगाल के एक मदरसे के शिक्षक काज़ी मासूम अख़्तर की पिटाई कुछ मौलवियों ने इसलिए कर दी क्योंकि वे बच्चों को राष्ट्रगान सिखा रहे थे. इतना ही नहीं, मदरसे में राष्ट्रगान और तिरंगा फहराने पर अख़्तर के ख़िलाफ फ़तवा भी जारी किया गया है.

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि मौलवियों ने अख़्तर के ख़िलाफ जारी फ़तवा में राष्ट्रगान (जन गण मन) को अपवित्र और हिंदूवादी गीत बताया है.

इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं

जमीयत उलेमा के वाइस प्रेसिडेंट मुफ़्ती सैयद मिर्ज़ाउद्दीन अबरार ने इसे धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कही है. लेकिन अख़्तर से मारपीट को गलत बताया है.

अख़्तर को इस्लामिक ड्रेस पहनने की हिदायत दी गई है

अख़्तर तालपुकुर आला मदरसे में टीचर हैं. अख़्तर के मुताबिक, उन्हें पूरी तरह से इस्लामिक ड्रेस में मदरसा आने को कहा गया है. उनके क्लीन शेव और जींस पहनने पर भी पाबंदी है.

मौलवियो ने दाढी बढ़ाने को कहा है

अख़्तर मदरसा में क्लीन शेव में जाते हैं. इस वजह से मौलवियों को उनसे आपत्ति है. उन्होंने अख़्तर को हिदायत दी है कि वे दाढ़ी बढ़ा कर मदरसे में दाखिल हों और हर हफ्ते फोटो खींच कर भेजें.

सुरक्षित नहीं है अख़्तर की जान

मार-पीट के बाद से अख़्तर मदरसा नहीं गए हैं. मौलाओं ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है. इसके लिए उन्होंने सीएम ममता बनर्जी से सुरक्षा की गुहार लगाई है.